टिल्लू ताजपुरिया और गोगी गैंग की दुश्मनी की पूरी कहानी, कुश्ती के अखाड़े से अपराध की दुनिया तक
DIgital UP News Desk
दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अपराध जगत में टिल्लू ताजपुरिया और जितेंद्र मान उर्फ गोगी का नाम लंबे समय तक चर्चा में रहा। दोनों कभी छात्र राजनीति से जुड़े थे, लेकिन समय के साथ उनके रास्ते अपराध की दुनिया की ओर मुड़ गए। इसके बाद दोनों के बीच ऐसी दुश्मनी शुरू हुई, जिसने दिल्ली से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक अपराध के नेटवर्क को प्रभावित किया।
हाल के वर्षों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सामने आई कुछ आपराधिक घटनाओं में गोगी गैंग से जुड़े नेटवर्क का नाम सामने आने के बाद एक बार फिर टिल्लू ताजपुरिया और गोगी के बीच पुरानी दुश्मनी चर्चा में है। हालांकि, किसी भी घटना में आरोपों और जांच के निष्कर्षों के बीच अंतर करना जरूरी है। पुलिस की जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड ही किसी मामले की अंतिम स्थिति स्पष्ट करते हैं।
तिहाड़ जेल में टिल्लू ताजपुरिया की मौत
2 मई 2023 को दिल्ली की तिहाड़ जेल में गैंगस्टर सुनील बालियान उर्फ टिल्लू ताजपुरिया पर हमला हुआ था। उस समय वह जेल नंबर 8 में बंद था। सुबह के समय हुई इस घटना ने जेल प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर भी कई सवाल खड़े किए।
रिपोर्टों के मुताबिक, हमलावरों ने जेल परिसर में उपलब्ध सामान और कथित तौर पर तोड़ी गई लोहे की सलाखों का इस्तेमाल किया था। घटना के बाद टिल्लू को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी।
इस घटना के बाद पुलिस जांच में जितेंद्र मान उर्फ गोगी से जुड़े गैंग के सदस्यों पर संदेह जताया गया। माना गया कि यह हमला गोगी की हत्या का बदला लेने से जुड़ा हो सकता है। हालांकि, ऐसे मामलों में किसी भी निष्कर्ष को जांच और न्यायिक प्रक्रिया के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
रोहिणी कोर्ट में गोगी की हत्या से शुरू हुई बदले की कहानी
टिल्लू और गोगी की दुश्मनी का सबसे चर्चित अध्याय 24 सितंबर 2021 को सामने आया। उस दिन दिल्ली के रोहिणी कोर्ट परिसर में गैंगस्टर जितेंद्र मान उर्फ गोगी की पेशी हो रही थी।
गोगी कोर्टरूम में मौजूद था। इसी दौरान वकीलों के वेश में पहुंचे दो हमलावरों ने उस पर हमला कर दिया। जवाबी कार्रवाई में दिल्ली पुलिस ने दोनों हमलावरों को मार गिराया। इस घटना ने राजधानी की अदालतों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए थे।
जांच के दौरान इस वारदात को टिल्लू और गोगी के बीच लंबे समय से चली आ रही गैंगवार से जोड़कर देखा गया। गोगी की हत्या के बाद उसके गैंग और टिल्लू के नेटवर्क के बीच तनाव और बढ़ने की बात सामने आई।
इसके बाद 2023 में तिहाड़ जेल के भीतर टिल्लू की हत्या ने इस दुश्मनी को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया।
कौन था टिल्लू ताजपुरिया?
