जयंत चौधरी का अखिलेश यादव पर निशाना, बोले-चीनी से ज्यादा गन्ने के भाव पर किसानों की बात होनी चाहिए

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Digital UP News Desk

मेरठ: राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के अध्यक्ष और केंद्रीय राज्यमंत्री जयंत चौधरी गुरुवार को बागपत पहुंचे। इस दौरान उन्होंने विपक्ष की राजनीति और किसानों से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। जयंत चौधरी ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि किसानों के हितों की चर्चा केवल चीनी की कीमतों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष को किसानों की वास्तविक समस्याओं और खासतौर पर गन्ने के उचित भाव को लेकर अपनी बात मजबूती से रखनी चाहिए।

जयंत चौधरी ने कहा कि मौजूदा समय में किसानों के लिए गन्ने का भाव एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। उनके मुताबिक, यदि किसानों के हितों की बात करनी है तो गन्ने की कीमत, किसान की आय और उसकी आर्थिक स्थिति जैसे विषयों पर चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने अखिलेश यादव के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसे समय में विपक्ष को चीनी के दाम के बजाय गन्ने के भाव पर किसानों की बात रखनी चाहिए थी।

चीनी की महंगाई और गुलाब जामुन के दाम पर साधा निशाना

बागपत में मीडिया से बातचीत के दौरान जयंत चौधरी ने कहा कि केवल चीनी महंगी होने की बात करना पर्याप्त नहीं है। उन्होंने अखिलेश यादव के उस बयान पर टिप्पणी की, जिसमें चीनी की महंगाई और उससे जुड़े असर का जिक्र किया गया था। जयंत चौधरी ने कहा कि किसानों के संदर्भ में चर्चा करते समय गन्ना उत्पादक किसानों के हितों को केंद्र में रखना जरूरी है।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश यादव चीनी की महंगाई और गुलाब जामुन की कीमत में बढ़ोतरी की बात कर रहे हैं, जबकि उन्हें किसानों के गन्ने के भाव को लेकर अपनी बात रखनी चाहिए थी। जयंत चौधरी के इस बयान को उत्तर प्रदेश की सियासत में किसानों के मुद्दे को लेकर चल रही राजनीतिक बयानबाजी से जोड़कर देखा जा रहा है।

दरअसल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में गन्ना और किसान लंबे समय से महत्वपूर्ण मुद्दे रहे हैं। ऐसे में नेताओं की ओर से गन्ने के दाम, चीनी की कीमत और किसानों की आय से जुड़े सवाल लगातार उठाए जाते रहे हैं। जयंत चौधरी का ताजा बयान भी इसी राजनीतिक और किसान केंद्रित विमर्श का हिस्सा माना जा रहा है।

कार्यकर्ताओं से संयम बरतने की अपील

इसके अलावा, जयंत चौधरी ने अखिलेश यादव के ‘चवन्नी से रुपया बनाने’ वाले बयान और विवादित होर्डिंग लगाए जाने से जुड़े सवाल पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से संयम बरतने की अपील की। जयंत चौधरी ने कहा कि राजनीतिक गतिविधियों के दौरान कार्यकर्ताओं को अपनी भाषा और व्यवहार में मर्यादा बनाए रखनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि चुनाव के समय राजनीतिक माहौल में कई तरह की टिप्पणियां सामने आती हैं। ऐसे में कार्यकर्ताओं को उत्तेजित होने से बचना चाहिए और अपनी ‘लक्ष्मण रेखा’ नहीं लांघनी चाहिए। जयंत चौधरी ने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति बिना नाम लिए टिप्पणी कर रहा है तो कार्यकर्ताओं को उस पर अनावश्यक ध्यान नहीं देना चाहिए।

उनकी इस अपील को राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच संयम और अनुशासन बनाए रखने के संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। जयंत चौधरी ने स्पष्ट किया कि चुनावी माहौल में बयानबाजी स्वाभाविक है, लेकिन कार्यकर्ताओं को किसी भी टिप्पणी पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय राजनीतिक मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए।

