कानपुर आरटीओ कार्यालय पर परिवहन मंत्री की बड़ी कार्रवाई, दो एआरटीओ निलंबित और आरटीओ को नोटिस
रिपोर्ट- विक्की रघुवंशी
लखनऊ/कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर स्थित संभागीय परिवहन कार्यालय में अनियमितताओं और अनधिकृत व्यक्तियों की कथित संलिप्तता के मामले में परिवहन विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह के निर्देश पर शासन ने कानपुर नगर के दो सहायक संभागीय परिवहन अधिकारियों (एआरटीओ) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। वहीं, संभागीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 15 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देने के निर्देश दिए गए हैं।
शासन की ओर से यह कार्रवाई कार्यालय में कार्यरत कार्मिकों द्वारा बरती गई कथित अनियमितताओं, पर्यवेक्षण में विफलता, अधीनस्थ कर्मचारियों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं रखने और शासनादेशों तथा उच्चाधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना के मामले में की गई है। इस कार्रवाई के बाद परिवहन विभाग में हड़कंप की स्थिति है।
दो एआरटीओ निलंबित, आरटीओ से मांगा गया जवाब
शासन के निर्देश के अनुसार कानपुर नगर की सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) तृतीय दल श्रीमती सोमलता यादव और सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) श्री आलोक कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
इसके अलावा कानपुर नगर के संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन) श्री राकेन्द्र सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उन्हें 15 दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
शासन ने प्रथम दृष्टया संबंधित अधिकारियों को कार्यालय में हुई अनियमितताओं के संबंध में पर्यवेक्षणीय जिम्मेदारियों में कमी के लिए जिम्मेदार माना है। वहीं, पूरे मामले की विस्तृत जांच के लिए उप परिवहन आयुक्त (परिक्षेत्र) वाराणसी को जांच अधिकारी नामित किया गया है।
औचक निरीक्षण में सामने आईं कई अनियमितताएं
दरअसल, कानपुर नगर के संभागीय और सहायक संभागीय परिवहन कार्यालय को लेकर प्राप्त शिकायतों का जिलाधिकारी कानपुर ने संज्ञान लिया था। इसके बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर अपर पुलिस उपायुक्त और ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/उप जिलाधिकारी कानपुर नगर द्वारा परिवहन कार्यालय का औचक निरीक्षण कराया गया।
निरीक्षण के दौरान कार्यालय परिसर में मौजूद करीब 50 व्यक्तियों से पूछताछ की गई। पूछताछ और जांच के दौरान 11 संदिग्ध व्यक्तियों को चिन्हित किया गया। आरोप है कि ये व्यक्ति आवेदकों से वाहन पंजीकरण और ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के नाम पर धनराशि लेकर अनधिकृत तरीके से काम कर रहे थे।
जांच के दौरान इन संदिग्ध व्यक्तियों के पास से कुल 43,485 रुपये नकद बरामद किए गए। इसके बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की।
दो लिपिकों की संलिप्तता भी सामने आई
औचक निरीक्षण के दौरान परिवहन कार्यालय के दो लिपिकों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कार्यालय में तैनात लिपिक श्री मधुर मिश्रा और श्री विपिन कुमार की भी इस पूरे प्रकरण में संलिप्तता पाई गई।
इस प्रकार प्रशासन की ओर से कुल 15 व्यक्तियों के विरुद्ध थाना काकादेव, कानपुर नगर में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई गई। मामले में पुलिस द्वारा आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।
प्रशासन की जांच में यह भी सामने आया कि कार्यालय में अधिकृत प्रक्रिया के बजाय अनधिकृत व्यक्तियों के माध्यम से आवेदकों से संबंधित कार्य कराने की स्थिति बनी हुई थी। यही वजह है कि विभागीय स्तर पर अधिकारियों की पर्यवेक्षणीय भूमिका पर भी सवाल उठे।
