दिल्ली के नजफगढ़ में 300 से अधिक कचरा बीनने वाले श्रमिकों को मिला ‘नमस्ते’ कार्ड, अठावले ने बांटे आयुष्मान कार्ड
Digital UP News Desk
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में कचरा बीनने वाले श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने शुक्रवार को मटियाला स्थित एमसीडी सामुदायिक भवन में आयोजित कार्यक्रम में नजफगढ़ जोन के कचरा बीनने वाले श्रमिकों को ‘नमस्ते’ कार्ड वितरित करने के कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड भी प्रदान किए गए।
यह कार्यक्रम केंद्र सरकार की राष्ट्रीय मशीनीकृत स्वच्छता पारिस्थितिकी तंत्र कार्ययोजना (NAMASTE) के तहत आयोजित किया गया। योजना का उद्देश्य स्वच्छता से जुड़े श्रमिकों की सुरक्षा, गरिमा और सामाजिक-आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाना है। इसके साथ ही उन्हें सरकारी कल्याणकारी योजनाओं, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
स्वच्छता व्यवस्था में कचरा बीनने वाले श्रमिकों की अहम भूमिका
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कचरा बीनने वाले श्रमिकों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि शहरों को स्वच्छ रखने और बेहतर स्वास्थ्यकर वातावरण तैयार करने में इन श्रमिकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
कचरा बीनने वाले श्रमिक रोजाना शहरों से निकलने वाले विभिन्न प्रकार के कचरे को अलग करने और उसे पुनर्चक्रण की प्रक्रिया तक पहुंचाने में योगदान देते हैं। हालांकि, लंबे समय तक इस काम से जुड़े कई श्रमिक औपचारिक पहचान और सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं से वंचित रहे हैं। ऐसे में ‘नमस्ते’ योजना के माध्यम से उन्हें सरकारी व्यवस्था से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
मंत्री ने श्रमिकों को भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी कार्य परिस्थितियों में सुधार और कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए लगातार सहयोग करेगी। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि स्वच्छता से जुड़े कार्य करने वाले लोगों को सम्मान और गरिमा के साथ सुविधाएं मिलनी चाहिए।
‘नमस्ते’ कार्ड से मिलेगी औपचारिक पहचान
कार्यक्रम का एक प्रमुख उद्देश्य कचरा बीनने वाले श्रमिकों को औपचारिक पहचान उपलब्ध कराना है। ‘नमस्ते’ कार्ड इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण माध्यम है। इसके जरिए श्रमिकों को सरकारी योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ने में सहायता मिलेगी।
नजफगढ़ जोन के 300 से अधिक कचरा बीनने वाले श्रमिकों ने कार्यक्रम में भाग लिया। कार्ड वितरण के माध्यम से इन श्रमिकों की पहचान को सरकारी तंत्र के साथ जोड़ने का प्रयास किया गया है। इससे भविष्य में उनके लिए उपलब्ध विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना अधिक व्यवस्थित हो सकता है।
इसके अलावा, औपचारिक पहचान मिलने से श्रमिकों को अपने अधिकारों और उपलब्ध सरकारी सुविधाओं के बारे में जानकारी प्राप्त करने में भी मदद मिल सकती है।
आयुष्मान कार्ड से स्वास्थ्य सुरक्षा पर जोर
कार्यक्रम में ‘नमस्ते’ कार्ड के साथ लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड भी वितरित किए गए। इसका उद्देश्य कचरा बीनने वाले श्रमिकों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य सेवा कवरेज से जोड़ना है।
स्वच्छता से जुड़े कार्यों में लगे श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा विशेष महत्व रखती है। ऐसे में स्वास्थ्य संबंधी सरकारी योजनाओं तक उनकी पहुंच बढ़ाना सामाजिक सुरक्षा के व्यापक उद्देश्य का हिस्सा है।
आयुष्मान कार्ड के वितरण से यह संदेश भी गया कि श्रमिकों के कल्याण को केवल रोजगार या पहचान तक सीमित नहीं रखा जा रहा है, बल्कि स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा जैसे क्षेत्रों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
NAMASTE योजना का क्या है उद्देश्य?
राष्ट्रीय मशीनीकृत स्वच्छता पारिस्थितिकी तंत्र कार्ययोजना यानी NAMASTE सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की केंद्रीय क्षेत्र की योजना है। इसे स्वच्छता कर्मियों की सुरक्षा, गरिमा और सामाजिक-आर्थिक उत्थान को ध्यान में रखते हुए लागू किया गया है।
इस योजना के दायरे में सीवर और सेप्टिक टैंक कर्मियों के साथ-साथ कचरा बीनने वाले श्रमिक भी शामिल हैं। योजना का व्यापक उद्देश्य स्वच्छता से जुड़े श्रमिकों को औपचारिक पहचान प्रदान करना और उन्हें स्वास्थ्य तथा सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं से जोड़ना है।
इसके अलावा, योजना में कौशल विकास और जोखिमपूर्ण स्वच्छता कार्यों के मशीनीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इसका मकसद श्रमिकों को जोखिमपूर्ण कार्य परिस्थितियों से बचाने के साथ-साथ आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।
मशीनीकरण से सुरक्षित कार्य वातावरण की उम्मीद
स्वच्छता क्षेत्र में मशीनीकरण को बढ़ावा देना NAMASTE योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू है। जोखिमपूर्ण स्वच्छता कार्यों में मशीनों के इस्तेमाल से श्रमिकों की सुरक्षा बेहतर करने की कोशिश की जा रही है।
दरअसल, स्वच्छता व्यवस्था को आधुनिक बनाने के साथ श्रमिकों के काम करने के तरीके में भी बदलाव की आवश्यकता है। इसलिए सरकार की योजनाओं में केवल आर्थिक सहायता या पहचान देने के बजाय सुरक्षित कार्य वातावरण तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
इसी क्रम में श्रमिकों की पहचान, स्वास्थ्य सुरक्षा, कौशल विकास और सामाजिक सुरक्षा को एक साथ जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने की दिशा में कदम
कचरा बीनने वाले श्रमिक शहरी स्वच्छता व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इसके बावजूद इस क्षेत्र में काम करने वाले लोगों तक कई बार सरकारी योजनाओं का लाभ व्यवस्थित तरीके से नहीं पहुंच पाता। ‘नमस्ते’ कार्ड वितरण जैसे कार्यक्रम इस अंतर को कम करने में मदद कर सकते हैं।
औपचारिक पहचान के बाद श्रमिकों को सरकारी योजनाओं से जोड़ना आसान हो सकता है। साथ ही, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं तक पहुंच बढ़ने से उनके जीवन स्तर में सुधार की संभावना भी बढ़ती है।
इसलिए नजफगढ़ जोन में आयोजित यह कार्यक्रम केवल कार्ड वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वच्छता कार्यबल को सरकारी कल्याणकारी व्यवस्था से जोड़ने की व्यापक पहल का हिस्सा है।
सरकार के निरंतर सहयोग का आश्वासन
कार्यक्रम के दौरान रामदास अठावले ने श्रमिकों के प्रति सरकार के सहयोग और समर्थन को दोहराया। उन्होंने स्वच्छता कर्मियों के योगदान को देश के स्वच्छता और जनस्वास्थ्य प्रयासों के लिए आवश्यक बताया।
उन्होंने कहा कि स्वच्छ शहरों के निर्माण में जिन लोगों का प्रत्यक्ष योगदान है, उनके हितों और सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से स्वच्छता कर्मियों को सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ने का प्रयास कर रही है।

