स्वच्छ ब्रज अभियान को मिलेगा जनसहभागिता का बल, मथुरा में कार्यशाला में उठे यह मुद्दे – अब बने चर्चा

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रिपोर्ट – योगेश भारद्वाज 

मथुरा: ब्रज की धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को स्वच्छता से जोड़ने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘हम सबने यह ठाना है, ब्रज को स्वच्छ बनाना है’ महाअभियान के अंतर्गत सोमवार को एक फॉलोअप कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में उद्योग जगत, व्यापारिक संगठनों, समाजसेवियों, स्वयंसेवकों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लिया तथा स्वच्छ ब्रज के निर्माण के लिए अपने सुझाव साझा किए।

कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि ब्रज की स्वच्छता केवल नगर निगम या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक, व्यापारी, श्रद्धालु और सामाजिक संगठन की भी समान भागीदारी आवश्यक है। इसी उद्देश्य से जनसहभागिता को अभियान की सबसे बड़ी ताकत बताया गया।

आस्था के साथ जुड़ी है स्वच्छता : शैलजाकांत मिश्र

कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र ने कहा कि ब्रज भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी की पावन भूमि है। इसलिए यहां स्वच्छता बनाए रखना प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक और सामाजिक दायित्व है।

उन्होंने कहा कि ब्रज में गंदगी फैलाना केवल अस्वच्छ व्यवहार नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत के प्रति असम्मान का प्रतीक भी माना जा सकता है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे स्वच्छता को दैनिक जीवन की आदत बनाएं और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।

स्वच्छता रैंकिंग में हुआ उल्लेखनीय सुधार

शैलजाकांत मिश्र ने कहा कि वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मथुरा दौरे के समय शहर की स्वच्छता रैंकिंग 512वें स्थान पर थी। इसके बाद लगातार प्रशासनिक प्रयासों और जन सहयोग से वर्ष 2019 में मथुरा 129वें स्थान तक पहुंच गया। इतना ही नहीं, शहर को देश में सबसे तेज सुधार करने वाले नगर के रूप में सम्मानित भी किया गया।

इसके बाद मथुरा ने क्रमशः 60वीं, 55वीं और 35वीं रैंक हासिल की। वर्तमान श्रेणीगत व्यवस्था में शहर 11वें स्थान पर पहुंच चुका है। हालांकि उन्होंने कहा कि अभी भी सुधार की काफी संभावनाएं हैं और लक्ष्य देश के सर्वश्रेष्ठ स्वच्छ शहरों में स्थान बनाना होना चाहिए।

हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं ब्रज

उन्होंने बताया कि लगभग 27 लाख की आबादी वाले मथुरा जनपद में प्रतिवर्ष करीब 10 करोड़ श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। ऐसे में स्वच्छता बनाए रखना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय नागरिक स्वयं स्वच्छता के प्रति जागरूक होंगे तो बाहर से आने वाले श्रद्धालु भी उसी संस्कृति को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे। इसलिए स्थायी परिवर्तन के लिए सामाजिक जागरूकता और जनसहभागिता को मजबूत करना जरूरी है।

व्यवहार में बदलाव से आएगा बड़ा परिवर्तन

उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की मुख्य कार्यपालक अधिकारी लक्ष्मी नागप्पन ने कहा कि स्वच्छ ब्रज अभियान तभी सफल होगा, जब प्रत्येक नागरिक अपने स्तर पर नेतृत्व की भूमिका निभाएगा।

उन्होंने कहा कि बड़े बदलाव की शुरुआत छोटे-छोटे व्यावहारिक परिवर्तन से होती है। यदि लोग सार्वजनिक स्थलों पर कचरा न फैलाने, निर्धारित स्थान पर ही कचरा डालने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने की आदत विकसित करें, तो स्वच्छता अभियान को नई गति मिल सकती है।

नगर निगम प्रतिदिन उठा रहा 500 टन से अधिक कूड़ा

नगर आयुक्त जग प्रवेश ने बताया कि मथुरा-वृंदावन नगर निगम ने पिछले एक वर्ष में सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

