कानपुर देहात में मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना से आशीष कुमार की बदली जिंदगी, आय दोगुनी से अधिक

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रिपोर्ट- विशाल मिश्रा

कानपुर देहात। मिट्टी से जुड़े पारंपरिक हुनर को यदि आधुनिक तकनीक, पूंजी और सरकारी सहयोग का साथ मिल जाए, तो यही हुनर आत्मनिर्भरता और रोजगार का मजबूत माध्यम बन सकता है। कानपुर देहात के ग्राम अडवां निवासी  आशीष कुमार पुत्र उमाशंकर की सफलता की कहानी इसी बदलाव की मिसाल है। मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना के तहत मिली वित्तीय सहायता ने न केवल उनके पारंपरिक व्यवसाय को आधुनिक रूप दिया, बल्कि उनकी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है।

आशीष कुमार लंबे समय से माटीकला के कार्य से जुड़े हुए हैं। मिट्टी से बर्तन और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार करना उनके परिवार की परंपरा और आजीविका का हिस्सा रहा है। हालांकि, सीमित संसाधनों और पर्याप्त पूंजी के अभाव में उनका व्यवसाय पारंपरिक तरीकों तक ही सीमित था। मेहनत और हुनर होने के बावजूद आधुनिक मशीनरी उपलब्ध नहीं होने के कारण उत्पादन बढ़ाना उनके लिए चुनौती बना हुआ था।

सीमित संसाधनों में चलता था माटीकला का कारोबार

कानपुर देहात के मलासा क्षेत्र के ग्राम अडवां निवासी आशीष कुमार पहले पारंपरिक तरीके से मिट्टी के बर्तन और माटीकला से जुड़े अन्य उत्पाद तैयार करते थे। इस काम में उन्हें काफी समय और श्रम लगाना पड़ता था। आधुनिक उपकरणों के अभाव में उत्पादन क्षमता भी सीमित थी।

परिवार की आजीविका इसी व्यवसाय पर निर्भर होने के कारण उनकी मासिक आय लगभग 18 हजार से 20 हजार रुपये के बीच रहती थी। ऐसे में व्यवसाय को बड़े स्तर पर ले जाना आसान नहीं था। दूसरी ओर, माटीकला के क्षेत्र में बाजार की बदलती मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करने के लिए आधुनिक तकनीक और अतिरिक्त निवेश की आवश्यकता थी।

आशीष कुमार के पास हुनर था, अनुभव था और आगे बढ़ने की इच्छा भी थी। जरूरत थी तो सिर्फ ऐसे सहयोग की, जो उनके पारंपरिक कौशल को आधुनिक साधनों से जोड़ सके।

मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना बनी बदलाव का माध्यम

इसी बीच मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना उनके लिए नई उम्मीद लेकर आई। योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को माटीकला से संबंधित इकाई स्थापित करने और व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है।

आशीष कुमार को भी इस योजना का लाभ मिला। वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिला खादी एवं ग्रामोद्योग अधिकारी कार्यालय, कानपुर देहात के माध्यम से बैंक ऑफ बड़ौदा, शाखा डीघ, मलासा, कानपुर देहात द्वारा उन्हें 4 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत एवं वितरित किया गया।

यह वित्तीय सहायता उनके व्यवसाय के लिए महत्वपूर्ण साबित हुई। ऋण की मदद से उन्होंने अपनी माटीकला इकाई में आधुनिक उपकरण और आवश्यक सुविधाएं स्थापित कीं। इससे वर्षों से चले आ रहे पारंपरिक काम को नई तकनीक का सहारा मिला।

आधुनिक मशीनरी से बढ़ी उत्पादन क्षमता

वित्तीय सहायता मिलने के बाद आशीष कुमार ने अपनी इकाई के लिए जिगर मशीन, विभिन्न डाई तथा सोलर पैनल जैसी सुविधाएं खरीदीं। आधुनिक उपकरणों के जुड़ने से उत्पादन प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित और आसान हो गई।

पहले जहां कई कार्यों में अधिक समय और शारीरिक श्रम की आवश्यकता होती थी, वहीं आधुनिक मशीनरी के इस्तेमाल से काम तेजी से होने लगा। इसके परिणामस्वरूप उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी हुई और समय की भी बचत हुई।

इसके अलावा, सोलर पैनल की व्यवस्था ने इकाई को ऊर्जा के क्षेत्र में भी अतिरिक्त सुविधा प्रदान की। इस तरह योजना के माध्यम से मिली वित्तीय सहायता का उपयोग केवल मशीन खरीदने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे माटीकला इकाई को अधिक आधुनिक और व्यावसायिक स्वरूप देने में मदद मिली।

