लखनऊ में सांसद अफजाल अंसारी की कोठी से लाखों के जेवर चोरी , जानिए चोरों ने कैसे दिया अंजाम,,,
लखनऊ: राजधानी लखनऊ के डालीबाग इलाके में गाजीपुर से सांसद रहे अफजाल अंसारी के परिवार से जुड़ी एक कोठी में कथित चोरी का मामला सामने आया है। अफजाल अंसारी की पत्नी फरहत अंसारी की डालीबाग स्थित कोठी को गैंगस्टर एक्ट के तहत सील किए जाने के बाद अब कोर्ट के आदेश पर खोला गया। कोठी की सील खुलने के बाद अंदर पहुंचे परिवार के सदस्यों ने अलमारियों और दराजों के लॉक टूटे हुए पाए। अफजाल अंसारी का दावा है कि कोठी में रखे लाखों रुपये कीमत के जेवर और अन्य कीमती सामान गायब हैं।
इस घटना के सामने आने के बाद कोठी की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, चोरी की घटना और गायब सामान की वास्तविक स्थिति की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल अफजाल अंसारी की ओर से लगाए गए आरोपों के आधार पर मामले को लेकर पुलिस कार्रवाई की मांग की जा सकती है।
कोर्ट के आदेश पर खोली गई कोठी की सील
जानकारी के अनुसार, डालीबाग स्थित फरहत अंसारी की कोठी को पूर्व में प्रशासनिक कार्रवाई के तहत सील किया गया था। कोर्ट के आदेश के बाद बुधवार को कोठी की सील खोलने की प्रक्रिया पूरी की गई। नगर निगम के अधिकारियों की मौजूदगी में सील हटाई गई और इसके बाद कोठी की चाबियां संबंधित परिवार को सौंप दी गईं।
सील खुलने के बाद अफजाल अंसारी और उनके परिवार के सदस्य जब कोठी के अंदर पहुंचे तो वहां कई स्थानों पर सामान अस्त-व्यस्त दिखाई दिया। परिवार के मुताबिक, घर में मौजूद कुछ अलमारियों और दराजों के लॉक टूटे हुए थे। इसके बाद जब सामान की जांच की गई तो कथित तौर पर कई कीमती वस्तुएं नहीं मिलीं।
अफजाल अंसारी ने आरोप लगाया कि कोठी में उनकी बेटी की शादी के लिए कीमती जेवर रखे गए थे। उनके मुताबिक, इन जेवरों के अलावा घर में अन्य महंगा सामान भी मौजूद था, जो अब नहीं मिल रहा है।
अफजाल अंसारी ने लगाया लाखों के जेवर गायब होने का आरोप
कोठी के अंदर की स्थिति देखने के बाद अफजाल अंसारी ने दावा किया कि घर में रखे लाखों रुपये कीमत के जेवर और अन्य कीमती सामान गायब हैं। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार ने अपनी बेटी की शादी के लिए कई महत्वपूर्ण आभूषण सुरक्षित रखे थे।
हालांकि, गायब सामान की वास्तविक कीमत कितनी है और कौन-कौन सी वस्तुएं नहीं मिल रही हैं, इसका स्पष्ट आकलन पुलिस जांच तथा परिवार की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली सूची के बाद ही सामने आ सकेगा। ऐसे में फिलहाल लाखों रुपये के जेवर गायब होने का दावा अफजाल अंसारी और उनके परिवार की ओर से किया गया है।
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि कोठी लंबे समय से प्रशासनिक निगरानी के दायरे में बताई जा रही थी। इसलिए अब यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि सील किए गए भवन की सुरक्षा की जिम्मेदारी किस स्तर पर थी और वहां नियमित निगरानी की व्यवस्था किस प्रकार की गई थी।
चार साल पहले भी चोरी की घटना का दावा
अफजाल अंसारी के अनुसार, करीब चार वर्ष पहले जब गाजीपुर प्रशासन की ओर से फरहत अंसारी की कोठी को सील किया गया था, उसके कुछ दिनों बाद भी वहां चोरी की घटना हुई थी। उनका आरोप है कि उस समय भी सुरक्षा और निगरानी के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए।
अफजाल अंसारी का कहना है कि यदि किसी संपत्ति को प्रशासनिक कार्रवाई के तहत सील किया जाता है तो उसकी सुरक्षा को लेकर भी पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए। उनके मुताबिक, पहले की कथित चोरी के बाद भी इस दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए और अब दोबारा कोठी के अंदर से कीमती सामान गायब मिलने का मामला सामने आया है।
