पैतृक संपत्ति और फैक्ट्री पर कब्जे का आरोप, अनूप गुप्ता ने DM से लगाई न्याय की गुहार – जानिए कौन है गुनहगार?

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रिपोर्ट – विवेक कृष्ण दीक्षित 

कानपुर/उन्नाव: कानपुर नगर निवासी अनूप कुमार गुप्ता ने अपनी पैतृक संपत्ति, मकान और फैक्ट्री पर कथित अवैध कब्जे का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी उन्नाव से न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित ने कानपुर प्रेस क्लब में प्रेसवार्ता कर पूरे मामले की जानकारी दी। उनका आरोप है कि पैतृक संपत्ति में अपने कानूनी हिस्से की मांग करने पर उन्हें अभद्रता और धमकी का सामना करना पड़ा।

अनूप कुमार गुप्ता, निवासी 46-सी करही रोड, बर्रा, कानपुर, के अनुसार उन्होंने इस मामले को लेकर जिलाधिकारी उन्नाव को शिकायती पत्र सौंपा है। शिकायत में उन्होंने पैतृक संपत्तियों, मकान, फैक्ट्री और अन्य संपत्तियों में अपने हिस्से को लेकर विवाद का उल्लेख किया है। साथ ही उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कराकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

वर्ष 2003 की पंजीकृत वसीयत का दिया हवाला

अनूप कुमार गुप्ता के मुताबिक, उनकी माता स्वर्गीय रामदुलारी गुप्ता ने वर्ष 2003 में एक पंजीकृत वसीयत तैयार कराई थी। शिकायत के अनुसार, इस वसीयत के माध्यम से उन्नाव के टीकरगढ़ी स्थित मकान और जमीन में दोनों पुत्रों को आधा-आधा मालिकाना हक दिया गया था।

शिकायतकर्ता का कहना है कि वसीयत में उन्हें और उनके बड़े भाई स्वर्गीय अनिल कुमार गुप्ता को संपत्ति में बराबर का हिस्सा दिए जाने का उल्लेख है। इसके आधार पर वह संबंधित संपत्तियों में अपने कानूनी अधिकार की मांग कर रहे हैं।

हालांकि, संपत्ति के स्वामित्व और वसीयत से जुड़े दावों का अंतिम निर्धारण संबंधित दस्तावेजों और सक्षम प्राधिकारी या न्यायालय की प्रक्रिया के आधार पर ही हो सकेगा।

भाई की मृत्यु के बाद विवाद बढ़ने का दावा

शिकायतकर्ता के अनुसार उनके बड़े भाई अनिल कुमार गुप्ता का निधन 10 मई 2024 को हुआ था। इसके बाद उनके दोनों पुत्रों अजिर बिहारी गुप्ता और रौनक गुप्ता पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने टीकरगढ़ी स्थित पूरी संपत्ति, मकान और अनूप मेटल एंड इंजीनियरिंग वर्क्स प्राइवेट लिमिटेड फैक्ट्री पर कथित तौर पर कब्जा कर लिया।

अनूप कुमार गुप्ता का आरोप है कि जब उन्होंने अपने हिस्से की संपत्ति और अधिकारों के संबंध में बात की, तो उन्हें कथित रूप से अभद्रता का सामना करना पड़ा। इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें दोबारा वहां आने पर जान से मारने की धमकी भी दी गई।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। मामले में दूसरे पक्ष का पक्ष सामने आने के बाद ही विवाद की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

कई स्थानों की पुश्तैनी जमीन पर भी कब्जे का आरोप

शिकायत में केवल उन्नाव स्थित संपत्ति का ही उल्लेख नहीं किया गया है, बल्कि अनूप कुमार गुप्ता ने मैनपुरी और लखनऊ में मौजूद कुछ पुश्तैनी तथा पंजीकृत जमीनों को लेकर भी आरोप लगाए हैं।

शिकायती पत्र के अनुसार, मैनपुरी जिले के ग्राम भोगांव, किसनी और कमालपुर, उन्नाव के जगदीशपुर, झलोतर और अजगैन तथा लखनऊ में अमौसी हवाई अड्डे के आसपास स्थित जमीनों पर भी कथित कब्जे की बात कही गई है।

पीड़ित का आरोप है कि इन संपत्तियों में भी उनके कानूनी अधिकार और हिस्सेदारी को प्रभावित किया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से इन सभी संपत्तियों के दस्तावेजों और वर्तमान स्थिति की जांच कराने की मांग की है।

बैंक खातों और कंपनियों में हिस्सेदारी का भी मामला

अनूप कुमार गुप्ता ने अपनी शिकायत में पारिवारिक संपत्तियों के साथ-साथ उनकी माता से संबंधित बैंक खातों और कंपनियों में मौजूद कानूनी हिस्सेदारी का भी उल्लेख किया है।

उनका दावा है कि इन परिसंपत्तियों में भी उन्हें उनके हिस्से से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि संबंधित दस्तावेजों, बैंक खातों, कंपनियों के रिकॉर्ड और संपत्तियों की स्थिति की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।

ऐसे मामलों में संपत्ति के अधिकार से जुड़े दस्तावेज, वसीयत, उत्तराधिकार और कंपनी रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए शिकायतकर्ता ने प्रशासन से सभी दस्तावेजों की जांच के आधार पर मामले का निस्तारण कराने की मांग की है।

जिलाधिकारी से निष्पक्ष जांच की मांग

प्रेसवार्ता के दौरान अनूप कुमार गुप्ता ने कहा कि वह अपने कानूनी अधिकारों के लिए प्रशासन से न्याय की उम्मीद कर रहे हैं। उन्होंने जिलाधिकारी उन्नाव से पूरे मामले की निष्पक्ष और न्यायोचित जांच कराने की मांग की है।

इसके साथ ही उन्होंने आरोपित लोगों के खिलाफ यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमानुसार कानूनी कार्रवाई किए जाने की मांग की है। उन्होंने अपनी संपत्ति और जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने की भी अपील की है।

शिकायतकर्ता के अनुसार, विवाद को बातचीत और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से हल किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी पक्ष के अधिकार प्रभावित न हों।

जांच के बाद स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति

मामला संपत्ति के स्वामित्व, वसीयत और कथित कब्जे से जुड़ा होने के कारण अब प्रशासनिक जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि जिलाधिकारी स्तर से जांच कराई जाती है, तो संबंधित दस्तावेजों, राजस्व अभिलेखों और अन्य रिकॉर्ड के आधार पर वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

वहीं, कथित धमकी और अभद्रता से जुड़े आरोपों की पुष्टि भी संबंधित जांच या पुलिस कार्रवाई के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल आरोप शिकायतकर्ता के बयान और उनके द्वारा दिए गए शिकायती पत्र पर आधारित हैं।

मामले में आरोपित अजिर बिहारी गुप्ता और रौनक गुप्ता का पक्ष इस रिपोर्ट के तैयार होने तक सामने नहीं आया है। इसलिए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

फिलहाल अनूप कुमार गुप्ता ने जिलाधिकारी उन्नाव से पूरे मामले की जांच, संपत्तियों में उनके कानूनी अधिकार की पड़ताल और सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। अब प्रशासन की जांच और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संपत्ति विवाद में वास्तविक स्थिति क्या है और शिकायत में लगाए गए आरोपों पर आगे किस प्रकार की कार्रवाई होती है।

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