बांदा में 21वें दिन भी जारी रहा किसानों का आमरण, जांच और कार्रवाई की मांग पर अड़े प्रदर्शनकारी – पढ़िए पूरी खबर
रिपोर्ट – शैलेन्द्र शानू वर्मा
बांदा: जिले में चकबंदी प्रक्रिया को लेकर किसानों और प्रशासन के बीच विवाद लगातार गहराता नजर आ रहा है। भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के बैनर तले कलेक्ट्रेट परिसर स्थित अशोक लाट चौराहे पर किसानों का आमरण अनशन सोमवार को 21वें दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारी किसानों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका धरना और आमरण अनशन जारी रहेगा।
किसानों का आरोप है कि चकबंदी प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई हैं और कई मामलों में लंबित विवादों का निस्तारण किए बिना आगे की कार्रवाई की जा रही है। दूसरी ओर, इस संबंध में संबंधित विभाग की ओर से इस समाचार के प्रकाशन तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
लंबे समय से चल रहा है किसानों का आंदोलन
भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के नेतृत्व में किसान 16 जून 2026 से आंदोलन कर रहे हैं। शुरुआत धरना प्रदर्शन से हुई थी, जिसके बाद आंदोलन आमरण अनशन में बदल गया। किसानों का कहना है कि कई बार संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन देने और प्रशासन से वार्ता करने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ।
इसी कारण, उन्होंने अनिश्चितकालीन आमरण अनशन का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया। प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल अपनी भूमि से जुड़े विवादों का निष्पक्ष समाधान कराना है।
चकबंदी प्रक्रिया पर उठाए सवाल
आंदोलन में शामिल किसानों का आरोप है कि ग्राम लोहरा, अमलीकौर, सिलेहटा, बहिंगा, खटिहा खुर्द और महब सहित कई गांवों में चकबंदी प्रक्रिया के दौरान नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया।
उनका कहना है कि कई मामलों में सीमांकन और अन्य प्रक्रियाओं को लेकर विवाद लंबित हैं। इसके बावजूद, आगे की कार्रवाई किए जाने से किसानों में असंतोष बढ़ा है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और प्रशासनिक जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
लंबित वादों के निस्तारण की मांग
प्रदर्शनकारी किसानों की प्रमुख मांग है कि जिन मामलों में चकबंदी से संबंधित वाद अभी भी विभाग में लंबित हैं, उनका पहले निस्तारण किया जाए।
किसानों का कहना है कि लंबित मामलों का समाधान किए बिना सीमांकन अथवा कब्जा परिवर्तन जैसी प्रक्रियाएं शुरू करना उचित नहीं होगा। इसके साथ ही, उन्होंने कथित रूप से विधि-विरुद्ध किए जा रहे सीमांकन को रोकने की भी मांग उठाई है।
जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
किसानों ने यह भी मांग की है कि 3 दिसंबर 2025 को आयुक्त, चित्रकूटधाम मंडल, बांदा के आदेश पर गठित तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
उनका कहना है कि यदि जांच पूरी हो चुकी है तो उसकी रिपोर्ट संबंधित पक्षों के सामने रखी जानी चाहिए ताकि मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
वहीं, किसानों ने जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग भी दोहराई।
अधिकारियों पर लगाए आरोप
आंदोलनकारी किसानों ने कुछ राजस्व एवं चकबंदी अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यदि किसी जांच में संबंधित अधिकारी दोषी पाए जाते हैं तो उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
हालांकि, इन आरोपों की अभी किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा पुष्टि नहीं हुई है। पत्रकारिता के सिद्धांतों के अनुसार आरोपों को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता और संबंधित पक्ष का दृष्टिकोण भी महत्वपूर्ण होता है।
किसान नेताओं ने रखी अपनी बात
आमरण अनशन के दौरान किसान नेताओं ने कहा कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से चलाया जा रहा है। उनका कहना है कि वे केवल अपनी भूमि से जुड़े मामलों में निष्पक्ष सुनवाई और पारदर्शी कार्रवाई चाहते हैं।
इसके अलावा, उन्होंने प्रशासन से वार्ता कर समाधान निकालने की इच्छा भी जताई। उनका कहना है कि यदि किसानों की जायज मांगों पर सकारात्मक पहल होती है तो विवाद का समाधान संभव है।
चकबंदी प्रक्रिया क्यों होती है महत्वपूर्ण
चकबंदी का उद्देश्य बिखरी हुई कृषि भूमि को व्यवस्थित करना और किसानों को सुविधाजनक कृषि क्षेत्र उपलब्ध कराना होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि चकबंदी प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता, नियमों और सभी पक्षों की सहमति के साथ संपन्न हो तो इससे कृषि उत्पादन और भूमि प्रबंधन में सुधार होता है।
हालांकि, यदि प्रक्रिया के दौरान विवाद उत्पन्न होते हैं तो उनका समयबद्ध और निष्पक्ष निस्तारण भी उतना ही आवश्यक माना जाता है।
प्रशासन से संवाद की उम्मीद
प्रदर्शनकारी किसानों का कहना है कि वे प्रशासन के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं। उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं, बल्कि अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त करना है।
दूसरी ओर, प्रशासन की ओर से यदि कोई औपचारिक वार्ता या समाधान की पहल होती है तो आंदोलन की दिशा बदल सकती है।
आंदोलन में कई किसान नेता रहे मौजूद
धरना स्थल पर भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के राष्ट्रीय सचिव हरदत्त पांडेय, बुंदेलखंड किसान केसरी बलराम तिवारी, महेन्द्र त्रिपाठी, रोहित द्विवेदी, अशोक तिवारी, जगप्रसाद फौजी, रवेंद्र सिंह, अवधेश तिवारी, रमेश मिश्रा, बच्चीलाल, जागेश्वर गुप्ता, रामशरण, रामपाल, रामराखन सिंह, वीरेंद्र सिंह, भोला सिंह, रोहिणी गुप्ता, सीता मिश्रा सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
किसानों ने कहा कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और प्रशासन से सकारात्मक पहल की अपेक्षा की जा रही है।
बांदा में चकबंदी विवाद को लेकर किसानों का आमरण अनशन लगातार 21वें दिन भी जारी है। आंदोलनकारी किसानों ने लंबित वादों के निस्तारण, कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग उठाई है।
दूसरी ओर, संबंधित विभाग का विस्तृत आधिकारिक पक्ष अभी सामने नहीं आया है। ऐसे में मामले के समाधान के लिए प्रशासन और किसानों के बीच संवाद तथा निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण होगी। यदि सभी पक्ष मिलकर संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत समाधान की दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो लंबे समय से चला आ रहा यह विवाद समाप्त होने की संभावना बन सकती है।

