36 वर्षीय महिला को 10 साल तक वृद्धावस्था पेंशन! शिकायत के बाद रोकी गई पेंशन, सत्यापन व्यवस्था पर सवाल

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रिपोर्ट- रोहित सिंह चौहान 

इटावा: उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के बढ़पुरा ब्लॉक की ग्राम पंचायत विचारपुर से वृद्धावस्था पेंशन योजना से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सरकारी योजनाओं के सत्यापन तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां 36 वर्षीय महिला के करीब एक दशक तक वृद्धावस्था पेंशन का लाभ लेने का मामला सामने आया है। शिकायत के बाद जिला समाज कल्याण विभाग ने वार्षिक सत्यापन के दौरान महिला को अपात्र मानते हुए उसकी पेंशन रोक दी।

महिला की पहचान उमा देवी पत्नी शिवराज सिंह के रूप में बताई गई है। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि की ओर से की गई शिकायत के बाद यह मामला सामने आया। हालांकि, महिला को पेंशन किस आधार पर स्वीकृत हुई और लगातार वर्षों तक उसका सत्यापन किस स्तर पर किया गया, इन सवालों का स्पष्ट जवाब अभी जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।

शिकायत के बाद विभाग ने रोकी पेंशन

जानकारी के मुताबिक, ग्राम पंचायत विचारपुर के प्रधान प्रतिनिधि मुकेश कुमार को जब महिला के वृद्धावस्था पेंशन लेने की जानकारी मिली तो उन्होंने इस संबंध में जिलाधिकारी के माध्यम से जिला समाज कल्याण अधिकारी को लिखित शिकायत भेजी। शिकायत में महिला की उम्र और वृद्धावस्था पेंशन की पात्रता को लेकर सवाल उठाए गए थे।

इसके बाद समाज कल्याण विभाग की ओर से 13 अगस्त 2026 को शिकायत का जवाब दिया गया। विभाग ने बताया कि वर्ष 2024-25 के वार्षिक सत्यापन में ग्राम पंचायत सचिव की रिपोर्ट के आधार पर उमा देवी को वृद्धावस्था पेंशन के लिए अपात्र पाया गया। इसके बाद उनकी पेंशन रोक दी गई।

विभागीय जवाब के अनुसार फिलहाल सबसे स्पष्ट कार्रवाई पेंशन रोकने के रूप में सामने आई है। हालांकि, इससे यह सवाल बना हुआ है कि यदि महिला लंबे समय तक इस योजना का लाभ लेती रही तो पहले के वर्षों में किए गए सत्यापन में उसकी पात्रता कैसे सुनिश्चित की गई थी।

करीब 10 वर्षों तक पेंशन मिलने पर सवाल

प्रधान प्रतिनिधि मुकेश कुमार का कहना है कि महिला को कथित तौर पर करीब 10 वर्षों तक वृद्धावस्था पेंशन का लाभ मिलता रहा। उनका सवाल है कि यदि वर्तमान सत्यापन में महिला को अपात्र पाया गया, तो इससे पहले होने वाले वार्षिक सत्यापन में उसकी पात्रता पर ध्यान क्यों नहीं गया।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया है कि अब तक महिला को कथित रूप से अपात्र रहते हुए प्राप्त हुई पेंशन की धनराशि की रिकवरी को लेकर क्या कार्रवाई की गई है। उनके अनुसार, शिकायत के बाद पेंशन रोकने की कार्रवाई तो हुई, लेकिन प्राप्त धनराशि की वसूली के संबंध में अभी तक कोई रिकवरी नोटिस या आदेश सामने नहीं आया है।

हालांकि, रिकवरी होगी या नहीं और यदि होगी तो उसकी प्रक्रिया क्या होगी, यह संबंधित अभिलेखों की जांच तथा विभागीय कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

वृद्धावस्था पेंशन योजना के सत्यापन पर उठे सवाल

वृद्धावस्था पेंशन योजना का उद्देश्य पात्र बुजुर्गों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें अपने दैनिक जीवन की आवश्यकताओं में मदद मिल सके। ऐसे में किसी कम उम्र के व्यक्ति का लंबे समय तक इस योजना में लाभार्थी बने रहना स्वाभाविक रूप से सत्यापन प्रक्रिया की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है।

