गोंडा में स्कूल की छुट्टी के बाद कमरे में बंद हुआ 6 साल का बच्चा, टेबल के नीचे सोने से शिक्षकों की नजर नहीं पड़ी

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Digital UP News Desk

गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के मनकापुर शिक्षा क्षेत्र के भवरियापारा प्राथमिक विद्यालय से लापरवाही से जुड़ा एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। स्कूल की छुट्टी के बाद एक छह साल का बच्चा अनजाने में क्लासरूम के अंदर ही रह गया और कमरा बंद हो गया। बच्चा कक्षा के पीछे रखी एक टेबल के नीचे सो गया था। इस वजह से छुट्टी के समय शिक्षकों की नजर उस पर नहीं पड़ी।

हालांकि, राहत की बात यह रही कि शिक्षक विद्यालय परिसर से पूरी तरह बाहर नहीं निकले थे। वे मुख्य गेट के पास पहुंचकर अपनी गाड़ी स्टार्ट करने की तैयारी कर रहे थे, तभी उन्हें क्लासरूम के अंदर से बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। आवाज सुनते ही शिक्षक तुरंत वापस कक्षा की ओर दौड़े और दरवाजा खोलकर बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

पेट दर्द के कारण टेबल के नीचे सो गया था बच्चा

जानकारी के मुताबिक, बच्चा विद्यालय में नियमित रूप से पढ़ने वाला छात्र नहीं था। वह बिना एडमिशन के ही गांव के कुछ अन्य बच्चों के साथ स्कूल चला गया था। इसी दौरान पढ़ाई के समय उसके पेट में दर्द होने लगा।

पेट दर्द की वजह से बच्चा कक्षा के पीछे चला गया और वहां रखी एक टेबल के नीचे लेटकर सो गया। इसी दौरान स्कूल में छुट्टी हो गई। रोज की तरह शिक्षकों ने कक्षा की जांच के बाद कमरा बंद किया और विद्यालय के मुख्य गेट की ओर चले गए।

चूंकि बच्चा टेबल के नीचे सो रहा था, इसलिए उसकी मौजूदगी शिक्षकों की नजर में नहीं आ सकी। यही वजह रही कि छुट्टी के बाद भी वह कमरे के अंदर रह गया।

गाड़ी स्टार्ट करते समय सुनाई दी रोने की आवाज

बताया गया कि शिक्षक क्लासरूम बंद करने के बाद मुख्य गेट तक पहुंच चुके थे और गाड़ी स्टार्ट करने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें अंदर से बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी।

आवाज सुनकर शिक्षक तुरंत सतर्क हो गए। उन्होंने बिना देरी किए वापस क्लासरूम की ओर जाकर दरवाजा खोला। इसके बाद बच्चे को कमरे से बाहर निकाला गया।

बाहर आने के बाद बच्चे ने शिक्षकों को बताया कि उसके पेट में दर्द था। दर्द के कारण उसे नींद आ गई और उसे पता ही नहीं चला कि स्कूल की छुट्टी हो गई है। जब वह जागा तो खुद को कमरे के अंदर बंद पाया और डर के कारण रोने लगा।

बच्चे के पिता को बुलाकर किया गया सुपुर्द

बच्चे को क्लासरूम से बाहर निकालने के बाद विद्यालय के शिक्षकों ने उसके परिवार को सूचना दी। बच्चे के पिता राममिलन कश्यप को स्कूल बुलाया गया और बच्चे को उनके सुपुर्द कर दिया गया।

इस घटना की जानकारी सामने आने के बाद बच्चे के परिवार की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई। बच्चे की मां मीरा देवी ने कहा कि वह इस मामले में किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं चाहती हैं।

उनके मुताबिक, उनका बेटा बिना एडमिशन के ही गांव के दूसरे बच्चों के साथ स्कूल चला गया था। स्कूल में रहते समय उसके पेट में दर्द हुआ और वह कक्षा में पीछे रखी टेबल के नीचे सो गया। नीचे सोने के कारण वह शिक्षकों को दिखाई नहीं दिया।

