AIMIM को बड़ा झटका: राष्ट्रीय प्रवक्ता आसिम वकार कांग्रेस में शामिल, ओवैसी की पार्टी छोड़ने की बताई वजह

WhatsApp Image 2026-09-02 at 4.17.01 PM

Digital UP News Desk

लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राजनीतिक दलों के बीच सियासी हलचल तेज हो गई है। इसी बीच असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आसिम वकार ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है। उन्होंने दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इस दौरान उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय, यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी भी मौजूद रहे।

आसिम वकार के कांग्रेस में शामिल होने को उत्तर प्रदेश की आगामी सियासत के लिहाज से अहम माना जा रहा है। खासतौर पर ऐसे समय में जब राजनीतिक दल 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे हैं। वहीं, वकार के पार्टी छोड़ने से AIMIM और असदुद्दीन ओवैसी की रणनीति को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

कांग्रेस में शामिल होने के बाद आसिम वकार ने क्या कहा?

कांग्रेस में शामिल होने के बाद आसिम वकार ने AIMIM को लेकर कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ऊपरी नेतृत्व के स्तर पर भले ही बीजेपी का विरोध करती नजर आती है, लेकिन जमीनी स्तर पर उसका मुकाबला कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों से होता है।

वकार ने कहा कि उन्हें पार्टी की यह राजनीतिक रणनीति स्वीकार नहीं थी। इसी वजह से उन्होंने AIMIM छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने का फैसला किया।

उन्होंने यह भी कहा कि देश में बीजेपी को सत्ता से हटाना और एक धर्मनिरपेक्ष सरकार बनाना उन लोगों का लक्ष्य होना चाहिए, जो देश की लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था में विश्वास रखते हैं। उनके मुताबिक, इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने कांग्रेस के साथ जाने का फैसला किया है।

हालांकि, उनके इन राजनीतिक आरोपों और दावों को संबंधित दलों के बयानों के साथ ही देखा जाना चाहिए। राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा लगाए गए आरोप अपने आप में प्रमाणित तथ्य नहीं होते।

आसिम वकार ने हुमायूं कबीर का भी किया जिक्र

कांग्रेस में शामिल होने के दौरान आसिम वकार ने पश्चिम बंगाल के नेता हुमायूं कबीर का भी जिक्र किया। उन्होंने कबीर पर बीजेपी का एजेंट होने का आरोप लगाया।

वकार ने कथित स्टिंग ऑपरेशन का हवाला देते हुए एक बड़े आर्थिक लेनदेन का दावा भी किया। उन्होंने आरोप लगाया कि हुमायूं कबीर को 1,100 करोड़ रुपये दिए गए थे। हालांकि, इस तरह के गंभीर आरोपों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।

आसिम वकार ने कहा कि यदि भविष्य में केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनती है तो इस पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। उन्होंने सवाल उठाया कि कथित तौर पर दिया गया पैसा किसने दिया और उसका इस्तेमाल कहां हुआ।

इस बयान के बाद कांग्रेस में उनके शामिल होने के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया सामने आना भी महत्वपूर्ण होगा।

AIMIM में लंबे समय से राष्ट्रीय प्रवक्ता थे वकार

आसिम वकार AIMIM के प्रमुख राष्ट्रीय प्रवक्ताओं में शामिल रहे हैं। पार्टी के मंचों पर वह कई मुद्दों को लेकर मुखर नजर आते रहे हैं। खासकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में AIMIM की भूमिका को लेकर भी वह पार्टी का पक्ष रखते रहे हैं।

ऐसे में उनका पार्टी छोड़ना AIMIM के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। दूसरी ओर, कांग्रेस के लिए भी यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि पार्टी उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है।

विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर कांग्रेस लगातार संगठन को मजबूत करने और अलग-अलग सामाजिक एवं राजनीतिक वर्गों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में AIMIM के एक प्रमुख प्रवक्ता का कांग्रेस में शामिल होना पार्टी के लिए राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा सकता है।

