काशी में 15 घंटे बारिश से जलभराव, BHU में मरीज कंधे पर पहुंचे, सड़कें बनीं तालाब

WhatsApp Image 2026-08-25 at 2.12.18 PM

Digital UP News Desk

वाराणसी: पूर्वी उत्तर प्रदेश में मानसूनी बारिश ने एक बार फिर जनजीवन की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। वाराणसी में करीब 15 घंटे से रुक-रुककर हो रही बारिश के कारण शहर के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई। सड़कें पानी से लबालब हो गईं और कई स्थानों पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई। वहीं, अस्पतालों और घरों तक बारिश का पानी पहुंचने से लोगों की परेशानी बढ़ गई है।

मंगलवार सुबह से ही वाराणसी समेत पूर्वी यूपी के कई जिलों में मौसम का मिजाज बदला हुआ है। लखनऊ, अयोध्या, झांसी, जौनपुर और प्रतापगढ़ समेत करीब 25 शहरों में रुक-रुककर तेज बारिश हो रही है। आसमान में घने काले बादल छाए रहने के कारण दिन में भी कई जगह अंधेरे जैसा माहौल बना हुआ है। लगातार बारिश के चलते निचले इलाकों में पानी भरने लगा है, जिससे आम लोगों को आने-जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

15 घंटे की बारिश से काशी में बिगड़े हालात

वाराणसी में लंबे समय तक हुई बारिश का असर शहर की सड़कों और गलियों पर साफ दिखाई दे रहा है। कई इलाकों में बारिश का पानी जमा होने के कारण सड़कें तालाब जैसी नजर आने लगीं। इसके चलते पैदल चलने वालों के साथ-साथ दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को भी परेशानी हुई।

जहां जलनिकासी की व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी, वहां पानी अधिक देर तक जमा रहने से स्थानीय लोगों की मुश्किलें और बढ़ गईं। लगातार बारिश के कारण लोगों को जरूरी काम के लिए घर से निकलने में भी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई जगह वाहन पानी में फंसते दिखाई दिए, जिससे यातायात प्रभावित हुआ।

बारिश के कारण शहर के कई हिस्सों में सामान्य गतिविधियां भी प्रभावित हुईं। लोगों को जलभराव वाले रास्तों से गुजरने में अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ी। इसके अलावा, बारिश के बीच सड़कों पर कम दृश्यता के कारण वाहन चालकों को भी सतर्क होकर चलना पड़ा।

BHU में मरीज को कंधे पर लेकर पहुंचे लोग

लगातार बारिश और जलभराव का असर अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों पर भी पड़ा। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से जुड़ा एक वीडियो सामने आया है, जिसमें बारिश और जलभराव के बीच लोग मरीज को कंधे पर लेकर अस्पताल पहुंचते दिखाई दे रहे हैं।

अस्पताल तक पहुंचने के रास्ते में पानी भरने के कारण मरीज को वाहन से आगे ले जाना मुश्किल हुआ। ऐसे में परिजनों और साथ मौजूद लोगों ने मरीज को कंधे पर उठाकर आगे पहुंचाया। इस घटना ने बारिश के दौरान अस्पतालों तक पहुंचने की चुनौती को सामने ला दिया है।

बारिश के दौरान मरीजों और उनके परिजनों के लिए सबसे बड़ी चिंता समय पर चिकित्सा सुविधा तक पहुंचना होती है। ऐसे में अस्पतालों के आसपास जलनिकासी व्यवस्था का सुचारु रहना बेहद जरूरी हो जाता है। BHU परिसर से सामने आई तस्वीरों ने भी इसी समस्या की ओर ध्यान खींचा है।

घरों और अस्पतालों में पहुंचा बारिश का पानी

वाराणसी में जलभराव का असर केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहा। कई स्थानों पर बारिश का पानी घरों और अस्पताल परिसरों तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। इससे लोगों को काफी परेशानी हुई।

लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में पानी जमा होने की समस्या और गंभीर हो सकती है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर जलनिकासी की व्यवस्था को लगातार सक्रिय रखना जरूरी है। साथ ही, लोगों से भी जलभराव वाले रास्तों पर अनावश्यक रूप से जाने से बचने की अपील की जा सकती है।

बारिश के कारण घरों में पानी पहुंचने से दैनिक जरूरतों से जुड़े काम भी प्रभावित होते हैं। वहीं, अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थानों पर जलभराव मरीजों, डॉक्टरों और कर्मचारियों के लिए अतिरिक्त चुनौती पैदा कर सकता है।

