कर्ण शर्मा ने रिंकू सिंह का विकेट लेकर क्रिकेट को कहा अलविदा, गार्ड ऑफ ऑनर से हुआ भावुक विदाई समारोह

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Digital UP News

लखनऊ: भारतीय क्रिकेट के अनुभवी लेग स्पिनर कर्ण शर्मा ने लखनऊ के भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी इकाना क्रिकेट स्टेडियम में अपने प्रतिस्पर्धी क्रिकेट करियर का अंतिम मुकाबला खेला। यूपी टी-20 लीग सीजन-4 में कानपुर सुपरस्टार्स और मेरठ मावेरिक्स के बीच खेले गए मुकाबले के दौरान कर्ण शर्मा को साथी खिलाड़ियों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानित किया।

कर्ण शर्मा की विदाई इसलिए भी खास बन गई, क्योंकि उन्होंने अपने आखिरी मुकाबले में मेरठ मावेरिक्स के कप्तान और भारतीय बल्लेबाज रिंकू सिंह का विकेट हासिल किया। इस तरह रिंकू सिंह का विकेट कर्ण शर्मा के प्रतिस्पर्धी क्रिकेट करियर का अंतिम विकेट बन गया। बारिश के कारण मुकाबला पांच-पांच ओवर का कर दिया गया था, जिसमें मेरठ मावेरिक्स ने कानपुर सुपरस्टार्स को 19 रन से हराया।

मैदान पर मिला गार्ड ऑफ ऑनर

कर्ण शर्मा जब अपने अंतिम मुकाबले के लिए मैदान पर उतरे तो खिलाड़ियों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया। यह पल उनके लंबे क्रिकेट सफर के सम्मान में बेहद खास रहा। कर्ण ने करीब दो दशक के क्रिकेट करियर में घरेलू क्रिकेट के साथ भारतीय टीम और आईपीएल में भी अपनी पहचान बनाई।

38 वर्षीय कर्ण शर्मा ने 23 अगस्त को प्रतिस्पर्धी क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास की घोषणा की थी। उन्होंने बताया था कि यूपी टी-20 लीग में 25 अगस्त को होने वाला मुकाबला उनका अंतिम पेशेवर मैच होगा। इसके बाद इकाना स्टेडियम में उन्होंने मैदान पर उतरकर अपने क्रिकेट करियर का अंतिम अध्याय पूरा किया।

रिंकू सिंह का विकेट बना आखिरी विकेट

कानपुर सुपरस्टार्स और मेरठ मावेरिक्स के बीच बारिश से प्रभावित मुकाबले में मेरठ की पारी बेहद संक्षिप्त रही। मैच पांच ओवर प्रति पारी तक सीमित कर दिया गया था। इसी दौरान मेरठ के कप्तान रिंकू सिंह ने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए 10 गेंदों पर चार छक्कों की मदद से 30 रन बनाए।

रिंकू की तेज पारी के बाद कर्ण शर्मा ने उन्हें अपना शिकार बनाया। चौथे ओवर की पांचवीं गेंद पर रिंकू सिंह का विकेट हासिल करते ही कर्ण के क्रिकेट करियर का एक यादगार संयोग पूरा हो गया। जिस खिलाड़ी ने मैदान पर उनका अंतिम मुकाबला खेला, उसी टीम के कप्तान का विकेट उनके करियर की आखिरी गेंदबाजी उपलब्धियों में शामिल हो गया।

यह क्षण कर्ण शर्मा की विदाई को और यादगार बना गया। एक तरफ उनका लंबा क्रिकेट सफर समाप्त हो रहा था, वहीं दूसरी ओर उन्होंने अपनी पहचान के अनुरूप गेंदबाजी करते हुए एक महत्वपूर्ण विकेट हासिल किया।

विशेष स्मृति चिह्न देकर किया सम्मानित

मुकाबला समाप्त होने के बाद यूपी टी-20 लीग गवर्निंग काउंसिल के चेयरमैन डॉ. संजय कपूर ने कर्ण शर्मा को विशेष स्मृति चिह्न भेंट किया। इसके जरिए उनके क्रिकेट में योगदान को सम्मानित किया गया।

डॉ. संजय कपूर ने कर्ण शर्मा के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय और घरेलू क्रिकेट में उनकी भूमिका शानदार रही है। उन्होंने मेहनत, अनुशासन और खेल के प्रति समर्पण के साथ लंबा सफर तय किया।

उन्होंने यह भी कहा कि कर्ण शर्मा के अंतिम मुकाबले का हिस्सा बनना और उन्हें सम्मानित करना यूपी टी-20 लीग के लिए गौरव का क्षण है। साथ ही, उनके अनुभव का लाभ भविष्य में नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को मिलने की उम्मीद जताई गई।

भारत के लिए भी खेल चुके हैं कर्ण शर्मा

कर्ण शर्मा ने घरेलू क्रिकेट के अलावा भारतीय क्रिकेट टीम का भी प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने भारत के लिए एक टेस्ट, दो वनडे और एक टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेला। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उनका सफर लंबा नहीं रहा, लेकिन घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में उन्होंने लगातार अपनी उपयोगिता साबित की।

