प्रियंका मौर्य का अखिलेश यादव पर पलटवार, महिलाओं के सम्मान और एनकाउंटर के मुद्दे पर साधा निशाना
Digital UP News Desk
लखनऊ: उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य प्रियंका मौर्य ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बयानों पर तीखा पलटवार किया है। उन्होंने महिलाओं के सम्मान, एनकाउंटर, जाति आधारित राजनीति, पीडीए और एसटीएफ को लेकर अखिलेश यादव की ओर से लगाए गए आरोपों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। प्रियंका मौर्य ने कहा कि प्रदेश की राजनीति में महिलाओं की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण हो रही है और महिलाओं के अधिकार तथा सम्मान को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाया जाना चाहिए।
प्रियंका मौर्य ने अखिलेश यादव के उस रुख पर सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने महिलाओं को लेकर बड़े आर्थिक वादों और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता का वादा करने के बजाय उन्हें सम्मान, समान अवसर और बराबरी का अधिकार दिया जाना अधिक महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, महिलाओं को समाज और राजनीति में निर्णय लेने की प्रक्रिया में भी पर्याप्त भागीदारी मिलनी चाहिए।
महिलाओं के सम्मान का मुद्दा उठाया
प्रियंका मौर्य ने महिलाओं के सम्मान को लेकर अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि राजनीतिक दलों को महिलाओं के अधिकारों पर गंभीरता से बात करनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा केंद्र सरकार के कार्यकाल में महिलाओं की भागीदारी और अधिकारों को लेकर लगातार चर्चा हुई है।
उन्होंने कहा कि आज महिलाएं केवल किसी राजनीतिक दल की समर्थक या मतदाता भर नहीं रह गई हैं, बल्कि चुनावी राजनीति में निर्णायक भूमिका निभा रही हैं। प्रियंका मौर्य के मुताबिक, महिलाओं का मतदान व्यवहार सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसलिए राजनीतिक दलों के लिए महिलाओं की अपेक्षाओं और मुद्दों को समझना जरूरी हो गया है।
उन्होंने महिलाओं के लिए 40 हजार रुपये देने के वादे का जिक्र करते हुए कहा कि आर्थिक सहायता से अधिक जरूरी महिलाओं को सम्मान और समान अधिकार देना है। उनके मुताबिक, महिला सशक्तिकरण का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ उन्हें सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर बराबरी का स्थान दिलाना होना चाहिए।
एनकाउंटर के आरोपों पर दिया जवाब
अखिलेश यादव की ओर से प्रदेश में कथित फर्जी और जाति आधारित एनकाउंटर को लेकर लगाए गए आरोपों पर भी प्रियंका मौर्य ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि किसी भी पुलिस कार्रवाई का मूल्यांकन तथ्यों और संबंधित मामलों के रिकॉर्ड के आधार पर किया जाना चाहिए।
उन्होंने समाजवादी पार्टी के नेताओं के पुराने बयानों का हवाला देते हुए पार्टी पर अपराध और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सवाल खड़े किए। प्रियंका मौर्य ने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार की कार्रवाई को राजनीतिक नजरिए से देखने के बजाय संबंधित मामलों की पृष्ठभूमि और जांच को भी ध्यान में रखना चाहिए।
हालांकि, ऐसे गंभीर आरोपों और पुलिस मुठभेड़ों के मामलों में निष्पक्ष जांच, न्यायिक प्रक्रिया और आधिकारिक रिकॉर्ड का महत्व बना रहता है। किसी भी कार्रवाई को अंतिम रूप से सही या गलत ठहराने का आधार तथ्य और जांच के निष्कर्ष होने चाहिए।
पीडीए और एसटीएफ को लेकर भी हमला
अखिलेश यादव की पीडीए राजनीति और एसटीएफ से जुड़े बयानों पर भी प्रियंका मौर्य ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी की ओर से अलग-अलग मुद्दों को लेकर सरकार पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं, लेकिन जनता को राजनीतिक आरोपों के बजाय काम और नीतियों के आधार पर निर्णय लेना चाहिए।
प्रियंका मौर्य ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी सत्ता में वापसी के लिए बेचैन है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता पिछले शासन और मौजूदा शासन के कामकाज की तुलना कर रही है। उनके मुताबिक, आने वाले चुनाव में मतदाता अपने अनुभव और प्राथमिकताओं के आधार पर फैसला करेंगे।
