बांदा में  बिसंडा के चौसड़ गांव में जलभराव से परेशानी, नाला जाम होने से घरों में घुसा बरसाती पानी

25

रिपोर्ट- शैलेन्द्र शानू वर्मा 

बांदा: उत्तर प्रदेश के बांदा जिले के बिसंडा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम चौसड़ में लगातार हो रही बारिश के बीच जलभराव की समस्या गंभीर होती जा रही है। गांव में जल निकासी की व्यवस्था प्रभावित होने के कारण बरसाती पानी गलियों और आम रास्तों में भर गया है। स्थिति यह है कि कई स्थानों पर पानी घरों के अंदर तक पहुंच गया है। इससे ग्रामीणों को रोजमर्रा के कामकाज में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में गरेरी तालाब के पास से होकर निकलने वाला नाला लंबे समय से साफ नहीं हुआ है। लगातार बारिश के कारण नाले में पानी का दबाव बढ़ गया और जल निकासी बाधित होने से पानी आसपास के क्षेत्रों में फैलने लगा। परिणामस्वरूप गांव की कई गलियों में जलभराव की स्थिति पैदा हो गई है।

चार दिनों की बारिश के बाद बिगड़ी स्थिति

ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में पिछले चार दिनों से लगातार बारिश हो रही है। बारिश के कारण जहां खेतों और तालाबों में पानी का स्तर बढ़ा है, वहीं गांव की जल निकासी व्यवस्था पर भी इसका असर पड़ा है। नाले से पानी की निकासी पर्याप्त नहीं होने के कारण बरसाती पानी गांव की ओर वापस आने लगा।

कई ग्रामीणों का कहना है कि गलियों में घुटने तक पानी जमा होने के कारण पैदल आवागमन मुश्किल हो गया है। बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को विशेष परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जरूरी काम से घर से बाहर निकलने वाले लोगों को भी जलभराव वाले रास्तों से होकर गुजरना पड़ रहा है।

इसके अलावा, लगातार पानी जमा रहने से ग्रामीणों के घरों के आसपास भी जलभराव की स्थिति बनी हुई है। कुछ घरों में बरसाती पानी पहुंचने से घरेलू सामान और खाद्यान्न प्रभावित होने की बात ग्रामीणों ने कही है।

नाला जाम होने का लगाया आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि गरेरी तालाब के पास स्थित नाले की लंबे समय से समुचित सफाई नहीं कराई गई है। नाले में जमा गंदगी, मिट्टी और अन्य अवरोधों के कारण पानी की निकासी प्रभावित हो रही है। बारिश के दौरान जब नाले में पानी बढ़ा तो उसके लिए आगे निकलने का पर्याप्त रास्ता नहीं बचा।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ लोगों द्वारा नाले की भूमि पर कब्जा किए जाने के कारण जल निकासी का रास्ता बाधित हुआ है। उनका कहना है कि यदि नाला पूरी तरह खुला और साफ होता तो बारिश का पानी गांव में जमा नहीं होता।

हालांकि, कब्जे से संबंधित आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में प्रशासनिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। ग्रामीणों ने प्रशासन से मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति की जांच कराने की मांग की है।

घरों में पानी पहुंचने से बढ़ी परेशानी

जलभराव का सबसे अधिक असर उन परिवारों पर पड़ा है जिनके मकान नाले और तालाब के आसपास स्थित हैं। ग्रामीणों के अनुसार, बरसाती पानी घरों में पहुंचने से अनाज, कपड़े और घरेलू उपयोग का सामान खराब होने का खतरा बना हुआ है।

लंबे समय तक घरों और गलियों में पानी जमा रहने से नमी भी बढ़ रही है। इससे मकानों की दीवारों और फर्श पर असर पड़ने की आशंका है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द जल निकासी नहीं कराई गई तो समस्या और बढ़ सकती है।

इसके साथ ही, जमा पानी के कारण मच्छरों और अन्य कीटों की समस्या बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है। ग्रामीणों ने साफ-सफाई और जल निकासी की तत्काल व्यवस्था कराने की मांग की है, ताकि बारिश के बाद किसी तरह की स्वास्थ्य संबंधी परेशानी न बढ़े।

आम रास्तों पर आवागमन प्रभावित

गांव की गलियों में पानी भरने से स्थानीय आवागमन भी प्रभावित हुआ है। कई रास्तों पर पानी जमा होने के कारण लोगों को रास्ता बदलकर जाना पड़ रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, सामान्य दिनों में जिन रास्तों का उपयोग पैदल आने-जाने के लिए किया जाता है, वहां इस समय पानी जमा है।

सबसे अधिक परेशानी दैनिक जरूरतों के लिए बाहर निकलने वाले लोगों को हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जलभराव के कारण कई स्थानों पर रास्ते दिखाई नहीं दे रहे हैं। इससे फिसलने और गिरने की आशंका बनी रहती है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन की टीम मौके पर पहुंचकर जलभराव वाले स्थानों का निरीक्षण करे और तत्काल पानी की निकासी की व्यवस्था कराए।

स्थायी समाधान की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि केवल बारिश के दौरान पानी निकालना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। इसके लिए नाले की नियमित सफाई, जल निकासी मार्ग की जांच और आवश्यकतानुसार उसकी मरम्मत या चौड़ीकरण कराया जाना जरूरी है।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि गरेरी तालाब के पास स्थित नाले की तत्काल सफाई कराई जाए। साथ ही, यदि जांच में नाले की भूमि पर किसी प्रकार का अतिक्रमण पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई करते हुए जल निकासी का रास्ता बहाल कराया जाए।

इसके अलावा, ग्रामीणों ने गांव में जल निकासी की स्थायी व्यवस्था विकसित करने की मांग भी उठाई है, ताकि भविष्य में बारिश के दौरान ऐसी स्थिति दोबारा न बने।

प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की उम्मीद

चौसड़ गांव के लोगों को अब प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण स्थिति पहले ही चुनौतीपूर्ण है और यदि जल निकासी की व्यवस्था जल्द नहीं सुधारी गई तो जलभराव लंबे समय तक बना रह सकता है।

ग्रामीणों की मांग है कि संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचकर नाले और जलभराव वाले क्षेत्रों का निरीक्षण करें। इसके बाद नाले की सफाई, अवरोध हटाने और पानी की निकासी के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

You may have missed