उन्होंने जानकारी दी कि सफाई कर्मियों की संख्या में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। वर्ष 2023 में जहां प्रतिदिन लगभग 180 से 190 टन कूड़ा उठाया जाता था, वहीं अब यह बढ़कर 500 टन से अधिक हो गया है।

इसके अलावा शहर के 24 प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में दो पालियों में नियमित सफाई कराई जा रही है। वहीं श्रीकृष्ण जन्मस्थान जैसे अत्यधिक भीड़ वाले क्षेत्रों में तीन पालियों में सफाई व्यवस्था संचालित की जा रही है, ताकि श्रद्धालुओं को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।

भंडारों के लिए बनाई गई एसओपी

नगर आयुक्त ने बताया कि धार्मिक आयोजनों और भंडारों के दौरान स्वच्छता बनाए रखने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की गई है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई संस्था या आयोजक निर्धारित नियमों का पालन नहीं करेगा तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही मथुरा-वृंदावन के ड्रेनेज मास्टर प्लान पर भी तेजी से कार्य किया जा रहा है, जिससे जलभराव और गंदगी की समस्या को स्थायी रूप से कम किया जा सके।

उद्यमियों और व्यापारियों ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव

कार्यशाला में उद्योग और व्यापार जगत के प्रतिनिधियों ने भी खुलकर अपने विचार रखे।

नेशनल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष राजीव बृजवासी ने कहा कि स्वच्छता अभियान को केवल संकल्प तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे व्यवहार का हिस्सा बनाना होगा। उन्होंने औद्योगिक क्षेत्रों में कूड़ा फैलाने और जलाने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की मांग की।

वहीं पूर्व अध्यक्ष राजेश बजाज ने जल निकासी व्यवस्था, नालों पर अतिक्रमण हटाने और कपड़े के थैलों के उपयोग को बढ़ावा देने का सुझाव दिया।

उद्यमी पवन चतुर्वेदी ने यमुना संरक्षण और जनभागीदारी को अभियान की सफलता का आधार बताया। राजेंद्र हाथी वालों ने बाजारों में दिन में दो बार सफाई और नालों की नियमित सफाई पर जोर दिया।

इसी प्रकार विनीत गोयल ने डेयरियों और सब्जी मंडियों से फैलने वाली गंदगी की ओर ध्यान आकर्षित किया, जबकि विपुल अग्रवाल ने कचरे के पृथक्करण और वैज्ञानिक निस्तारण की आवश्यकता बताई।

मॉडल स्वच्छता क्षेत्र बनाने का सुझाव

सीनियर सिटीजन एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक गोयल ने शहर को सुंदर और व्यवस्थित बनाने के लिए विस्तृत योजना प्रस्तुत की। इसके साथ ही उन्होंने कपड़े के थैले भी भेंट किए।

विपिन सिंघल ने कुछ क्षेत्रों को मॉडल स्वच्छता क्षेत्र के रूप में विकसित करने तथा छत्ता बाजार में कचरा प्रबंधन को और प्रभावी बनाने का सुझाव दिया।

नगर निगम के उपनेता मुकेश सारस्वत ने साधु-संतों और भागवत कथा वाचकों को अभियान से जोड़कर श्रद्धालुओं के बीच स्वच्छता का संदेश पहुंचाने की बात कही।

जनसहभागिता से ही सफल होगा स्वच्छ ब्रज अभियान

कार्यशाला में सभी वक्ताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि प्रशासनिक प्रयासों के साथ-साथ आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी के बिना स्वच्छ ब्रज का सपना साकार नहीं हो सकता।

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्वच्छता को सामाजिक संस्कृति का हिस्सा बनाया जाए, तो आने वाले समय में मथुरा-वृंदावन देश के सबसे स्वच्छ धार्मिक नगरों में अपनी पहचान और मजबूत कर सकता है।

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