यूपी में वाहन टैगिंग व्यवस्था के विरोध में व्यापारियों का धरना, एक सप्ताह का दिया अल्टीमेटम – पढ़िए क्यों?
रिपोर्ट – सुहैल अंसारी
कानपुर: उत्तर प्रदेश में जियो टैग ऐप के जरिए लागू की गई वाहन टैगिंग व्यवस्था को लेकर व्यापारियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। व्यवस्था के बार-बार फेल होने और इससे कारोबार प्रभावित होने का आरोप लगाते हुए कानपुर की चकरपुर सब्जी मंडी में व्यापारियों ने सड़क पर धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान हरी सब्जी, फल, आलू और प्याज समेत कृषि उत्पादों का कारोबार करने वाले व्यापारियों ने अपनी समस्याएं उठाईं।
व्यापारियों का कहना है कि वाहन टैगिंग व्यवस्था के तकनीकी रूप से बार-बार बाधित होने का सबसे अधिक असर जल्दी खराब होने वाली हरी सब्जियों और अन्य कृषि उत्पादों के कारोबार पर पड़ रहा है। उनका कहना है कि समय पर वाहन टैगिंग और गेट पास की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से मंडी में माल की आवाजाही प्रभावित होती है। इससे व्यापारियों को व्यावहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
वाहन टैगिंग व्यवस्था वापस लेने की मांग
भारतीय कृषि उत्पाद उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्र के नेतृत्व में व्यापारियों ने चकरपुर सब्जी मंडी में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने वाहन टैगिंग व्यवस्था को वापस लेने की मांग की। इसके साथ ही मंडी व्यवस्था से जुड़ी अन्य समस्याओं के समाधान की भी मांग उठाई गई।
व्यापारियों की ओर से मुख्यमंत्री को संबोधित आठ सूत्रीय ज्ञापन ई-मेल के माध्यम से भेजा गया। ज्ञापन में वाहन टैगिंग व्यवस्था के अलावा व्यापारियों को जारी नोटिस, गेट पास की समय-सीमा और फर्म से जुड़े नियमों को लेकर भी अपनी आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं।
व्यापारियों का कहना है कि जियोटैग ऐप आधारित व्यवस्था को प्रयोग के तौर पर लागू किए जाने के दौरान प्रदेश में 451 व्यापारियों और उद्यमियों को नोटिस जारी किए गए। व्यापारियों ने इन नोटिसों को वापस लेने की मांग की है।
हरी सब्जी कारोबार पर सबसे अधिक असर
धरने के दौरान व्यापारियों ने कहा कि वाहन टैगिंग व्यवस्था के बार-बार फेल होने का सबसे ज्यादा असर हरी सब्जियों के कारोबार पर पड़ रहा है। हरी सब्जियों और कुछ अन्य कृषि उत्पादों की प्रकृति ऐसी होती है कि उन्हें लंबे समय तक रोककर नहीं रखा जा सकता। ऐसे में वाहन टैगिंग अथवा गेट पास से संबंधित प्रक्रिया में देरी होने पर व्यापारियों के सामने व्यावसायिक दिक्कतें खड़ी हो सकती हैं।
ज्ञानेश मिश्र ने कहा कि मंडियों में कृषि उत्पादों की आवक और निकासी लगातार बनी रहती है। इसलिए ऐसी व्यवस्था जरूरी है जो तकनीकी रूप से सुचारु हो और व्यापारियों के काम में अनावश्यक बाधा उत्पन्न न करे। उनका कहना है कि यदि तकनीकी समस्या के कारण वाहन टैगिंग बार-बार फेल होती है तो इसका सीधा असर कृषि उत्पादों की आवाजाही और व्यापार पर पड़ता है।
गेट पास की समय-सीमा पर भी आपत्ति
व्यापारियों ने गेट पास से संबंधित समय-सीमा के नियमों को लेकर भी अपनी समस्याएं सामने रखीं। उनका कहना है कि मंडी में कृषि उत्पादों की आवक कई परिस्थितियों पर निर्भर करती है। ऐसे में गेट पास की समय-सीमा को लेकर बनाए गए नियमों में व्यावहारिक कठिनाइयों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
व्यापारियों की मांग है कि गेट पास से संबंधित नियमों की समीक्षा की जाए और ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे कृषि उत्पादों की आवाजाही में अनावश्यक परेशानी न हो। खासतौर पर सब्जी और फल कारोबार में समय का महत्व अधिक होने के कारण व्यापारियों ने नियमों को सरल और व्यावहारिक बनाने की मांग की है।
फर्म के स्वरूप में बदलाव को लेकर भी विरोध