मां ने कार्रवाई से किया इनकार

मीरा देवी ने कहा कि उन्हें इस मामले में किसी की गलती नजर नहीं आती। उनका कहना है कि बच्चा खुद बिना एडमिशन के स्कूल चला गया था और तबीयत खराब होने के कारण सो गया।

परिवार ने मामले को लेकर किसी प्रकार की कार्रवाई की मांग नहीं की है। बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालकर परिवार को सौंप दिया गया। घटना के बाद बच्चे की स्थिति को लेकर भी परिवार की ओर से कोई गंभीर चिंता नहीं जताई गई।

खंड शिक्षा अधिकारी ने दी सफाई

मामला सामने आने के बाद मनकापुर के खंड शिक्षा अधिकारी की ओर से भी जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि बच्चा लंबे समय तक कमरे में बंद नहीं रहा था।

खंड शिक्षा अधिकारी के अनुसार, शिक्षक विद्यालय के मुख्य गेट तक ही पहुंचे थे। इसी दौरान बच्चे के जागने के बाद उसके रोने की आवाज सुनाई दी। आवाज सुनते ही शिक्षक तत्काल वापस क्लासरूम में पहुंचे और दरवाजा खोलकर बच्चे को बाहर निकाल लिया।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि घटना के दौरान बच्चे को काफी देर तक कमरे में बंद नहीं रहना पड़ा। शिक्षक समय रहते उसकी आवाज सुनकर वापस लौट आए थे।

स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति को लेकर सतर्कता जरूरी

यह घटना भले ही थोड़े समय में समाप्त हो गई और बच्चा सुरक्षित अपने परिवार के पास पहुंच गया, लेकिन इससे विद्यालयों में छुट्टी के समय बच्चों की उपस्थिति की दोबारा जांच करने की जरूरत जरूर सामने आती है।

खासकर प्राथमिक विद्यालयों में छोटे बच्चों की निगरानी बेहद महत्वपूर्ण होती है। बच्चे कई बार खेलते हुए या तबीयत खराब होने पर कक्षा के किसी कोने में चले जाते हैं। ऐसे में छुट्टी के समय प्रत्येक कक्षा को व्यवस्थित तरीके से जांचना जरूरी है।

इस घटना में बच्चा किसी नियमित छात्र के रूप में विद्यालय में मौजूद नहीं था। वह गांव के अन्य बच्चों के साथ स्कूल पहुंचा था। इसलिए विद्यालय प्रशासन के लिए यह भी जरूरी है कि परिसर में आने वाले बच्चों की स्थिति और उपस्थिति पर पर्याप्त ध्यान दिया जाए।

घटना से मिली सतर्कता की सीख

भवरियापारा प्राथमिक विद्यालय की यह घटना किसी बड़े नुकसान में तब्दील नहीं हुई, लेकिन इससे स्कूल प्रशासन और अभिभावकों दोनों के लिए सतर्कता की सीख मिलती है। विद्यालय की छुट्टी के समय कक्षाओं की जांच करने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि कोई बच्चा परिसर में अकेला या अनजाने में न रह जाए।

वहीं, अभिभावकों के लिए भी यह महत्वपूर्ण है कि छोटे बच्चों को विद्यालय भेजते समय उन्हें स्कूल की व्यवस्था और उनकी उपस्थिति से जुड़ी जानकारी हो। यदि बच्चा नियमित छात्र नहीं है, तो उसे स्कूल भेजने से पहले संबंधित शिक्षक या विद्यालय प्रशासन को जानकारी देना बेहतर होगा।

फिलहाल, इस मामले में बच्चे को सुरक्षित उसके पिता के सुपुर्द किया जा चुका है। बच्चे की मां ने भी किसी के खिलाफ कार्रवाई की मांग नहीं की है। शिक्षा विभाग की ओर से भी बताया गया है कि बच्चा कम समय के लिए ही कमरे में बंद रहा और उसकी आवाज सुनते ही शिक्षक तत्काल उसे बाहर निकालने पहुंच गए थे।

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