कानपुर के जागरण कॉलेज में AEDP छात्रों का ओरिएंटेशन, नरेंद्र भदौरिया बोले- हिम्मत करिए, हिमाकत नहीं
कानपुर। जागरण कॉलेज ऑफ आर्ट्स, साइंस एंड कॉमर्स में मंगलवार को एईडीपी (AEDP) के नए विद्यार्थियों के लिए ओरिएंटेशन प्रोग्राम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को नए शैक्षणिक परिवेश से परिचित कराने के साथ-साथ उन्हें पाठ्यक्रम, करियर की संभावनाओं, रचनात्मक अभिव्यक्ति और मीडिया एवं डिजिटल क्षेत्र में उद्योग की बदलती जरूरतों की जानकारी देना रहा। कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार नरेंद्र भदौरिया मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि रेडियो प्रेजेंटर और दूरदर्शन न्यूज रीडर समरीन सिद्दीकी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार नरेंद्र भदौरिया ने विद्यार्थियों को पत्रकारिता और संचार के क्षेत्र में साहस के साथ आगे बढ़ने की सीख दी। उन्होंने कहा कि हर पत्रकार को हिम्मत करनी चाहिए, लेकिन हिमाकत नहीं करनी चाहिए। साहस और दुस्साहस के बीच अंतर होता है। अपनी बात को तथ्यों और तर्कों के साथ रखने का साहस एक अच्छे पत्रकार की पहचान है, लेकिन पर्याप्त जानकारी और अधिकार न होने के बावजूद गलत तरीके से अपनी बात रखना उचित नहीं है।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि पत्रकारिता में सवाल पूछना और अपनी बात रखना जरूरी है, लेकिन इसके लिए तथ्य, समझ और जिम्मेदारी भी उतनी ही आवश्यक है। एक पत्रकार की विश्वसनीयता उसकी जानकारी, तथ्यपरकता और पेशेवर प्रतिबद्धता से बनती है। इसलिए विद्यार्थियों को शुरुआत से ही सीखने की आदत विकसित करनी चाहिए और बदलते मीडिया परिदृश्य के साथ स्वयं को लगातार अपडेट रखना चाहिए।
संवाद और अभिव्यक्ति पर दिया जोर
विशिष्ट अतिथि समरीन सिद्दीकी ने विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा और कौशल पहचानने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति में हिम्मत के साथ अपनी बात कहने का सलीका आ जाए तो उसके लिए कई संभावनाओं के द्वार खुल सकते हैं। संचार के क्षेत्र में आवाज, प्रस्तुति और अभिव्यक्ति महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि अपनी स्किल को पहचानकर उस पर लगातार काम करें।
समरीन सिद्दीकी ने विद्यार्थियों को यह भी बताया कि प्रभावी संचार केवल बोलने तक सीमित नहीं है। सामने वाले तक अपनी बात किस तरह पहुंचाई जाती है, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने विद्यार्थियों को आत्मविश्वास, स्पष्ट संवाद और प्रभावी प्रस्तुति के लिए नियमित अभ्यास करने की सलाह दी।
मां सरस्वती की वंदना से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
ओरिएंटेशन कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की वंदना, दीप प्रज्ज्वलन और गणेश वंदना के साथ हुई। इसके बाद अतिथियों ने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। कार्यक्रम में जागरण कॉलेज ऑफ आर्ट्स, साइंस एंड कॉमर्स की प्राचार्य डॉ. अस्मिता दुबे, जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन (JIMMC) के निदेशक डॉ. उपेंद्र पांडेय, जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट की डायरेक्टर डॉ. दिव्या चौधरी तथा जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ डिजिटल एनीमेशन (JIDA) के निदेशक अमरदीप सिंह सहित अन्य गणमान्य अतिथि और शिक्षक मौजूद रहे।
इस अवसर पर विद्यार्थियों को संस्थान की शैक्षणिक व्यवस्था, पाठ्यक्रम और भविष्य में उपलब्ध करियर विकल्पों के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही उन्हें शिक्षा के साथ व्यावहारिक कौशल विकसित करने की आवश्यकता के बारे में भी बताया गया।