25 शहरों में बारिश, दिन में छाया अंधेरा

पूर्वी यूपी के अलावा प्रदेश के कई अन्य शहरों में भी मंगलवार को मौसम बदला रहा। लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या, झांसी, जौनपुर और प्रतापगढ़ समेत करीब 25 शहरों में रुक-रुककर तेज बारिश हुई। कई इलाकों में सुबह से ही बादल छाए रहे और बीच-बीच में बारिश का दौर चलता रहा।

घने बादलों के कारण दिन में भी कई स्थानों पर अंधेरे जैसा माहौल नजर आया। मौसम में बदलाव के कारण तापमान में भी राहत महसूस की गई, लेकिन लगातार बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया।

बारिश का यह दौर पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि लंबे समय तक होने वाली बारिश से निचले इलाकों में जलभराव की समस्या बढ़ सकती है। इसके अलावा, सड़क यातायात और स्थानीय परिवहन पर भी इसका असर पड़ सकता है।

सड़कें बनीं तालाब, कारें फंसीं

वाराणसी में कई प्रमुख और आंतरिक मार्गों पर बारिश का पानी जमा होने से सड़कें तालाब जैसी नजर आईं। पानी भरने के कारण कई कारें और दूसरे वाहन रास्ते में फंस गए। वाहन चालकों को पानी की गहराई का अंदाजा लगाने में भी परेशानी हुई।

जलभराव के कारण यातायात की रफ्तार धीमी पड़ गई। कई जगह लोग सुरक्षित रास्ते की तलाश करते नजर आए। लगातार बारिश के बीच सड़क पर जमा पानी से गुजरना दोपहिया वाहन चालकों के लिए भी चुनौतीपूर्ण रहा।

ऐसे मौसम में यातायात व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए भी चुनौती बन जाता है। इसलिए जलभराव वाले प्रमुख मार्गों पर निगरानी और जलनिकासी की व्यवस्था को प्राथमिकता देना जरूरी है।

मानसूनी बारिश ने बढ़ाई चुनौती

उत्तर प्रदेश में मानसून के दौरान बारिश का असर एक साथ कई क्षेत्रों में देखने को मिलता है। जहां बारिश से किसानों और जलस्रोतों को फायदा हो सकता है, वहीं शहरी क्षेत्रों में जलभराव एक बड़ी समस्या बन जाता है। खासकर उन इलाकों में जहां जलनिकासी व्यवस्था पर दबाव बढ़ जाता है।

वाराणसी जैसे बड़े शहर में बारिश के दौरान जलभराव का असर यातायात, बाजार, अस्पताल और आम लोगों की दिनचर्या पर पड़ता है। ऐसे में बारिश के दौरान प्रशासन और नगर निकाय की सक्रियता बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

इसके अलावा, लोगों के लिए भी जरूरी है कि वे मौसम की स्थिति को देखते हुए अपनी यात्रा की योजना बनाएं। जलभराव वाले रास्तों पर जाने से बचें और जरूरी होने पर ही घर से निकलें।

आगे भी सतर्क रहने की जरूरत

फिलहाल पूर्वी यूपी में बारिश का दौर जारी है। वाराणसी में करीब 15 घंटे की बारिश के बाद जलभराव ने शहर की व्यवस्थाओं की परीक्षा ले ली है। BHU में मरीज को कंधे पर लेकर पहुंचने की तस्वीरें और सड़कों पर फंसी कारें बताती हैं कि लगातार बारिश का असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ रहा है।

ऐसे में आने वाले घंटों में प्रशासन की ओर से जलनिकासी और यातायात व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना जरूरी होगा। वहीं, लोगों को भी मौसम की स्थिति को देखते हुए सावधानी बरतनी चाहिए।

कुल मिलाकर, पूर्वी यूपी में मानसूनी बारिश ने राहत के साथ चुनौतियां भी बढ़ा दी हैं। वाराणसी में जलभराव की स्थिति सबसे अधिक चर्चा में है, जबकि प्रदेश के अन्य शहरों में भी बारिश के कारण जनजीवन प्रभावित होने की तस्वीरें सामने आ रही हैं। अब निगाह इस बात पर है कि बारिश का दौर आगे कितना जारी रहता है और जलभराव वाले इलाकों में स्थिति कब तक सामान्य हो पाती है।

You may have missed