कानपुर में बढ़ा गंगा का जलस्तर, चेतावनी बिंदु से महज 38 सेंटीमीटर दूर; बैराज पर 5 सेंटीमीटर की दूरी
रिपोर्ट- विक्की रघुवंशी
कानपुर। कानपुर में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से कटरी क्षेत्र के गांवों में हलचल बढ़ने लगी है। मंगलवार को गंगा बैराज से 3.48 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद नदी के जलस्तर पर प्रशासन और स्थानीय लोगों की नजर बनी हुई है। गंगा अब चेतावनी बिंदु के बेहद करीब पहुंच गई हैं। वहीं, गंगा बैराज की अपस्ट्रीम पर स्थिति और अधिक संवेदनशील बनी हुई है, जहां चेतावनी स्तर से महज पांच सेंटीमीटर की दूरी बताई जा रही है।
मंगलवार को गंगा बैराज की अपस्ट्रीम पर गंगा का जलस्तर 114.100 मीटर दर्ज किया गया। इसी तरह डाउनस्ट्रीम पर जलस्तर 113.950 मीटर रहा। इसके अलावा शुक्लागंज गेज पर गंगा का जलस्तर 112.620 मीटर दर्ज किया गया। जलस्तर में लगातार हो रही बढ़ोतरी के कारण कटरी क्षेत्र में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ने लगी है।
बैराज से छोड़ा गया 3.48 लाख क्यूसेक पानी
गंगा बैराज से मंगलवार को 3.48 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के बाद नदी के आसपास के क्षेत्रों में इसका असर दिखाई देने लगा है। खासकर कटरी क्षेत्र के गांवों में लोग नदी के जलस्तर और पानी की गति पर नजर रख रहे हैं।
दरअसल, गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी का सीधा असर नदी के किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों पर पड़ता है। ऐसे में ग्रामीणों के बीच जरूरी सामान की व्यवस्था और आवागमन को लेकर सतर्कता बढ़ गई है। हालांकि, मौजूदा स्थिति में प्रशासन की ओर से लगातार जलस्तर की निगरानी की जा रही है।
चेतावनी बिंदु के करीब पहुंचा जलस्तर
गंगा के जलस्तर का बढ़ना अपने आप में निगरानी का विषय है। कानपुर में गंगा अब चेतावनी बिंदु से महज 38 सेंटीमीटर नीचे रह गई हैं। वहीं, गंगा बैराज की अपस्ट्रीम पर यह अंतर और कम होकर केवल पांच सेंटीमीटर बताया जा रहा है।
इस स्थिति को देखते हुए नदी के आसपास रहने वाले लोगों की चिंता स्वाभाविक रूप से बढ़ी है। हालांकि, जलस्तर के आंकड़ों के आधार पर स्थिति पर लगातार नजर रखना जरूरी है। प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए आने वाले समय में नदी के जलस्तर में होने वाला बदलाव महत्वपूर्ण रहेगा।
कटरी के गांवों में बढ़ी हलचल
जलस्तर बढ़ने के साथ ही कटरी क्षेत्र के गांवों में हलचल धीरे-धीरे बढ़ने लगी है। ग्रामीण नदी की स्थिति को लेकर जानकारी जुटा रहे हैं और जलस्तर बढ़ने की स्थिति में संभावित प्रभाव वाले क्षेत्रों पर नजर रख रहे हैं।
कटरी क्षेत्र में कई स्थान ऐसे हैं जहां नदी के बढ़ते पानी का प्रभाव अपेक्षाकृत जल्दी दिखाई दे सकता है। इसलिए स्थानीय स्तर पर लोगों के बीच सतर्कता बढ़ना स्वाभाविक है। इसके साथ ही ग्रामीणों को जलस्तर से जुड़े आधिकारिक अपडेट पर भरोसा करने और अफवाहों से बचने की जरूरत है।
अपस्ट्रीम और डाउनस्ट्रीम में दर्ज हुआ जलस्तर
मंगलवार को गंगा बैराज की अपस्ट्रीम पर जलस्तर 114.100 मीटर रहा। वहीं, डाउनस्ट्रीम में जलस्तर 113.950 मीटर दर्ज किया गया। दोनों स्थानों के आंकड़े नदी की मौजूदा स्थिति को समझने के लिए महत्वपूर्ण हैं।
इसके अलावा शुक्लागंज गेज पर 112.620 मीटर जलस्तर दर्ज किया गया। अलग-अलग गेज पर दर्ज किए जा रहे आंकड़ों के आधार पर संबंधित विभाग नदी के जलस्तर की स्थिति का आकलन करते हैं।
प्रशासन की निगरानी जरूरी
गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी के बीच प्रशासन के सामने सबसे महत्वपूर्ण चुनौती निचले इलाकों और कटरी क्षेत्र की स्थिति पर नजर बनाए रखना है। जलस्तर में अचानक वृद्धि होने की स्थिति में प्रभावित क्षेत्रों तक समय रहते सूचना पहुंचाना जरूरी होगा।
इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन के रास्तों, बिजली व्यवस्था, पेयजल और अन्य जरूरी सुविधाओं पर भी नजर रखना महत्वपूर्ण है। यदि जलस्तर में और बढ़ोतरी होती है, तो निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को समय पर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जा सकते हैं।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
वर्तमान स्थिति में नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। खासकर नदी के किनारे रहने वाले लोगों को अनावश्यक रूप से पानी के करीब जाने से बचना चाहिए। बच्चों को नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रखना भी जरूरी है।
साथ ही, ग्रामीणों को प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से जारी सूचनाओं पर ध्यान देना चाहिए। जलस्तर में बदलाव के संबंध में सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट सूचनाओं के बजाय आधिकारिक जानकारी को प्राथमिकता देना बेहतर रहेगा।
आगे की स्थिति पर टिकी नजर
गंगा बैराज से बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने और नदी के जलस्तर के चेतावनी बिंदु के करीब पहुंचने के बाद अब आगे की स्थिति पर सभी की नजर है। आने वाले घंटों में जलस्तर में बढ़ोतरी या कमी से क्षेत्र की स्थिति पर असर पड़ सकता है।
विशेष रूप से गंगा बैराज की अपस्ट्रीम पर चेतावनी बिंदु से महज पांच सेंटीमीटर की दूरी रह जाना महत्वपूर्ण संकेत है। वहीं, कानपुर में गंगा के चेतावनी बिंदु से 38 सेंटीमीटर नीचे होने के कारण भी निगरानी बढ़ाना जरूरी है।