बागपत में पुस्तकालय का उद्घाटन

जयंत चौधरी गुरुवार को बागपत के खेकड़ा पहुंचे। यहां उन्होंने गांधी इंटर कॉलेज में नवनिर्मित पुस्तकालय का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद भी किया और शिक्षा के क्षेत्र में पुस्तकालयों की भूमिका पर जोर दिया।

जयंत चौधरी ने कहा कि विद्यार्थियों के जीवन में पुस्तकालय का महत्वपूर्ण स्थान है। पुस्तकालय केवल किताबें रखने की जगह नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के अध्ययन, ज्ञान और व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि सरकारी विद्यालयों में पुस्तकालयों का खुलना एक बड़ी उपलब्धि है।

उन्होंने विद्यार्थियों से पुस्तकालय का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की। उनके मुताबिक, नियमित अध्ययन और पुस्तकों के माध्यम से विद्यार्थी अपने ज्ञान को व्यापक बना सकते हैं। इससे उन्हें शिक्षा के साथ-साथ भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं और विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ने में भी मदद मिल सकती है।

सरकारी स्कूलों में लाइब्रेरी को बताया महत्वपूर्ण पहल

केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि सरकारी विद्यालयों में बेहतर शैक्षिक सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है। इसके लिए कक्षाओं के साथ पुस्तकालयों की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जब विद्यार्थियों को स्कूल स्तर पर ही अच्छी किताबें और अध्ययन सामग्री उपलब्ध होगी, तो उनकी पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ेगी।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि सफलता के लिए निरंतर मेहनत और अध्ययन आवश्यक है। पुस्तकालय में उपलब्ध किताबों का उपयोग करके छात्र अपनी पाठ्यपुस्तकों के अलावा अन्य विषयों का ज्ञान भी हासिल कर सकते हैं। इससे उनकी सोच का दायरा बढ़ेगा और वे भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे।

जयंत चौधरी ने सरकारी विद्यालयों में लाइब्रेरी खुलने को सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में इस तरह की सुविधाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। साथ ही, उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित रूप से पढ़ने और अपने लक्ष्य के प्रति गंभीर रहने का संदेश दिया।

चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा पर किया माल्यार्पण

कार्यक्रम के दौरान जयंत चौधरी ने अपने दादा और पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। चौधरी चरण सिंह का नाम किसानों और ग्रामीण भारत से जुड़े मुद्दों के साथ लंबे समय से जुड़ा रहा है।

जयंत चौधरी का बागपत दौरा राजनीतिक गतिविधियों के साथ शिक्षा से जुड़े कार्यक्रमों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रहा। एक ओर उन्होंने किसानों के मुद्दे पर विपक्ष को घेरा, वहीं दूसरी ओर विद्यार्थियों से संवाद करते हुए शिक्षा और पुस्तकालयों की उपयोगिता पर जोर दिया।

किसानों के मुद्दे पर आगे भी जारी रह सकती है सियासत

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों और गन्ने से जुड़े मुद्दों की राजनीतिक अहमियत को देखते हुए जयंत चौधरी का बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चीनी की कीमत और गन्ने के भाव के बीच किसानों से जुड़े आर्थिक सवालों को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप आगे भी देखने को मिल सकते हैं।

जयंत चौधरी ने अपने बयान के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि किसानों से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक चर्चा का केंद्र किसान की आय और गन्ने का उचित मूल्य होना चाहिए। वहीं, कार्यकर्ताओं से संयम बरतने की उनकी अपील से यह भी संकेत मिलता है कि चुनावी माहौल में पार्टी संगठन को अनुशासन और मर्यादा के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया जा रहा है।

कुल मिलाकर, जयंत चौधरी का बागपत दौरा राजनीतिक बयानबाजी और शिक्षा, दोनों दृष्टि से चर्चा में रहा। उन्होंने जहां अखिलेश यादव पर किसानों के मुद्दे को लेकर निशाना साधा, वहीं सरकारी विद्यालय में पुस्तकालय का उद्घाटन कर विद्यार्थियों को शिक्षा और अध्ययन के महत्व का संदेश दिया। इसके साथ ही उन्होंने कार्यकर्ताओं से राजनीतिक टिप्पणियों पर संयम बरतने और अपनी ‘लक्ष्मण रेखा’ नहीं लांघने की अपील की।

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