टिल्लू ताजपुरिया का वास्तविक नाम सुनील बालियान था। वह दिल्ली के बाहरी इलाके में स्थित ताजपुर कलां गांव से ताल्लुक रखता था। उसके पिता जगपाल बालियान दिल्ली नगर निगम में हेड क्लर्क के पद पर कार्यरत रहे थे।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, टिल्लू का शुरुआती जीवन अपराध से अलग था। उसकी रुचि कुश्ती में थी और उसने खेल को करियर बनाने का सपना देखा था। उसने 10वीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़कर कुश्ती की ट्रेनिंग शुरू की थी।
वह गांव के अखाड़े के साथ-साथ छत्रसाल स्टेडियम में भी अभ्यास करता था। कुश्ती में उसने राज्य स्तर तक अपनी पहचान बनाई और आगे राष्ट्रीय स्तर पर जाने की इच्छा रखता था। हालांकि, बाद में उसका जीवन पूरी तरह बदल गया और वह अपराध की दुनिया में प्रवेश कर गया।
छात्र राजनीति से शुरू हुआ गोगी-टिल्लू विवाद
टिल्लू और जितेंद्र गोगी के बीच विवाद की जड़ें 2010 के आसपास की बताई जाती हैं। उस समय दिल्ली विश्वविद्यालय से जुड़े स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज में छात्र संघ चुनाव हो रहे थे।
दोनों ने चुनाव में अलग-अलग उम्मीदवारों का समर्थन किया था। यही राजनीतिक टकराव धीरे-धीरे व्यक्तिगत और आपराधिक दुश्मनी में बदल गया। इसके बाद दोनों के समर्थकों के बीच भी संघर्ष बढ़ने लगा।
धीरे-धीरे टिल्लू और गोगी दिल्ली के चर्चित गैंगस्टरों में गिने जाने लगे। दोनों के नेटवर्क ने अलग-अलग इलाकों में अपनी पकड़ बनाने की कोशिश की। इस दौरान कई आपराधिक मामलों में दोनों गुटों के नाम सामने आते रहे।
टिल्लू के मामा ने अपराध छोड़ने की दी थी सलाह
टिल्लू के जीवन से जुड़ी एक दिलचस्प बात उसके मामा देवेंद्र सिंह से जुड़ी है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 2016 में कार चोरी के मामले में जेल जाने से कुछ समय पहले उसके मामा ने उसे अपराध की दुनिया छोड़ने की सलाह दी थी।
बताया जाता है कि टिल्लू ने उस समय अपने मामा से कहा था कि उसका भविष्य अब इसी रास्ते से जुड़ चुका है और वह इससे बाहर नहीं निकल सकता। यह घटना इस बात की ओर संकेत करती है कि उसके जीवन में अपराध का रास्ता किस तरह धीरे-धीरे स्थायी होता चला गया।
पश्चिमी यूपी तक पहुंचा गैंग नेटवर्क
दिल्ली के इन गैंगों का प्रभाव केवल राजधानी तक सीमित नहीं रहा। समय के साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी इनके नेटवर्क और कथित सहयोगियों के नाम सामने आते रहे हैं।
हाल ही में शामली जिले में हरियाणवी गायक अंकित बालियान की हत्या के मामले में भी पुलिस जांच के दौरान गोगी गैंग से जुड़े नेटवर्क की भूमिका की बात सामने आई। पुलिस की कार्रवाई में मामले से जुड़े बताए जा रहे दो संदिग्धों के मारे जाने की जानकारी सामने आई है।
हालांकि, इस तरह के मामलों में पुलिस के आरोप, जांच के तथ्य और अदालत में साबित होने वाले तथ्य अलग-अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी व्यक्ति या संगठन की भूमिका को अंतिम रूप से तभी माना जाना चाहिए, जब जांच और न्यायिक प्रक्रिया उसे स्थापित करे।
अपराध की दुनिया में बदलती तस्वीर
टिल्लू ताजपुरिया और जितेंद्र गोगी की कहानी यह भी दिखाती है कि किस तरह छात्र राजनीति, स्थानीय वर्चस्व और आपराधिक नेटवर्क एक-दूसरे से जुड़ सकते हैं। एक समय कुश्ती को करियर बनाने का सपना देखने वाला युवक बाद में दिल्ली के सबसे चर्चित गैंगस्टरों में शामिल हो गया।
वहीं, गोगी की हत्या और उसके बाद टिल्लू की तिहाड़ जेल में हुई मौत ने दोनों गुटों के बीच लंबे समय से चली आ रही दुश्मनी को नया आयाम दिया।
अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सामने आने वाले मामलों में इन नेटवर्क से जुड़े नामों की चर्चा होने पर दिल्ली की पुरानी गैंगवार भी फिर याद आती है। हालांकि, पुलिस और जांच एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती ऐसे नेटवर्क की वास्तविक संरचना और उनके वर्तमान प्रभाव का पता लगाना है।

