चारू चौधरी का अखिलेश यादव पर पलटवार, बोलीं-‘चौधराहट में मेरा ब्याह हुआ, जयंत पर गर्व है’

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Digital UP News Desk

सहारनपुर: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में बयानबाजी तेज होती जा रही है। इसी बीच राष्ट्रीय लोकदल (RLD) अध्यक्ष जयंत चौधरी की पत्नी चारू चौधरी का सहारनपुर में दिया गया बयान चर्चा का विषय बन गया है। स्वाभिमान रैली को संबोधित करते हुए चारू चौधरी ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के उस बयान पर पलटवार किया, जिसमें उन्होंने जयंत चौधरी को लेकर ‘चवन्नी’ वाली टिप्पणी की थी।

चारू चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि उनका विवाह ‘चौधराहट’ वाले परिवार में हुआ है और उन्हें अपने परिवार तथा पति जयंत चौधरी पर गर्व है। उनके इस बयान को राजनीतिक विश्लेषक अखिलेश यादव की टिप्पणी के जवाब के तौर पर देख रहे हैं। खास तौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जाट राजनीति में इस बयान की चर्चा हो रही है।

अखिलेश यादव के बयान पर चारू चौधरी का पलटवार

दरअसल, पिछले महीने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जयंत चौधरी को लेकर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि वे ‘कहां-कहां से आ गए थे’ और ‘हमने चवन्नी से रुपया बना दिया, फिर भी छोड़कर चले गए।’ इस बयान के बाद राष्ट्रीय लोकदल की ओर से लगातार प्रतिक्रिया सामने आती रही है।

अब सहारनपुर की स्वाभिमान रैली में चारू चौधरी ने सीधे तौर पर इस टिप्पणी का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि ‘चौधराहट में मेरा ब्याह हुआ है और इस परिवार पर मुझे गर्व है, जयंत पर गर्व है।’ उनके इस बयान को जयंत चौधरी के राजनीतिक सम्मान से जोड़कर देखा जा रहा है।

चारू चौधरी का यह अंदाज इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वह आम तौर पर राजनीतिक मंचों पर जयंत चौधरी के साथ दिखाई तो देती हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से बेहद आक्रामक राजनीतिक बयान कम ही देती हैं। हालांकि, सहारनपुर की रैली में उन्होंने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के बयान पर खुलकर अपनी बात रखी।

पश्चिमी यूपी में क्यों महत्वपूर्ण है यह बयान?

पश्चिमी उत्तर प्रदेश लंबे समय से जाट राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। इस क्षेत्र में राष्ट्रीय लोकदल की राजनीतिक मौजूदगी और चौधरी परिवार की अपनी पहचान रही है। ऐसे में जयंत चौधरी को लेकर दिया गया कोई भी बयान राजनीतिक तौर पर चर्चा का विषय बन जाता है।

अखिलेश यादव की ‘चवन्नी’ वाली टिप्पणी के बाद RLD समर्थकों में नाराजगी की बात सामने आई। चारू चौधरी ने भी अपने भाषण में इसी भावनात्मक पहलू को सामने रखा। उन्होंने ‘चौधराहट’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए परिवार और सम्मान की बात की।

दरअसल, पश्चिमी यूपी की राजनीति में व्यक्तिगत सम्मान और राजनीतिक रिश्तों का मुद्दा कई बार चुनावी समीकरणों को प्रभावित करता रहा है। इसलिए चारू चौधरी के बयान को केवल व्यक्तिगत प्रतिक्रिया के तौर पर नहीं, बल्कि व्यापक राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।

मंच पर बेटियां साहिरा और एलिशा भी रहीं मौजूद

सहारनपुर में आयोजित स्वाभिमान रैली में चारू चौधरी अकेली नहीं पहुंचीं। उनके साथ उनकी दोनों बेटियां साहिरा और एलिशा भी मौजूद थीं। रैली के मंच पर परिवार की मौजूदगी ने कार्यक्रम को और अधिक चर्चा में ला दिया।

चारू चौधरी ने अपने भाषण में पति जयंत चौधरी के प्रति सम्मान और गर्व का भाव जाहिर किया। इसके साथ ही उन्होंने राजनीतिक विरोधियों की बयानबाजी पर भी अपनी नाराजगी जाहिर की।

रैली के दौरान उनका आत्मविश्वास और राजनीतिक अंदाज समर्थकों के बीच चर्चा का विषय रहा। विशेष रूप से उनका ‘चौधराहट’ वाला बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं में तेजी से उभरता नजर आया।

कौन हैं चारू चौधरी?