दरअसल, पेंशन योजनाओं में लाभार्थियों की पात्रता की जांच और समय-समय पर सत्यापन महत्वपूर्ण प्रक्रिया होती है। लाभार्थी की उम्र, दस्तावेज, निवास तथा अन्य निर्धारित मानकों की जांच के बाद ही पात्रता सुनिश्चित की जाती है।

ऐसे में इस मामले में यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि उमा देवी का नाम वृद्धावस्था पेंशन सूची में किस आधार पर शामिल हुआ था। साथ ही, पेंशन स्वीकृति के समय कौन से दस्तावेज लगाए गए थे और बाद के वर्षों में हुए सत्यापन में उनकी उम्र एवं पात्रता का परीक्षण किस स्तर पर किया गया।

किस स्तर पर हुई चूक, जांच के बाद होगा खुलासा

मामले का सबसे अहम पहलू यही है कि यदि महिला की उम्र वर्तमान में 36 वर्ष है और वह करीब 10 वर्षों से वृद्धावस्था पेंशन का लाभ ले रही थी, तो पेंशन स्वीकृति और सत्यापन के दौरान संबंधित रिकॉर्ड की जांच कैसे हुई।

हालांकि, उपलब्ध विभागीय जवाब में महिला को वर्ष 2024-25 के वार्षिक सत्यापन के दौरान अपात्र पाए जाने की बात कही गई है। इससे यह संकेत मिलता है कि बाद के सत्यापन में विभागीय स्तर पर उनकी पात्रता पर कार्रवाई की गई। लेकिन इससे पहले के वर्षों की प्रक्रिया और जिम्मेदारी की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

इसलिए पूरे मामले में दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण होगी। यह जांच ही स्पष्ट कर सकती है कि पेंशन के लिए आवेदन के समय कौन-कौन से अभिलेख प्रस्तुत किए गए थे और उनके आधार पर किस स्तर से आवेदन को स्वीकृति मिली।

सरकारी धन की रिकवरी का मुद्दा भी अहम

मामले में एक अन्य महत्वपूर्ण सवाल सरकारी धन की संभावित रिकवरी को लेकर है। यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि लाभार्थी योजना की निर्धारित पात्रता पूरी नहीं करती थीं और इसके बावजूद लंबे समय तक सरकारी धन का भुगतान हुआ, तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई का सवाल उठ सकता है।

हालांकि, किसी व्यक्ति से धनराशि की वसूली अथवा संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय करने से पहले विभागीय जांच और उपलब्ध दस्तावेजों का परीक्षण जरूरी होगा। इसलिए फिलहाल रिकवरी को लेकर अंतिम स्थिति सामने नहीं आई है।

क्या जिले में और भी ऐसे मामले हैं?

इस प्रकरण के सामने आने के बाद एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या जिले में वृद्धावस्था पेंशन योजना के ऐसे अन्य मामले भी मौजूद हैं, जहां पात्रता के मानकों की पर्याप्त जांच नहीं हो सकी।

यदि किसी योजना में लंबे समय तक लाभार्थियों का सत्यापन होता है, तो उम्र और पात्रता से संबंधित गलतियां समय रहते सामने आनी चाहिए। इसलिए इस मामले के बाद जिले में पेंशन लाभार्थियों के रिकॉर्ड की व्यापक समीक्षा की मांग भी उठ सकती है।

हालांकि, किसी अन्य लाभार्थी के संबंध में बिना आधिकारिक जांच के कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इसीलिए विभागीय रिकॉर्ड और आधिकारिक सत्यापन के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

जिला समाज कल्याण अधिकारी ने कैमरे पर बात करने से किया इनकार

मामले को लेकर जिला समाज कल्याण अधिकारी संध्या रानी बघेल से मीडिया की ओर से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने कैमरे पर इस मामले में बात करने से इनकार कर दिया।

ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि विभाग इस मामले में आगे कोई विस्तृत जांच कराता है या नहीं। साथ ही, यदि जांच होती है तो पेंशन स्वीकृति से लेकर वार्षिक सत्यापन तक की पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी किस स्तर पर थी, इसका खुलासा भी महत्वपूर्ण होगा।

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