सुल्तानपुर में दर्दनाक हादसा: मरीज का ऑपरेशन करने जा रहे डॉक्टर की मौत, दो साथी गंभीर
Digital UP News Desk
सुल्तानपुर: उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में अयोध्या-प्रयागराज हाईवे पर सोमवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। दरियापुर रेलवे ओवरब्रिज के पास तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर पुल की रेलिंग से जा टकराई। हादसे में कार चला रहे 34 वर्षीय डॉक्टर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके साथ मौजूद दो अन्य डॉक्टर गंभीर रूप से घायल हो गए।
तीनों डॉक्टर एक मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए इमरजेंसी ऑपरेशन के लिए अस्पताल जा रहे थे।
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को उपचार के लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद एक घायल डॉक्टर की हालत गंभीर होने पर उन्हें लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया। वहीं, मृतक डॉक्टर के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर पुलिस ने मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
इमरजेंसी ऑपरेशन के लिए अस्पताल जा रहे थे डॉक्टर
मिली जानकारी के अनुसार, हादसा सोमवार रात करीब 11:30 बजे कोतवाली देहात थाना क्षेत्र में स्थित दरियापुर रेलवे ओवरब्रिज के पास हुआ। बताया गया कि तीनों डॉक्टर अमहट स्थित एक निजी नर्सिंग होम में एक मरीज का ऑपरेशन पूरा करने के बाद दरियापुर स्थित एक निजी अस्पताल की ओर जा रहे थे।
दरअसल, दरियापुर के अस्पताल में एक अन्य मरीज की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही थी। मरीज को तत्काल सर्जरी की जरूरत थी। ऐसे में डॉक्टरों को इमरजेंसी कॉल मिली और वे जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचने के लिए रवाना हुए। इसी दौरान हाईवे पर यह हादसा हो गया।
बताया जा रहा है कि ओवरब्रिज पर कार के आगे एक अन्य वाहन चल रहा था। उसे ओवरटेक करने के प्रयास के दौरान कार का संतुलन बिगड़ गया। इसके बाद वाहन अनियंत्रित होकर पुल की लोहे की रेलिंग से जा टकराया। टक्कर इतनी तेज थी कि कार को काफी नुकसान पहुंचा और उसमें सवार डॉक्टर गंभीर रूप से प्रभावित हुए।
34 वर्षीय डॉक्टर की मौके पर मौत
हादसे में कार चला रहे 34 वर्षीय डॉ. अख्तर की मौके पर ही मौत हो गई। डॉ. अख्तर गभड़िया इलाके के रहने वाले थे और उनका मूल निवास लोहरामऊ बताया गया है। वह जिले में चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े जाने-माने डॉक्टरों में शामिल थे।
हादसे की जानकारी मिलने के बाद आसपास के लोग घटनास्थल पर पहुंचे। स्थानीय लोगों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। इसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव की कार्रवाई शुरू की।
हादसे के कारण हाईवे पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी की स्थिति बनी रही। पुलिस ने घायलों को वाहन से बाहर निकालकर उपचार के लिए अस्पताल भेजने की व्यवस्था की। हालांकि, कार चला रहे डॉ. अख्तर को बचाया नहीं जा सका।
दो डॉक्टर गंभीर रूप से घायल
कार में डॉ. अख्तर के साथ दो अन्य डॉक्टर भी मौजूद थे। इनमें सर्जन डॉ. शैलेंद्र जायसवाल और डॉ. राशिद शामिल हैं। हादसे में दोनों गंभीर रूप से घायल हुए।
डॉ. शैलेंद्र जायसवाल दरियापुर के रहने वाले बताए गए हैं, जबकि डॉ. राशिद हरखपुर, कुड़वार निवासी हैं। दोनों को पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से राजकीय मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने उनका उपचार शुरू किया।
प्राथमिक उपचार के दौरान डॉ. राशिद की स्थिति गंभीर बनी रही। उनकी हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने उन्हें बेहतर उपचार के लिए लखनऊ ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया। वहीं, डॉ. शैलेंद्र जायसवाल का भी उपचार जारी है।
मरीज की जान बचाने के लिए निकले थे
इस हादसे का एक अहम पहलू यह है कि तीनों डॉक्टर एक गंभीर मरीज के इमरजेंसी ऑपरेशन के लिए अस्पताल जा रहे थे। बताया गया कि मरीज की स्थिति नाजुक थी और उसे तत्काल चिकित्सा हस्तक्षेप की आवश्यकता थी। इसी वजह से डॉक्टरों को रात में ही अस्पताल पहुंचना था।
हालांकि, अस्पताल पहुंचने से पहले ही उनकी कार हादसे का शिकार हो गई। इस घटना ने एक तरफ चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों को स्तब्ध कर दिया है, वहीं दूसरी ओर सड़क सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, रात के समय हाईवे पर वाहन चलाते समय विशेष सावधानी जरूरी होती है। तेज रफ्तार, ओवरटेकिंग और अचानक वाहन का संतुलन बिगड़ना गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है। ऐसे में इमरजेंसी की स्थिति में भी सुरक्षित गति और सड़क की परिस्थितियों का ध्यान रखना आवश्यक है।
पुलिस ने शुरू की कानूनी कार्रवाई
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घायलों को अस्पताल भिजवाया। पुलिस ने मृतक डॉक्टर के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
नगर कोतवाल इंस्पेक्टर सूर्य नारायण मिश्र के मुताबिक, मामले में आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है। पुलिस हादसे के कारणों की जांच कर रही है और घटनास्थल से संबंधित जानकारी जुटाई जा रही है।
इसके अलावा, दुर्घटना के दौरान कार की स्थिति, सड़क पर मौजूद परिस्थितियों और वाहन को ओवरटेक करने से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा सकती है। जांच पूरी होने के बाद हादसे की वास्तविक वजह को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होगी।
डॉक्टर की मौत से चिकित्सा जगत में शोक
सड़क हादसे में डॉ. अख्तर की मौत की खबर सामने आने के बाद स्थानीय चिकित्सा समुदाय में शोक की लहर है। एक डॉक्टर का इस तरह अचानक निधन होना उनके परिचितों और सहयोगियों के लिए बेहद दुखद घटना है।
वहीं, घायल दोनों डॉक्टरों के जल्द स्वस्थ होने की उम्मीद जताई जा रही है। डॉ. राशिद को बेहतर उपचार के लिए लखनऊ ट्रॉमा सेंटर भेजे जाने के बाद उनके स्वास्थ्य पर निगाह बनी हुई है।
यह घटना एक बार फिर यह याद दिलाती है कि सड़क पर कुछ मिनट बचाने की कोशिश भी कभी-कभी बेहद गंभीर परिणाम ला सकती है। खासकर रात के समय हाईवे और ओवरब्रिज पर वाहन चलाते हुए गति, दूरी और ओवरटेकिंग को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है।
हादसे से उठे सड़क सुरक्षा के सवाल
अयोध्या-प्रयागराज हाईवे पर हुए इस हादसे के बाद सड़क सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। ओवरब्रिज और हाईवे के हिस्सों में वाहन चालकों के लिए पर्याप्त संकेतक, गति नियंत्रण और सुरक्षित ओवरटेकिंग की व्यवस्था दुर्घटनाओं को कम करने में मदद कर सकती है।
हालांकि, इस मामले में दुर्घटना की सटीक वजह पुलिस जांच के बाद ही सामने आएगी। फिलहाल पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और घायलों का उपचार कराया जा रहा है।

