मथुरा में 30 मिनट की बारिश ने किया तालाब जैसा माहौल, कई अंडरपास डूबे, जल निकासी पर उठे सवाल

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रिपोर्ट – योगेश भरतद्वाज

मथुरा: मंगलवार को मथुरा में करीब 30 मिनट तक हुई तेज बारिश ने एक ओर लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत दिलाई, वहीं दूसरी ओर शहर की जलनिकासी व्यवस्था की चुनौतियों को एक बार फिर सामने ला दिया।

बारिश थमने के कुछ ही समय बाद कई निचले इलाके, प्रमुख सड़कें और अंडरपास जलमग्न हो गए, जिससे आम नागरिकों, श्रद्धालुओं और वाहन चालकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

हालांकि नगर निगम ने जलभराव की सूचना मिलते ही पंपसेट लगाकर पानी निकालने का कार्य शुरू कर दिया, लेकिन स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर वर्ष बरसात के मौसम में यही स्थिति देखने को मिलती है।

ऐसे में उन्होंने अस्थायी उपायों के बजाय स्थायी समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया।

बारिश से मिली गर्मी से राहत, तापमान में आई गिरावट

मौसम विभाग के अनुसार मंगलवार को हुई बारिश के बाद तापमान में कमी दर्ज की गई। इसके साथ ही वातावरण में ठंडक घुलने से लोगों को लगातार बनी उमस और गर्मी से राहत मिली।

दिनभर की तपिश के बाद हुई बारिश ने मौसम को सुहावना बना दिया। हालांकि, राहत का यह अनुभव अधिक देर तक नहीं टिक सका क्योंकि कई स्थानों पर जलभराव की समस्या सामने आने लगी।

भूतेश्वर रेलवे पुल के नीचे सबसे अधिक जलभराव

बारिश के बाद सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में भूतेश्वर रेलवे पुल के नीचे स्थित अंडरपास रहा। यहां घुटनों तक पानी भर गया, जिसके कारण दोपहिया वाहन चालकों को विशेष कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

कई मोटरसाइकिल और स्कूटी पानी में बंद हो गईं, जबकि कुछ वाहन चालकों को अपने वाहन धक्का देकर बाहर निकालने पड़े। इससे कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस स्थान पर लगभग हर वर्ष बारिश के दौरान इसी प्रकार की स्थिति बन जाती है।

कई प्रमुख सड़कें और अंडरपास भी हुए प्रभावित

भूतेश्वर के अलावा शहर के अन्य कई हिस्सों में भी जलभराव दर्ज किया गया।

प्रभावित क्षेत्रों में प्रमुख रूप से—

  • नया बस स्टैंड अंडरपास
  • बीएसए रोड
  • महोली रोड
  • मंडी चौराहा अंडरपास
  • गोवर्धन चौराहा अंडरपास
  • हाईवे सर्विस रोड
  • घीया मंडी
  • चौक बाजार
  • स्वामी घाट
  • होली गेट

शामिल रहे।

इन स्थानों पर बारिश का पानी जमा होने से यातायात की गति धीमी पड़ गई और लोगों को आवागमन में अतिरिक्त समय लगाना पड़ा।

कई प्रमुख मार्गों पर लगा जाम

जलभराव के कारण शहर के कई प्रमुख मार्गों पर यातायात भी प्रभावित हुआ।

विशेष रूप से भूतेश्वर तिराहा से श्रीकृष्ण जन्मभूमि जाने वाले मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। इसके अलावा—

  • डीग गेट
  • भरतपुर गेट
  • होली गेट
  • एसबीआई चौराहा

पर भी कुछ समय के लिए जाम की स्थिति बनी रही।

इस दौरान स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ बाहर से आए श्रद्धालुओं को भी असुविधा का सामना करना पड़ा।

नगर निगम ने शुरू कराई पानी निकासी

जलभराव की सूचना मिलने के बाद नगर आयुक्त जग प्रवेश के निर्देश पर नगर निगम की टीम विभिन्न प्रभावित क्षेत्रों में पहुंची।