चारू चौधरी, जयंत चौधरी की पत्नी और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत चौधरी अजीत सिंह की पुत्रवधू हैं। जयंत चौधरी और चारू चौधरी की शादी वर्ष 2003 में हुई थी। चारू का मूल क्षेत्र फैशन और डिजाइनिंग से जुड़ा रहा है।

उन्होंने दिल्ली के ज्वैलरी प्रोडक्ट डेवलपमेंट सेंटर से शिक्षा प्राप्त की है। इसके अलावा उन्होंने जेमोलॉजिकल इंस्टीट्यूट ऑफ अमेरिका से भी अध्ययन किया है। उन्हें आभूषण और डिजाइनिंग के क्षेत्र में रुचि रही है।

चारू चौधरी की रुचि शेयर बाजार में भी बताई जाती है। वर्ष 2014 में जयंत चौधरी के चुनावी हलफनामे से जुड़ी जानकारी के अनुसार, चारू के नाम पर शेयर बाजार में निवेश और अन्य संपत्तियों का उल्लेख किया गया था।

राजनीति में पर्दे के पीछे निभाती रही हैं भूमिका

चारू चौधरी लंबे समय से राष्ट्रीय लोकदल की राजनीतिक गतिविधियों में जयंत चौधरी का सहयोग करती रही हैं। हालांकि, उन्होंने सक्रिय राजनीति में औपचारिक भूमिका सीमित रखी, लेकिन चुनावी अभियानों और रैलियों में उनकी मौजूदगी लगातार देखने को मिलती रही है।

चौधरी अजीत सिंह ने भी उन्हें पार्टी के चुनाव प्रचार में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी थी। इसके बाद वह RLD के लिए कई चुनावी अभियानों में सक्रिय नजर आईं।

विशेष रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में होने वाली पार्टी की रैलियों में चारू चौधरी की मौजूदगी समर्थकों के बीच चर्चा में रहती है। अब सहारनपुर की रैली में उनके मुखर राजनीतिक तेवर ने एक बार फिर उन्हें सुर्खियों में ला दिया है।

जयंत चौधरी और चारू की पारिवारिक पृष्ठभूमि

चारू चौधरी पंजाबी परिवार से आती हैं। जयंत चौधरी और चारू की दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी का नाम साहिरा और छोटी बेटी का नाम एलिशा बताया जाता है।

चारू चौधरी का परिवार लंबे समय से राजनीतिक गतिविधियों से जुड़ा रहा है। उनके पति जयंत चौधरी वर्तमान में राष्ट्रीय लोकदल का नेतृत्व कर रहे हैं। वहीं उनके ससुर चौधरी अजीत सिंह पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति के प्रमुख चेहरों में रहे हैं।

ऐसे में चारू चौधरी का राजनीतिक मंच पर उतरना केवल परिवार तक सीमित मामला नहीं माना जा रहा है। पश्चिमी यूपी की राजनीति में चौधरी परिवार की पारंपरिक भूमिका को देखते हुए उनके बयान का राजनीतिक महत्व भी निकाला जा रहा है।

2027 चुनाव से पहले बढ़ रही राजनीतिक हलचल

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। खास तौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश में विभिन्न दलों के बीच राजनीतिक संदेशों और सामाजिक समीकरणों को लेकर गतिविधियां बढ़ रही हैं।

एक तरफ समाजवादी पार्टी अपने संगठन और राजनीतिक आधार को मजबूत करने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय लोकदल भी अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में सक्रियता बढ़ा रहा है। ऐसे में दोनों दलों के नेताओं के बीच बयानबाजी का असर आगामी चुनावी रणनीतियों पर पड़ सकता है।

चारू चौधरी का सहारनपुर में दिया गया बयान इसी राजनीतिक माहौल का हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस बयान के बाद सपा और RLD के बीच राजनीतिक बयानबाजी किस दिशा में आगे बढ़ती है।

क्या पश्चिमी यूपी में बदलेगा सियासी माहौल?

चारू चौधरी के सक्रिय राजनीतिक तेवरों ने एक अहम सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या वह आने वाले समय में राष्ट्रीय लोकदल के लिए और अधिक सक्रिय भूमिका निभाएंगी? अभी इस संबंध में कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। फिर भी, सहारनपुर की रैली में उनका संबोधन राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट मतदाताओं और चौधरी परिवार के बीच लंबे समय से राजनीतिक संबंध रहे हैं। इसलिए चारू चौधरी का ‘सम्मान’ और ‘स्वाभिमान’ पर जोर देना RLD के राजनीतिक संदेश का हिस्सा भी हो सकता है।

फिलहाल, सहारनपुर की स्वाभिमान रैली से चारू चौधरी ने यह स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है कि जयंत चौधरी और उनके परिवार के सम्मान को लेकर वह मुखर हैं। अब देखना होगा कि इस बयान का आगामी दिनों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति पर कितना असर पड़ता है।

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