कानपुर के घाटमपुर में फिर से ढह गया कच्चा मकान, एक युवक की मौत; आवास योजना पर भी उठे सवाल

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रिपोर्ट – शुभम साहू 

कानपुर: घाटमपुर क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के बीच शुक्रवार देर रात एक दर्दनाक हादसा सामने आया। इटर्रा ग्राम पंचायत के मजरा मोहनपुर गांव में बारिश के कारण एक कच्चा मकान और उससे जुड़ा पशुबाड़ा अचानक ढह गया। हादसे के समय मकान में सो रहा करीब 25 वर्षीय अमित कुमार मलबे में दब गया। वहीं, पशुबाड़े में बंधी कई बकरियां भी मलबे की चपेट में आ गईं।

मकान गिरने की आवाज सुनकर आसपास के ग्रामीण तत्काल मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव का काम शुरू किया। ग्रामीणों ने काफी मशक्कत के बाद मलबा हटाकर अमित कुमार को बाहर निकाला। इसके बाद उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही परिवार में मातम छा गया।

ग्रामीणों ने संभाला राहत-बचाव का जिम्मा

ग्रामीणों के मुताबिक, हादसे के तुरंत बाद पुलिस और आपातकालीन सहायता के लिए सूचना दी गई थी। ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना दिए जाने के बावजूद एंबुलेंस या राहत-बचाव दल को मौके पर पहुंचने में समय लगा। ऐसे में स्थानीय लोगों ने खुद ही मलबा हटाने का प्रयास शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने मलबे में दबे अमित को बाहर निकाला और उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया। साथ ही मलबे की चपेट में आई बकरियों को भी बाहर निकाला गया। हालांकि, एंबुलेंस या राहत-बचाव टीम के पहुंचने में देरी के आरोपों पर संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

पुलिस ने युवक के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं, प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवार को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिए जाने की बात सामने आई है।

हादसे के बाद आवास योजना पर उठे सवाल

हादसे में युवक की मौत के बाद अब गांव में सरकारी आवास योजना के क्रियान्वयन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। घटना के बाद सामने आए एक वीडियो में एक महिला ने स्थानीय लेखपाल पर गंभीर आरोप लगाए हैं।

महिला का दावा है कि सरकारी आवास योजना का लाभ दिलाने के नाम पर उससे कथित तौर पर एक लाख रुपये की मांग की गई थी। महिला के मुताबिक, उससे कहा गया था कि रकम देने के बाद ही आवास योजना में उसका नाम आगे बढ़ाया जाएगा। महिला ने ग्राम प्रधान की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।

हालांकि, लेखपाल और ग्राम प्रधान पर लगाए गए आरोप फिलहाल महिला के बयान पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित लेखपाल और ग्राम प्रधान का पक्ष भी अभी सामने आना बाकी है। इसलिए आरोपों की वास्तविकता जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

पात्र परिवारों को आवास मिलने को लेकर सवाल

मोहनपुर की घटना ने सरकारी आवास योजना के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन को लेकर भी चर्चा शुरू कर दी है। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि मृतक का परिवार या अन्य प्रभावित परिवार सरकारी आवास योजना के लिए पात्र थे, तो उन्हें समय रहते पक्का मकान क्यों नहीं मिल सका।

दरअसल, बारिश के मौसम में कच्चे और जर्जर मकानों में रहने वाले परिवारों के सामने सुरक्षा की चुनौती बढ़ जाती है। लगातार बारिश के कारण ऐसे मकानों की स्थिति और खराब हो सकती है। ऐसे में ग्रामीणों ने प्रशासन से इटर्रा ग्राम पंचायत और उसके मजरा क्षेत्रों में कच्चे तथा जर्जर मकानों का सर्वे कराने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि सर्वे के बाद पात्र परिवारों को सरकारी आवास योजना का लाभ प्राथमिकता के आधार पर दिया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की आशंका को कम किया जा सके।

निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

अमित कुमार की मौत के बाद ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि हादसे के कारणों की जांच के साथ-साथ सरकारी आवास योजना से जुड़े आरोपों की भी जांच होनी चाहिए।

यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति द्वारा अनियमितता या अवैध रूप से धन मांगने की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं, यदि आरोपों में तथ्य नहीं पाए जाते हैं, तो इसकी स्थिति भी जांच के माध्यम से स्पष्ट होनी चाहिए।

ग्रामीणों ने मृतक के परिवार को नियमानुसार आर्थिक सहायता देने, पात्र परिवार को आवास योजना का लाभ दिलाने और क्षेत्र के जर्जर मकानों का सर्वे कराने की मांग प्रशासन से की है।

प्रशासन के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल

मोहनपुर की घटना के बाद प्रशासन के सामने कई सवाल भी खड़े हुए हैं। इनमें सबसे प्रमुख सवाल यह है कि क्या सरकारी आवास योजना से जुड़े महिला के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी। इसके अलावा यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि संबंधित परिवार आवास योजना के लिए पात्र था या नहीं।

साथ ही, यदि परिवार पात्र था तो अब तक उसे पक्के आवास का लाभ क्यों नहीं मिला, इसकी भी जांच आवश्यक है। हादसे के बाद अन्य कच्चे और जर्जर मकानों की स्थिति को लेकर भी प्रशासन से सर्वे और आवश्यक कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है।

वहीं, मृतक अमित कुमार के परिवार को नियमानुसार मिलने वाली सहायता को लेकर भी ग्रामीणों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है।

बारिश के बीच जर्जर मकानों की सुरक्षा बनी चुनौती

मोहनपुर में कच्चा मकान गिरने की घटना ने बारिश के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में जर्जर मकानों की स्थिति पर ध्यान आकर्षित किया है। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि संवेदनशील और जर्जर मकानों की पहचान कर समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाएं।

इसके साथ ही पात्र परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराया जाना जरूरी है। यदि किसी योजना के लाभ में अनियमितता से संबंधित शिकायत सामने आती है, तो उसकी जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाना भी महत्वपूर्ण है।

फिलहाल मोहनपुर में हुए हादसे में युवक अमित कुमार की मौत से परिवार और ग्रामीणों में शोक का माहौल है। वहीं, आवास योजना से जुड़े आरोपों की जांच और प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि महिला द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और हादसे के बाद प्रभावित परिवार को किस स्तर की सरकारी सहायता मिलती है।

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