ट्रक चालक से ली गई रकम में भी सामने आई गड़बड़ी
निरीक्षण के दौरान एक अन्य मामले में भी वित्तीय अनियमितता सामने आई। वाहन संख्या UP 91 AT 4251 के ट्रक चालक ने जांच टीम को बताया कि संभागीय परिवहन कार्यालय के एक कार्मिक द्वारा उससे 26,750 रुपये लिए गए थे। इसके बदले उसे केवल 21,750 रुपये की जमा पर्ची उपलब्ध कराई गई।
इस शिकायत की जांच के दौरान कार्यालय में उपलब्ध कैश का मिलान किया गया। मिलान में भी बताई गई अनियमितता सामने आने की जानकारी दी गई है। इसके बाद जिलाधिकारी कानपुर की ओर से निरीक्षण की विस्तृत रिपोर्ट परिवहन आयुक्त कार्यालय को भेजी गई।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि परिवहन कार्यालयों में वाहन पंजीकरण, ड्राइविंग लाइसेंस सहित विभिन्न सेवाओं के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। ऐसे में अनधिकृत व्यक्तियों की गतिविधियों से आवेदकों को आर्थिक नुकसान होने के साथ-साथ विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ सकते हैं।
अनधिकृत व्यक्तियों पर रोक के बावजूद कार्रवाई
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि अधीनस्थ कार्यालयों में अनधिकृत व्यक्तियों से कार्य न लिए जाने के संबंध में शासन और मुख्यालय स्तर से समय-समय पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाते रहे हैं। इसके बावजूद कानपुर नगर के संभागीय और सहायक परिवहन कार्यालय में अनधिकृत व्यक्तियों द्वारा अधिकारियों एवं कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से काम किया जाना गंभीर विषय है।
उन्होंने कहा कि कार्यालय में अनधिकृत व्यक्तियों के माध्यम से कार्य कराया जाना और उनके साथ धन के लेनदेन की शिकायतें सामने आना इस बात का संकेत है कि कार्यालय के कार्यों के निस्तारण की निगरानी में अपेक्षित स्तर की सतर्कता नहीं बरती गई।
परिवहन मंत्री ने स्पष्ट किया कि विभाग में किसी भी स्तर पर कार्यों में शिथिलता, अनियमितता अथवा आम लोगों के साथ धोखाधड़ी जैसी स्थिति को स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में जिम्मेदारी तय करते हुए नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
निलंबित अधिकारियों को मुख्यालय से किया गया संबद्ध
निलंबन अवधि के दौरान श्रीमती सोमलता यादव और श्री आलोक कुमार को परिवहन विभाग के मुख्यालय से संबद्ध किया गया है। शासन के नियमों के अनुसार निलंबन अवधि में उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
वहीं, पूरे प्रकरण की जांच की जिम्मेदारी उप परिवहन आयुक्त (परिक्षेत्र) वाराणसी को सौंपी गई है। जांच अधिकारी संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य पक्षों से जुड़े तथ्यों की जांच करेंगे। इसके बाद जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की विभागीय कार्रवाई तय की जाएगी।
परिवहन विभाग में पारदर्शिता पर जोर
कानपुर आरटीओ कार्यालय की इस कार्रवाई को परिवहन विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। खासतौर पर सरकारी कार्यालयों में आम नागरिकों से जुड़े कार्यों के लिए अनधिकृत व्यक्तियों की भूमिका को लेकर शासन लगातार सख्ती का संदेश देता रहा है।
वाहन पंजीकरण और ड्राइविंग लाइसेंस जैसी सेवाएं सीधे आम लोगों से जुड़ी हैं। इसलिए इन सेवाओं की प्रक्रिया को पारदर्शी और निर्धारित नियमों के अनुसार संचालित करना विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे में कानपुर कार्यालय में सामने आई शिकायतों और निरीक्षण के दौरान मिले तथ्यों के बाद हुई कार्रवाई को विभागीय जवाबदेही से जोड़कर देखा जा रहा है।