लेग स्पिन गेंदबाजी उनकी प्रमुख पहचान रही। घरेलू क्रिकेट में लंबे समय तक खेलने के कारण उन्हें परिस्थितियों को समझने और बल्लेबाजों पर दबाव बनाने का अच्छा अनुभव रहा। आईपीएल में भी उन्होंने कई टीमों का प्रतिनिधित्व किया और अपनी गेंदबाजी से अहम योगदान दिया।

आईपीएल में भी बनाया खास रिकॉर्ड

कर्ण शर्मा का आईपीएल करियर भी उपलब्धियों से भरा रहा। उन्होंने सनराइजर्स हैदराबाद, मुंबई इंडियंस, चेन्नई सुपर किंग्स और रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु जैसी फ्रेंचाइजी के लिए खेला। वह आईपीएल में चार बार चैंपियन टीम का हिस्सा रहे और लगातार तीन सीजन में अलग-अलग फ्रेंचाइजी के साथ खिताब जीतने वाले खिलाड़ियों में शामिल रहे।

घरेलू क्रिकेट में भी उन्होंने लंबा सफर तय किया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, प्रथम श्रेणी क्रिकेट में उनके नाम 270 विकेट रहे, जबकि लिस्ट-ए क्रिकेट में उन्होंने 153 विकेट हासिल किए।

इन उपलब्धियों से स्पष्ट है कि कर्ण शर्मा ने अलग-अलग स्तरों पर लंबे समय तक प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में अपनी जगह बनाए रखी।

बारिश ने बदला मैच का स्वरूप

कर्ण शर्मा के अंतिम मुकाबले में बारिश ने भी भूमिका निभाई। लगातार बारिश के कारण मैच को पांच-पांच ओवर का कर दिया गया। कम ओवरों के इस मुकाबले में बल्लेबाजों के पास तेजी से रन बनाने का मौका था। वहीं, गेंदबाजों के लिए हर गेंद महत्वपूर्ण हो गई।

मेरठ मावेरिक्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित पांच ओवरों में चुनौतीपूर्ण स्कोर खड़ा किया। इसके जवाब में कानपुर सुपरस्टार्स की टीम लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी और मेरठ ने मुकाबला 19 रन से अपने नाम कर लिया। इस जीत के साथ मेरठ मावेरिक्स ने टूर्नामेंट में लगातार सातवीं जीत दर्ज की।

जीशान अंसारी बने मैन ऑफ द मैच

मुकाबले में मेरठ मावेरिक्स की जीत के प्रमुख खिलाड़ियों में जीशान अंसारी भी रहे। उन्होंने गेंदबाजी में प्रभावी प्रदर्शन करते हुए तीन विकेट हासिल किए और उन्हें मैन ऑफ द मैच चुना गया।

हालांकि, मैच का सबसे यादगार पल कर्ण शर्मा की विदाई रही। जीत और हार से अलग इस मुकाबले को उनके क्रिकेट करियर के अंतिम मैच के रूप में लंबे समय तक याद किया जाएगा।

क्रिकेट से पूरी तरह दूर नहीं होंगे कर्ण शर्मा

कर्ण शर्मा ने संन्यास के बाद भी क्रिकेट से जुड़े रहने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा था कि भविष्य में वह कोचिंग और क्रिकेट से जुड़ी अन्य जिम्मेदारियों के लिए उपलब्ध रहेंगे।

ऐसे में उनका अनुभव आने वाले समय में युवा क्रिकेटरों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। खासतौर पर लेग स्पिन गेंदबाजी और घरेलू क्रिकेट के लंबे अनुभव के कारण वह नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को तकनीकी और मानसिक स्तर पर मार्गदर्शन दे सकते हैं।

रिंकू के विकेट के साथ पूरा हुआ क्रिकेट सफर

कर्ण शर्मा के अंतिम मुकाबले का सबसे खास पहलू यही रहा कि उन्होंने अपने क्रिकेट करियर का अंतिम विकेट रिंकू सिंह के रूप में हासिल किया। रिंकू ने भले ही 10 गेंदों पर 30 रन की तेज पारी खेली, लेकिन कर्ण ने उन्हें आउट करके अपने प्रतिस्पर्धी क्रिकेट सफर को यादगार अंदाज में समाप्त किया।

मैदान पर गार्ड ऑफ ऑनर, सम्मान समारोह और विशेष स्मृति चिह्न ने इस विदाई को और खास बना दिया। इस तरह इकाना स्टेडियम में कर्ण शर्मा ने क्रिकेट को अलविदा कहा और एक लंबे सफर का समापन किया।

कर्ण शर्मा की विदाई भारतीय और घरेलू क्रिकेट के उस दौर के एक अनुभवी खिलाड़ी के प्रतिस्पर्धी करियर का अंत है, जिसने लेग स्पिन के जरिए कई टीमों में अपनी उपयोगिता साबित की। अब क्रिकेट के मैदान पर खिलाड़ी के रूप में उनका सफर भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन उनके अनुभव की भूमिका आने वाले वर्षों में क्रिकेट से जुड़े दूसरे रूपों में जारी रहने की उम्मीद है।

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