आजमगढ़ में कुलपति के RSS कार्यक्रम में शामिल होने पर विवाद, सपा छात्रसभा की पुलिस से झड़प, जानिए क्या हुआ,,
रिपोर्ट- पित्तेश्वर कुमार
आजमगढ़। महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संजीव कुमार के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एक कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर आजमगढ़ में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। मंगलवार को समाजवादी पार्टी की छात्रसभा के कार्यकर्ताओं ने हरिऔध कला केंद्र के बाहर प्रदर्शन करते हुए कुलपति के खिलाफ विरोध जताया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बनी, जिसके बाद पुलिस ने कई सपा छात्रसभा कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संजीव कुमार RSS के कार्यक्रम में शामिल हुए थे। उनके कार्यक्रम में शामिल होने की जानकारी सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी की छात्रसभा के कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध शुरू कर दिया। कार्यकर्ताओं का कहना था कि विश्वविद्यालय के कुलपति जैसे महत्वपूर्ण पद पर बैठे व्यक्ति की राजनीतिक अथवा वैचारिक गतिविधियों में भागीदारी को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
हरिऔध कला केंद्र के बाहर जुटे कार्यकर्ता
कुलपति के RSS कार्यक्रम में शामिल होने के विरोध में सपा छात्रसभा से जुड़े कार्यकर्ता हरिऔध कला केंद्र के बाहर पहुंचे। यहां कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के दौरान मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने और स्थिति को सामान्य बनाए रखने का प्रयास किया।
हालांकि, विरोध कर रहे कार्यकर्ता अपनी मांगों और आपत्ति को लेकर मौके पर डटे रहे। देखते ही देखते वहां लोगों की भीड़ बढ़ने लगी। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति उत्पन्न हो गई।
पुलिस ने कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया
स्थिति को देखते हुए पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे कई सपा छात्रसभा कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। पुलिस की कार्रवाई के बाद मौके पर कुछ समय के लिए तनावपूर्ण माहौल बना रहा। हालांकि, प्रशासन की ओर से स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास जारी रहा।
प्रदर्शन के दौरान किसी अप्रिय स्थिति को रोकने के लिए पुलिस बल की मौजूदगी भी बढ़ाई गई। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की अपील की। वहीं, प्रदर्शनकारी कुलपति के RSS कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर अपना विरोध दर्ज कराते रहे।
कुलपति के कार्यक्रम में शामिल होने पर उठे सवाल
समाजवादी पार्टी छात्रसभा के कार्यकर्ताओं ने कुलपति के RSS कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर आपत्ति जताई। उनका तर्क था कि विश्वविद्यालय के कुलपति का पद शैक्षणिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियों से जुड़ा होता है। ऐसे में किसी संगठन के कार्यक्रम में उनकी भागीदारी को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं।
दूसरी ओर, किसी व्यक्ति का किसी सार्वजनिक या सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होना अपने आप में किसी राजनीतिक गतिविधि का प्रमाण नहीं माना जा सकता। इस मामले में कुलपति की ओर से इस पूरे विवाद पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है, यह भी महत्वपूर्ण होगा।
विश्वविद्यालय को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म
महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय आजमगढ़ का प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थान है। विश्वविद्यालय से जुड़े किसी भी विवाद का असर स्वाभाविक रूप से छात्रों और शिक्षकों के बीच चर्चा का विषय बनता है। यही वजह है कि कुलपति के RSS कार्यक्रम में शामिल होने की घटना के बाद छात्र संगठन ने इसे मुद्दा बना दिया।
सपा छात्रसभा के प्रदर्शन ने विश्वविद्यालय से जुड़े मुद्दे को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विश्वविद्यालय के प्रशासनिक पदों पर बैठे अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन में निष्पक्षता बनाए रखनी चाहिए। वहीं, पूरे घटनाक्रम को लेकर प्रशासन की भूमिका भी चर्चा में है।
प्रदर्शन के बाद आगे की स्थिति पर नजर
फिलहाल, पुलिस द्वारा कई सपा छात्रसभा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। पुलिस की ओर से हिरासत में लिए गए लोगों के संबंध में विस्तृत जानकारी और किसी कानूनी कार्रवाई की पुष्टि आधिकारिक स्तर पर सामने आना बाकी है।
वहीं, इस पूरे मामले में कुलपति डॉ. संजीव कुमार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है। इसके अलावा विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से भी यह स्पष्ट किया जा सकता है कि कुलपति किस हैसियत से RSS कार्यक्रम में शामिल हुए थे और कार्यक्रम का स्वरूप क्या था।
विरोध ने खींचा राजनीतिक संगठनों का ध्यान
आजमगढ़ में छात्र राजनीति पहले से ही सक्रिय रही है। ऐसे में विश्वविद्यालय के कुलपति से जुड़ा कोई भी मामला छात्र संगठनों के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है। इस प्रदर्शन ने एक बार फिर विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्र संगठनों के बीच संवाद तथा संस्थागत निष्पक्षता जैसे मुद्दों को सामने ला दिया है।
हालांकि, पूरे मामले में सभी पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना जरूरी है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि कुलपति के कार्यक्रम में शामिल होने का वास्तविक संदर्भ क्या था और सपा छात्रसभा की आपत्तियों पर विश्वविद्यालय प्रशासन की क्या प्रतिक्रिया है।