हालांकि, चार वर्ष पहले हुई कथित चोरी और मौजूदा मामले के बीच क्या कोई सीधा संबंध है, यह जांच का विषय है। दोनों घटनाओं को लेकर पुलिस या प्रशासन की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
सील संपत्ति की सुरक्षा पर उठे सवाल
इस पूरे मामले ने सील की गई संपत्तियों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी चर्चा शुरू कर दी है। आम तौर पर जब किसी संपत्ति को प्रशासनिक या कानूनी प्रक्रिया के तहत सील किया जाता है, तो उसकी निगरानी को लेकर संबंधित विभागों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
ऐसे में सवाल यह है कि डालीबाग स्थित इस कोठी की निगरानी किसके जिम्मे थी। क्या वहां नियमित रूप से निरीक्षण किया जाता था? क्या सील की स्थिति की समय-समय पर जांच हुई? यदि किसी स्थान पर ताले या अलमारियों के लॉक टूटे थे, तो इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों को पहले क्यों नहीं हुई? इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आ पाएंगे।
इसके अलावा, यह भी देखा जाना होगा कि कोठी को सील करने के बाद वहां प्रवेश को लेकर क्या व्यवस्था थी और क्या किसी व्यक्ति को कानूनी अनुमति के बिना अंदर जाने का अवसर मिला। यदि चोरी की पुष्टि होती है तो जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाना भी महत्वपूर्ण होगा कि सामान कब और किस परिस्थिति में गायब हुआ।
अब एफआईआर पर टिकी नजर
मामले में सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि अफजाल अंसारी या उनके परिवार की ओर से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जाती है या नहीं। यदि शिकायत दी जाती है तो पुलिस के सामने सबसे पहले चोरी की घटना की पुष्टि करना, गायब सामान की सूची तैयार करना और कोठी की परिस्थितियों का निरीक्षण करना होगा।
इसके साथ ही, पुलिस को घटनास्थल से उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश करनी होगी कि कोठी में किसी ने प्रवेश कब किया और किन परिस्थितियों में अलमारियों और दराजों के लॉक टूटे। यदि जरूरत हुई तो आसपास के क्षेत्र में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी जांच का हिस्सा बन सकती है।
अफजाल अंसारी की ओर से पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए हैं। ऐसे में आगे यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि परिवार की ओर से औपचारिक शिकायत कब दी जाती है और पुलिस उस शिकायत पर किस तरह की कार्रवाई करती है।
जांच से सामने आएगी पूरी तस्वीर
फिलहाल इस पूरे मामले में कई सवाल अनुत्तरित हैं। कथित तौर पर कितने जेवर गायब हैं? उनकी वास्तविक कीमत कितनी है? क्या अन्य सामान भी चोरी हुआ है? कोठी की सील के दौरान उसकी निगरानी कौन कर रहा था? अलमारियों के लॉक कब टूटे? और सबसे अहम, चोरी की घटना के पीछे कौन जिम्मेदार है?
इन सभी सवालों का जवाब पुलिस की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों से ही मिल सकेगा। इसलिए बिना आधिकारिक जांच पूरी हुए किसी व्यक्ति या संस्था को चोरी के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।
दूसरी ओर, यदि जांच में चोरी की पुष्टि होती है तो यह प्रशासनिक निगरानी में रखी गई संपत्ति की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर सकती है। खासकर तब, जब परिवार की ओर से पहले भी ऐसी घटना का दावा किया जा रहा है।