18-20 हजार से बढ़कर 40-42 हजार रुपये हुई मासिक आय

योजना का सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव आशीष कुमार की आय में देखने को मिला। योजना का लाभ मिलने से पहले जहां उनकी मासिक आय करीब 18 हजार से 20 हजार रुपये थी, वहीं अब उनकी वर्तमान मासिक आय लगभग 40 हजार से 42 हजार रुपये तक पहुंच गई है।

यानी उनकी आय पहले की तुलना में दोगुनी से भी अधिक हो गई है। यह बदलाव उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास को भी बढ़ाने वाला है।

आशीष कुमार की सफलता यह बताती है कि जब पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक और वित्तीय संसाधनों का साथ मिलता है, तो छोटे स्तर का व्यवसाय भी बेहतर आय का माध्यम बन सकता है।

खुद आत्मनिर्भर बने, चार ग्रामीणों को दिया रोजगार

आशीष कुमार की सफलता का एक और महत्वपूर्ण पहलू रोजगार सृजन है। योजना से लाभान्वित होकर उन्होंने केवल अपनी आजीविका को मजबूत नहीं किया, बल्कि अपनी माटीकला इकाई में चार अन्य ग्रामीण लोगों को भी रोजगार उपलब्ध कराया है।

इससे उनकी इकाई अब सिर्फ एक परिवार की आय का साधन नहीं रही, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने वाली इकाई के रूप में भी विकसित हो रही है।

इस प्रकार एक व्यक्ति को मिली वित्तीय सहायता का प्रभाव कई परिवारों तक पहुंच रहा है। स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने से ग्रामीण लोगों को अपने क्षेत्र में ही काम का अवसर प्राप्त हो रहा है। परिणामस्वरूप, स्वरोजगार के साथ-साथ रोजगार सृजन को भी बढ़ावा मिल रहा है।

पारंपरिक हुनर को मिली आधुनिक पहचान

माटीकला भारत की समृद्ध पारंपरिक कला और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। हालांकि बदलते समय में कारीगरों के सामने बाजार, उत्पादन लागत, तकनीक और पूंजी से जुड़ी कई चुनौतियां आती रही हैं।

ऐसे में मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना जैसी पहल पारंपरिक कारीगरों को आधुनिक संसाधनों से जोड़ने का माध्यम बन सकती है। आशीष कुमार का उदाहरण बताता है कि सरकारी योजना और कारीगर की मेहनत मिलकर पारंपरिक व्यवसाय को नए बाजार और नई संभावनाओं से जोड़ सकती है।

आधुनिक मशीनरी के उपयोग से उत्पाद तैयार करने की प्रक्रिया में तेजी आई है। साथ ही, बेहतर उत्पादन क्षमता के कारण व्यवसाय के विस्तार की संभावनाएं भी बढ़ी हैं।

मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार

आशीष कुमार ने अपनी सफलता के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित मुख्यमंत्री माटीकला रोजगार योजना के प्रति आभार व्यक्त किया। उनका कहना है कि योजना के माध्यम से मिली वित्तीय सहायता ने उनके पारंपरिक हुनर को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उनके अनुसार, आर्थिक सहायता से आधुनिक मशीनरी और सोलर पैनल आदि की व्यवस्था करना संभव हुआ। इसके परिणामस्वरूप उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और वे खुद आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ अन्य ग्रामीण लोगों को भी रोजगार देने में सक्षम हुए।

आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की दिशा में प्रेरक उदाहरण

आशीष कुमार की कहानी ग्रामीण क्षेत्र में स्वरोजगार और स्थानीय रोजगार सृजन की संभावनाओं को सामने रखती है। एक समय सीमित संसाधनों के साथ माटीकला का काम करने वाले आशीष आज आधुनिक सुविधाओं से लैस अपनी इकाई का संचालन कर रहे हैं।

उनकी मासिक आय में वृद्धि और चार ग्रामीणों को रोजगार मिलना इस बात का उदाहरण है कि योजनाओं का सही उपयोग किस तरह आर्थिक बदलाव का माध्यम बन सकता है।

वहीं, माटीकला जैसी पारंपरिक कला को आधुनिक तकनीक से जोड़ने से हमारी सांस्कृतिक और हस्तशिल्प विरासत को भी मजबूती मिलती है। इससे नई पीढ़ी के बीच पारंपरिक व्यवसायों के प्रति रुचि पैदा करने में भी मदद मिल सकती है।

 

 

 

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