2027 के चुनाव पर नजर

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं। चुनाव में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। कांग्रेस की कोशिश प्रदेश में अपने संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ विपक्षी खेमे में अपनी भूमिका बढ़ाने की है।

वहीं, समाजवादी पार्टी के साथ कांग्रेस के राजनीतिक संबंध भी उत्तर प्रदेश की चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा हैं। ऐसे में AIMIM के नेता का कांग्रेस में शामिल होना आने वाले समय में विपक्षी राजनीति के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।

हालांकि, किसी एक नेता के पार्टी बदलने से चुनावी नतीजों पर सीधा असर पड़ता है, ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी। इसका वास्तविक प्रभाव चुनाव के दौरान संगठन, उम्मीदवारों और गठबंधन की रणनीति के आधार पर ही स्पष्ट होगा।

2022 में कांग्रेस का प्रदर्शन रहा था कमजोर

पिछले विधानसभा चुनाव यानी 2022 में कांग्रेस का प्रदर्शन उत्तर प्रदेश में बेहद कमजोर रहा था। पार्टी ने करीब 400 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उसे केवल दो सीटों पर जीत मिली थी।

दूसरी ओर, AIMIM ने भी उत्तर प्रदेश में चुनावी मैदान में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश की थी, लेकिन पार्टी कोई विधानसभा सीट जीतने में सफल नहीं रही थी।

इसके बावजूद AIMIM ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी सक्रियता बनाए रखी है। पार्टी का लक्ष्य राज्य में अपने संगठन का विस्तार करना और मुस्लिम मतदाताओं के बीच राजनीतिक आधार तैयार करना रहा है।

अब आसिम वकार के कांग्रेस में शामिल होने के बाद दोनों दलों की आगामी रणनीति पर नजर रहेगी।

क्या AIMIM की रणनीति पर पड़ेगा असर?

आसिम वकार लंबे समय से AIMIM का चेहरा रहे हैं। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर उन्होंने कई राजनीतिक मुद्दों पर मीडिया में पार्टी का पक्ष रखा। ऐसे में उनके कांग्रेस में जाने से AIMIM को संगठनात्मक और राजनीतिक स्तर पर नुकसान होने की चर्चा शुरू हो गई है।

हालांकि, किसी राजनीतिक दल का प्रभाव केवल एक नेता पर निर्भर नहीं करता। AIMIM के पास अपना संगठन और नेतृत्व मौजूद है। इसलिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पार्टी इस घटनाक्रम के बाद उत्तर प्रदेश में अपनी गतिविधियों को किस तरह आगे बढ़ाती है।

वहीं, कांग्रेस के लिए भी चुनौती कम नहीं है। उसे 2027 के चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के लिए संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करना होगा। साथ ही पार्टी को जनता के बीच स्थानीय मुद्दों पर प्रभावी अभियान चलाने की जरूरत होगी।

कांग्रेस को मिल सकता है नया राजनीतिक चेहरा

आसिम वकार के कांग्रेस में शामिल होने से पार्टी को एक ऐसा चेहरा मिला है, जो लंबे समय तक AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर सक्रिय रहा है। इससे कांग्रेस को विपक्षी राजनीति से जुड़े मुद्दों पर एक नया राजनीतिक आवाज मिल सकती है।

हालांकि, वकार का कांग्रेस में भविष्य किस भूमिका में होगा, यह पार्टी नेतृत्व तय करेगा। फिलहाल उनके शामिल होने को 2027 की तैयारियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।

कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनाव से पहले दल-बदल का दौर आगे भी देखने को मिल सकता है। AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता आसिम वकार का कांग्रेस में शामिल होना इसी राजनीतिक बदलाव की एक कड़ी है। अब नजर इस बात पर होगी कि कांग्रेस उन्हें किस जिम्मेदारी के साथ मैदान में उतारती है और AIMIM इस घटनाक्रम का जवाब किस रणनीति के साथ देती है।

You may have missed