हिजाब विवाद पर हाईकोर्ट के फैसले का ओपी राजभर ने किया स्वागत, अखिलेश यादव से मांगा रुख
Digital UP News Desk
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के स्कूलों में छात्राओं के हिजाब पहनने से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद प्रदेश की सियासत में बहस तेज हो गई है। हाईकोर्ट ने स्कूल में हिजाब पहनने की अनुमति की मांग करने वाली छात्रा की याचिका खारिज कर दी। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने अदालत के फैसले का स्वागत किया और इसे संविधान तथा शिक्षण संस्थानों में निर्धारित नियमों के अनुरूप बताया।
मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि देश संविधान और कानून के आधार पर चलता है। इसलिए शिक्षण संस्थानों में लागू नियमों और निर्धारित ड्रेस कोड का पालन सभी विद्यार्थियों के लिए जरूरी होना चाहिए। उनके मुताबिक स्कूलों में ड्रेस कोड का उद्देश्य किसी विशेष धर्म या समुदाय को अलग करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के बीच समानता और अनुशासन की भावना बनाए रखना है।
ड्रेस कोड को लेकर ओपी राजभर का तर्क
मीडिया से बातचीत में ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि स्कूल एक ऐसा स्थान है जहां विद्यार्थी शिक्षा हासिल करने के लिए आते हैं। ऐसे में संस्थान द्वारा निर्धारित पोशाक का पालन किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि यदि अलग-अलग धार्मिक पहचान के आधार पर अलग-अलग पोशाक की अनुमति दी जाती है, तो विद्यालयों में समानता और अनुशासन से जुड़े सवाल खड़े हो सकते हैं।
राजभर ने जोर देते हुए कहा कि सभी विद्यार्थियों के लिए एक समान ड्रेस कोड होना शैक्षणिक वातावरण को व्यवस्थित रखने में मदद करता है। उन्होंने कहा कि संविधान के तहत अदालतों और संस्थानों द्वारा तय किए गए नियमों का सम्मान किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि विद्यार्थियों का मुख्य उद्देश्य शिक्षा प्राप्त करना है। इसलिए स्कूलों में निर्धारित ड्रेस कोड के पालन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनके अनुसार, किसी भी शिक्षण संस्थान में नियम सभी विद्यार्थियों पर समान रूप से लागू होने चाहिए।
हाईकोर्ट के फैसले को बताया स्वागत योग्य
कैबिनेट मंत्री ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्णय को स्वागत योग्य बताते हुए कहा कि अदालत ने मामले में संविधान और संस्थागत नियमों के दायरे में फैसला दिया है। उनका कहना है कि न्यायपालिका के निर्णयों का सम्मान करना लोकतांत्रिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
राजभर के बयान के बाद यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गया है। खासतौर पर समाजवादी पार्टी के रुख को लेकर उन्होंने सवाल उठाया है। दरअसल, हिजाब और ड्रेस कोड से जुड़े मुद्दे पर अलग-अलग राजनीतिक दलों की राय सामने आती रही है। ऐसे में हाईकोर्ट के फैसले के बाद भी इस विषय पर राजनीतिक बयानबाजी जारी रहने के संकेत हैं।
अखिलेश यादव पर ओपी राजभर का निशाना
हाईकोर्ट के फैसले का समर्थन करने के बाद ओमप्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को टैग करते हुए सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के कुछ प्रवक्ता अदालत के फैसले के खिलाफ बयान दे रहे हैं। ऐसे में पार्टी अध्यक्ष को इस मामले पर अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट करना चाहिए।
राजभर ने अपने पोस्ट के जरिए अखिलेश यादव से पूछा कि क्या वह भी हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ खड़े होंगे या फिर अदालत के निर्णय को स्वीकार करेंगे। उन्होंने इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी की नीति को लेकर भी सवाल उठाए।
मंत्री ने आरोप लगाया कि सपा की राजनीति में तुष्टिकरण का प्रभाव दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि हिजाब के मुद्दे पर समाज के विभिन्न वर्गों और मुस्लिम धर्मगुरुओं की नजर अब समाजवादी पार्टी के आधिकारिक रुख पर है।
‘जय संविधान’ के साथ दिया संदेश
ओमप्रकाश राजभर ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट का समापन ‘जय संविधान’ के संदेश के साथ किया। उन्होंने कहा कि संविधान के दायरे में रहकर दिए गए न्यायिक फैसलों का सभी को सम्मान करना चाहिए। साथ ही उन्होंने शिक्षण संस्थानों के माहौल को राजनीतिक विवाद का केंद्र बनाने से बचने की बात कही।
उनका तर्क है कि स्कूलों में पढ़ाई का वातावरण शांत, अनुशासित और समानता पर आधारित होना चाहिए। इसलिए ड्रेस कोड जैसे संस्थागत नियमों का पालन विद्यार्थियों के लिए जरूरी माना जाना चाहिए।
हिजाब विवाद पर आगे क्या?
इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब इस मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक ओर ओमप्रकाश राजभर ने अदालत के निर्णय का समर्थन किया है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग विचार सामने आ सकते हैं।
दरअसल, शिक्षण संस्थानों में ड्रेस कोड और धार्मिक पहचान से जुड़े मुद्दे देश के अलग-अलग हिस्सों में समय-समय पर चर्चा का विषय रहे हैं। ऐसे मामलों में अदालतें संस्थागत नियमों, संवैधानिक प्रावधानों और संबंधित पक्षों की दलीलों को ध्यान में रखकर निर्णय देती हैं।
वर्तमान मामले में भी हाईकोर्ट के फैसले के बाद राजनीतिक बहस तेज हुई है। हालांकि, इस पूरे विवाद को समझने के लिए अदालत के आदेश की विस्तृत कानूनी व्याख्या और मामले से जुड़े तथ्यों को देखना महत्वपूर्ण होगा।
राजनीतिक बयानबाजी के बीच शिक्षा व्यवस्था पर फोकस
ओपी राजभर ने अपने बयान के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि स्कूलों में ड्रेस कोड को राजनीतिक या धार्मिक बहस से अलग रखते हुए संस्थागत अनुशासन के नजरिए से देखा जाना चाहिए। उनका कहना है कि विद्यालयों में सभी विद्यार्थियों के लिए समान नियम होने से शिक्षा का वातावरण बेहतर बनाया जा सकता है।
वहीं, इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं आने के साथ बहस का दायरा भी बढ़ सकता है। खासतौर पर अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के रुख को लेकर राजभर के सवाल के बाद राजनीतिक चर्चा और तेज होने की संभावना है।
फिलहाल, हाईकोर्ट के फैसले ने उत्तर प्रदेश में स्कूलों के ड्रेस कोड और धार्मिक पहचान से जुड़े सवालों पर एक नई बहस को जन्म दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों और संबंधित पक्षों की ओर से और प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।