व्यापारियों ने प्रोपराइटरशिप फर्मों को पार्टनरशिप में परिवर्तित करने से जुड़े प्रावधानों को भी जटिल बताया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि ऐसे प्रावधानों को वापस लिया जाए अथवा उन्हें सरल बनाया जाए।
व्यापारियों का कहना है कि मंडी कारोबार से जुड़े छोटे और मध्यम स्तर के व्यापारियों के लिए अनावश्यक जटिल प्रक्रियाएं परेशानी का कारण बन सकती हैं। इसलिए मंडी से संबंधित नियमों को सरल, पारदर्शी और कारोबार के अनुकूल बनाया जाना चाहिए।
चकरपुर मंडी में कारोबार रहा बंद
व्यापारियों के धरना प्रदर्शन के दौरान चकरपुर सब्जी मंडी में कारोबार बंद रहा। हरी सब्जी, फल, आलू, प्याज और अन्य कृषि उत्पादों से जुड़े व्यापारियों ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
इस दौरान व्यापारियों ने अपनी मांगों को लेकर एकजुटता दिखाई। उनका कहना था कि वे मंडी व्यवस्था में सुधार और तकनीकी समस्याओं के समाधान के पक्ष में हैं, लेकिन ऐसी व्यवस्था स्वीकार्य नहीं होगी जिससे कृषि उत्पादों के कारोबार में अनावश्यक बाधा उत्पन्न हो।
प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने मंडी व्यवस्था से संबंधित अन्य समस्याओं को भी अधिकारियों और सरकार के समक्ष रखने की बात कही।
एक सप्ताह का दिया गया समय
धरना प्रदर्शन के बाद व्यापारियों ने आगे की रणनीति भी तय की। व्यापारियों के मुताबिक, सरकार और मंडी परिषद की ओर से यदि एक सप्ताह के भीतर वाहन टैगिंग व्यवस्था वापस नहीं ली जाती है, तो प्रदेश की विभिन्न मंडियों और कृषि उत्पाद कारोबारियों को साथ लेकर लखनऊ में आंदोलन किया जाएगा।
व्यापारियों ने कहा कि इसके बाद मंडी परिषद कार्यालय, किसान भवन, गोमती नगर, लखनऊ में अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन और अनशन किया जाएगा। हालांकि, व्यापारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता समस्याओं का समाधान बातचीत के माध्यम से कराना है।
व्यापारियों ने रखीं आठ सूत्रीय मांगें
प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री को संबोधित आठ सूत्रीय ज्ञापन के माध्यम से व्यापारियों ने अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाईं। इसमें मुख्य रूप से जियोटैग ऐप आधारित वाहन टैगिंग व्यवस्था को वापस लेने, प्रयोग के दौरान जारी किए गए 451 नोटिसों को वापस लेने, गेट पास की समय-सीमा से संबंधित नियमों में बदलाव करने और प्रोपराइटरशिप फर्मों को पार्टनरशिप में बदलने संबंधी जटिल प्रावधानों को वापस लेने की मांग शामिल है।
इसके अलावा मंडी व्यवस्था से संबंधित अन्य समस्याओं के निराकरण की भी मांग की गई है। व्यापारियों का कहना है कि कृषि उत्पादों के कारोबार को सरल बनाने के लिए मंडी व्यवस्था में तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर सुधार जरूरी है।
व्यापारियों ने सरकार से समाधान की मांग की
इस पूरे मामले में व्यापारियों का कहना है कि वे नियमों और पारदर्शी व्यवस्था के विरोध में नहीं हैं। उनकी आपत्ति ऐसी तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से है, जिनके कारण कारोबार प्रभावित हो रहा है। व्यापारियों ने सरकार से मांग की है कि जियोटैग ऐप और वाहन टैगिंग व्यवस्था की व्यावहारिक समस्याओं की समीक्षा की जाए।
धरना प्रदर्शन में भारतीय कृषि उत्पाद उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्र के साथ प्रदेश युवा वरिष्ठ उपाध्यक्ष चकरपुर मंडी पंकज कुशवाहा और प्रदेश युवा उपाध्यक्ष एवं हरी सब्जी आढ़ती व्यापार मंडल के अध्यक्ष सौरभ पांडेय सहित कई व्यापारी शामिल रहे।
अब व्यापारियों की नजर सरकार और मंडी परिषद की ओर से होने वाली कार्रवाई पर है। यदि एक सप्ताह के भीतर उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं होता है, तो व्यापारियों ने लखनऊ में अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन और अनशन शुरू करने की चेतावनी दी है। वहीं, यदि सरकार स्तर से समाधान की पहल होती है तो आंदोलन को आगे बढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

