लखीमपुर खीरी के दरिनगर में ग्रामीणों का विरोध, प्रधान पर भ्रष्टाचार के आरोप – पढ़िए क्यों?
रिपोर्ट – शरद अवस्थी
लखीमपुर खीरी: जिले के विकासखंड मितौली क्षेत्र के दरिनगर गांव में ग्रामीणों ने गांव की मूलभूत समस्याओं और ग्राम प्रधान पर लगाए जा रहे कथित भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में विकास कार्यों के लिए आने वाली धनराशि का उचित उपयोग नहीं किया जा रहा है। समस्या से नाराज ग्रामीणों ने कीचड़ में लेटकर विरोध जताया और प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की।
ग्रामीणों के अनुसार, गांव में रास्तों की स्थिति खराब है और बारिश के दौरान जगह-जगह कीचड़ जमा हो जाता है। इससे लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या को लेकर ग्रामीणों ने विरोध का यह तरीका अपनाया। उनका कहना है कि कई बार संबंधित लोगों से शिकायत करने के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
कीचड़ में लेटकर ग्रामीणों ने जताया विरोध
दरिनगर गांव में ग्रामीणों का विरोध उस समय चर्चा में आया, जब लोगों ने गांव की समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर कीचड़ में लेटकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन में ग्रामीणों ने गांव की सड़क और रास्तों की स्थिति को लेकर नाराजगी जताई।
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में रास्तों पर पानी और कीचड़ जमा होने के कारण बच्चों, बुजुर्गों और अन्य ग्रामीणों को आने-जाने में परेशानी होती है। उनका आरोप है कि गांव में विकास कार्यों के लिए धनराशि उपलब्ध होने के बावजूद जमीनी स्तर पर अपेक्षित काम दिखाई नहीं दे रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से गांव की समस्याओं का मौके पर निरीक्षण कराने और विकास कार्यों की गुणवत्ता तथा खर्च की जांच कराने की मांग की है।
ग्राम प्रधान पर लगाए गए कई आरोप
विरोध कर रहे ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान पर विकास कार्यों से जुड़ी धनराशि के कथित दुरुपयोग के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि श्मशान स्थल, खेल मैदान और गांव के रास्तों से जुड़े कार्यों के लिए उपलब्ध धनराशि का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं किया गया।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। मामले में वास्तविक स्थिति संबंधित अभिलेखों, स्वीकृत कार्यों, भुगतान विवरण और मौके पर हुए निर्माण कार्यों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ग्राम पंचायत में हुए विकास कार्यों का भौतिक सत्यापन कराया जाए। साथ ही जिन कार्यों के लिए सरकारी धनराशि जारी हुई है, उनके दस्तावेजों और मौके की स्थिति का मिलान कराया जाए।
ग्राम समाज के पेड़ों को लेकर भी सवाल
ग्रामीणों ने ग्राम समाज की भूमि पर मौजूद पेड़ों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि पिछले दिनों ग्राम समाज के कुछ पेड़ कटवा दिए गए। ग्रामीणों ने इस मामले की भी जांच कराने की मांग की है।
इसके अलावा गांव की निधि से बनने वाली कुर्सियों का निर्माण नहीं होने का आरोप भी लगाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी कार्य के लिए सरकारी धनराशि स्वीकृत या खर्च दिखाई गई है, तो उसकी वास्तविक स्थिति की जांच होनी चाहिए।
इन सभी आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही संभव होगी। ऐसे में प्रशासन की ओर से अभिलेखों और मौके पर मौजूद स्थिति की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
प्रदर्शन स्थल पर पहुंचने को लेकर भी आरोप
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जब ग्राम प्रधान को विरोध प्रदर्शन की जानकारी मिली तो वह अपने कुछ समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों का दावा है कि प्रदर्शन कर रहे लोगों को वहां कथित तौर पर धमकाने का प्रयास किया गया।
हालांकि, इस आरोप की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। घटना को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि किसी भी पक्ष के साथ अनुचित व्यवहार नहीं होना चाहिए और शिकायतों का समाधान कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जाना चाहिए।
यदि जांच में धमकी या किसी अन्य प्रकार के अनुचित व्यवहार की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों द्वारा नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
ग्राम विकास अधिकारी की भूमिका पर उठे सवाल
दरिनगर गांव के ग्रामीणों ने ग्राम विकास अधिकारी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि गांव में लंबे समय से विकास कार्यों और समस्याओं को लेकर शिकायतें सामने आ रही हैं, लेकिन संबंधित स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव में कराए गए सभी विकास कार्यों की सूची तैयार कराई जाए। इसके बाद प्रत्येक कार्य की मौके पर स्थिति, स्वीकृत धनराशि और भुगतान संबंधी अभिलेखों की जांच की जाए।
ऐसी जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि सरकारी धनराशि किन कार्यों के लिए स्वीकृत हुई, कितना भुगतान किया गया और मौके पर वास्तव में कितना काम हुआ।
प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग
विरोध प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले को गंभीरता से लेने की मांग की है। उनका कहना है कि गांव के विकास के लिए मिलने वाली सरकारी धनराशि का उपयोग निर्धारित कार्यों में ही होना चाहिए। यदि किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
इसके साथ ही ग्रामीणों ने गांव के खराब रास्तों की मरम्मत, जलभराव और कीचड़ की समस्या दूर करने तथा आवश्यक विकास कार्य जल्द कराने की मांग की है।
जांच के बाद साफ होगी वास्तविक स्थिति
दरिनगर गांव में सामने आए विवाद को लेकर अब प्रशासन की जांच महत्वपूर्ण होगी। ग्रामीणों की ओर से लगाए गए आरोपों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और मौके पर कराए गए विकास कार्यों के सत्यापन से ही हो सकेगी।
फिलहाल ग्रामीणों ने अपना विरोध दर्ज कराते हुए गांव की समस्याओं के समाधान और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की है। यदि प्रशासन की ओर से जांच कराई जाती है तो ग्राम पंचायत से जुड़े विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि उनका उद्देश्य गांव में मूलभूत सुविधाओं को बेहतर कराना और विकास कार्यों में पारदर्शिता सुनिश्चित कराना है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और जांच के बाद क्या तथ्य सामने आते हैं।