उन्होंने सपा के एक नेता के बयान का जिक्र करते हुए भी पार्टी की कार्यशैली पर सवाल उठाया। हालांकि, राजनीतिक बयानबाजी के बीच व्यक्तिगत या अपमानजनक टिप्पणियों से बचते हुए नीतिगत मुद्दों पर चर्चा को प्राथमिकता देना लोकतांत्रिक बहस के लिए अधिक उपयोगी माना जाता है।
महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी पर जोर
प्रियंका मौर्य ने कहा कि महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी लगातार बढ़ रही है। संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी को लेकर देश में चर्चा तेज हुई है। इसके साथ ही स्थानीय निकायों और अन्य लोकतांत्रिक संस्थाओं में भी महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को केवल चुनाव के समय याद करने के बजाय पूरे कार्यकाल में उनकी समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए। शिक्षा, रोजगार, सुरक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक आत्मनिर्भरता और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे विषय महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसलिए राजनीतिक दलों को अपने घोषणा पत्र और नीतियों में इन मुद्दों को पर्याप्त स्थान देना चाहिए।
धार्मिक बयानों पर भी जताई आपत्ति
प्रियंका मौर्य ने कुछ धार्मिक नेताओं की ओर से महिलाओं को लेकर दिए गए कथित बयानों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि भारत का शासन संविधान के अनुसार चलता है और देश में सभी नागरिकों को कानून के तहत समान अधिकार प्राप्त हैं।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं और पुरुषों को समान अधिकार मिलना चाहिए। उनके अनुसार, किसी भी धर्म या समुदाय के नाम पर महिलाओं के अधिकारों को सीमित करने वाली सोच को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए।
हालांकि, धार्मिक समुदायों के बारे में व्यापक निष्कर्ष निकालने के बजाय किसी व्यक्ति या संगठन के विशिष्ट बयान और उसके संदर्भ के आधार पर ही प्रतिक्रिया देना उचित है। भारत का संविधान सभी नागरिकों को समानता और सम्मान का अधिकार देता है तथा इसी संवैधानिक व्यवस्था के तहत महिलाओं के अधिकारों की रक्षा की जाती है।
चुनावी राजनीति में महिलाओं की भूमिका अहम
उत्तर प्रदेश की राजनीति में महिलाओं का वोट लंबे समय से महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। विभिन्न राजनीतिक दल महिला मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग योजनाओं और घोषणाओं पर जोर देते हैं। ऐसे में प्रियंका मौर्य का बयान भी इसी व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा माना जा सकता है।
दरअसल, महिला मतदाताओं के मुद्दे अब केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं हैं। रोजगार, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, सरकारी योजनाओं का लाभ, आर्थिक स्वतंत्रता और राजनीतिक प्रतिनिधित्व भी महत्वपूर्ण विषय बन चुके हैं। यही वजह है कि चुनावी रणनीति बनाने वाले दल महिला मतदाताओं की प्राथमिकताओं को विशेष महत्व देते हैं।
इसके अलावा, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार ने राजनीतिक बयानों को आम जनता तक तेजी से पहुंचाने का काम किया है। ऐसे में नेताओं के बयान कुछ ही समय में व्यापक चर्चा का विषय बन जाते हैं।
आरोप-प्रत्यारोप के बीच जनता पर नजर
प्रियंका मौर्य के बयान ऐसे समय में सामने आए हैं जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगातार जारी हैं। एक ओर विपक्ष सरकार की कानून-व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाता है, वहीं सत्ता पक्ष अपने शासन और महिला सशक्तिकरण की नीतियों को उपलब्धि के तौर पर प्रस्तुत करता है।
आखिरकार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी राजनीतिक दल के दावों और आरोपों का अंतिम मूल्यांकन जनता करती है। मतदाता चुनाव के दौरान विभिन्न दलों के वादों, नीतियों और पिछले कार्यकाल के प्रदर्शन को देखते हुए अपना निर्णय लेते हैं।
ऐसे में प्रियंका मौर्य का यह बयान भी उत्तर प्रदेश की आगामी राजनीतिक बहस में महिला सम्मान, समान अधिकार, कानून-व्यवस्था और महिला मतदाताओं की भूमिका जैसे मुद्दों को और प्रमुख बना सकता है। आने वाले समय में इन विषयों पर राजनीतिक दलों के बीच बहस और तेज होने की संभावना है।