चार नए और भविष्यपरक स्नातक कार्यक्रमों की जानकारी
कार्यक्रम के दौरान JIMMC की असिस्टेंट प्रोफेसर आकृति अवस्थी ने विद्यार्थियों को चार नए और भविष्यपरक स्नातक कार्यक्रमों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इनमें बीएससी मीडिया कम्युनिकेशन, बीएससी डिजिटल मार्केटिंग एंड एडवरटाइजिंग, बीएससी गेम आर्ट एंड डिजाइन तथा बीएससी एनीमेशन एंड वीएफएक्स शामिल हैं।
इन पाठ्यक्रमों को विद्यार्थियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक कौशल, उद्योग से जुड़ा अनुभव और रचनात्मक क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। वर्तमान समय में मीडिया, डिजिटल मार्केटिंग, गेम डिजाइन, एनीमेशन और वीएफएक्स जैसे क्षेत्रों में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को तकनीकी ज्ञान के साथ रचनात्मक सोच और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप कौशल विकसित करने पर जोर दिया गया।
शिक्षा के साथ कौशल विकास पर जोर
जागरण एजुकेशन फाउंडेशन के सीईओ डॉ. जे.एन. गुप्ता ने भी विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। उन्होंने शिक्षा के साथ कौशल विकास और रचनात्मक सोच को प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने शैक्षणिक जीवन के दौरान नई चीजें सीखने, प्रयोग करने और अपनी क्षमताओं को विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को अपने विषय की समझ के साथ व्यावहारिक कौशल भी विकसित करना चाहिए। यही कौशल आगे चलकर उन्हें करियर की विभिन्न संभावनाओं के लिए तैयार करेंगे।
नरेंद्र मोहन की सीख को किया याद
कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ पत्रकार नरेंद्र भदौरिया ने दैनिक जागरण के तत्कालीन प्रधान संपादक नरेंद्र मोहन गुप्त को भी याद किया। उन्होंने एक आत्मीय मुलाकात के दौरान मिली सीख का उल्लेख करते हुए बताया कि व्यक्ति किसी अन्य प्राणी को कई तरह से स्पर्श कर सकता है।
उन्होंने बताया कि स्पर्श केवल हाथों से नहीं होता, बल्कि आंखों, मन, भाव, मस्तिष्क, विचारों, इंद्रियों और भंगिमाओं के माध्यम से भी व्यक्ति दूसरे तक अपनी बात और संवेदना पहुंचा सकता है। उन्होंने कहा कि संचार का प्रभाव केवल शब्दों तक सीमित नहीं होता। व्यक्ति की भाव-भंगिमा, दृष्टिकोण और व्यवहार भी सामने वाले पर प्रभाव डालते हैं।
नरेंद्र भदौरिया ने विद्यार्थियों को समझाया कि मीडिया और संचार के क्षेत्र में इन बारीकियों को समझना बेहद महत्वपूर्ण है। पत्रकारिता में शब्दों के साथ-साथ संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण की भी अहम भूमिका होती है।
विद्यार्थियों के लिए हुईं संवादात्मक गतिविधियां
कार्यक्रम को विद्यार्थियों के लिए अधिक संवादात्मक और रोचक बनाने के लिए विभिन्न गतिविधियों का भी आयोजन किया गया। सुश्री भव्या खन्ना के नेतृत्व में विद्यार्थियों ने कई गतिविधियों में हिस्सा लिया। इन गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों के बीच आपसी संवाद बढ़ाने, उनकी रचनात्मकता को प्रोत्साहित करने और नए शैक्षणिक माहौल में उन्हें सहज बनाने का रहा।कार्यक्रम का संचालन JIMMC की असिस्टेंट प्रोफेसर आकृति अवस्थी ने किया। उन्होंने विद्यार्थियों को संस्थान में उपलब्ध शैक्षणिक और रचनात्मक अवसरों की जानकारी दी। वहीं कार्यक्रम के अंत में JIDA की फैकल्टी श्रीमती मोनिका खंडूजा ने सभी अतिथियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम में असिस्टेंट प्रोफेसर धीरज शर्मा, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. संजय चंदानी, असिस्टेंट प्रोफेसर राम जी बाजपई, टीवी स्टूडियो इंचार्ज अखिलेश मिश्र सहित अन्य शिक्षक और स्टाफ मौजूद रहे।