नगर निगम की ओर से—

  • भूतेश्वर क्षेत्र में 4 पंपसेट लगाए गए।
  • नया बस स्टैंड अंडरपास पर 2 पंपसेट लगाकर पानी निकालने का कार्य शुरू किया गया।

इसके अतिरिक्त संवेदनशील अंडरपासों पर सुरक्षा की दृष्टि से बैरिकेडिंग की गई तथा कुछ स्थानों पर यातायात को वैकल्पिक मार्गों की ओर मोड़ दिया गया।

जहां आवश्यकता महसूस हुई, वहां हाइड्रा मशीन की सहायता से मार्गों को अस्थायी रूप से बंद भी किया गया ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना की संभावना न रहे।

नगर निगम अधिकारियों को दी गई निगरानी की जिम्मेदारी

नगर आयुक्त जग प्रवेश ने बताया कि जलनिकासी व्यवस्था की निगरानी के लिए विभिन्न अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है।

उन्होंने बताया कि अपर नगर आयुक्त सौरभ सिंह, सहायक नगर आयुक्त राकेश त्यागी, महाप्रबंधक तथा नगर स्वास्थ्य अधिकारी को प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

नगर निगम का कहना है कि बारिश के दौरान उत्पन्न परिस्थितियों से निपटने के लिए सभी संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

स्थानीय लोगों ने उठाए स्थायी समाधान के सवाल

हालांकि नगर निगम द्वारा त्वरित कार्रवाई की गई, लेकिन स्थानीय नागरिकों का कहना है कि हर वर्ष बारिश के समय यही स्थिति दोहराई जाती है।

विशेष रूप से महोली क्षेत्र के निवासियों का कहना है कि वहां लंबे समय से जलभराव की समस्या बनी हुई है। उनके अनुसार कई स्थानों पर पिछले कई महीनों से जलनिकासी की समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि केवल पंपसेट लगाकर पानी निकालना अस्थायी समाधान है। इसके बजाय शहर की संपूर्ण जलनिकासी प्रणाली को मजबूत करने की आवश्यकता है।

जलभराव से स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं भी बढ़ीं

विशेषज्ञों के अनुसार बरसात के बाद लंबे समय तक गंदा पानी जमा रहने से मच्छरों के पनपने और जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

इसी कारण नागरिकों ने नगर निगम से समयबद्ध जलनिकासी, नियमित सफाई और स्वच्छता व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

भूमिगत नाला परियोजना पर टिकी उम्मीदें

नगर निगम के अनुसार भूतेश्वर से मसानी नाले तक लगभग 1800 मीटर लंबा भूमिगत नाला बनाने का प्रस्ताव स्वीकृत किया जा चुका है। इस परियोजना की अनुमानित लागत करीब 6 करोड़ रुपये बताई गई है।

यदि यह परियोजना समय पर पूरी होती है, तो भविष्य में जलभराव की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

हालांकि, समाचार लिखे जाने तक इस परियोजना पर निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ था।

ऐसे में स्थानीय नागरिकों का कहना है कि परियोजना का शीघ्र क्रियान्वयन आवश्यक है ताकि प्रत्येक मानसून में होने वाली परेशानियों से स्थायी राहत मिल सके।

मथुरा में मंगलवार को हुई लगभग 30 मिनट की बारिश ने मौसम को सुहावना जरूर बनाया, लेकिन इसके साथ ही शहर की जलनिकासी व्यवस्था की चुनौतियों को भी उजागर कर दिया।

कई अंडरपास और निचले इलाके जलमग्न होने से यातायात प्रभावित हुआ और लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ा।

नगर निगम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पंपसेट लगाकर पानी निकासी शुरू की, किंतु स्थानीय नागरिकों का मानना है कि हर वर्ष दोहराई जाने वाली इस समस्या का समाधान केवल अस्थायी उपायों से संभव नहीं है।

ऐसे में विशेषज्ञों और नागरिकों दोनों का मानना है कि भूमिगत नाला जैसी दीर्घकालिक परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करना ही भविष्य में जलभराव की समस्या से राहत दिलाने का प्रभावी उपाय हो सकता है।

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