कानपुर के घाटमपुर में दो साल में ही जर्जर हुई सड़क, स्कूली बच्चों और राहगीरों की बढ़ी परेशानी
रिपोर्ट – शुभम साहू
कानपुर: घाटमपुर के मुगल हाईवे स्थित जीआरपीपी इंटर कॉलेज के बगल से बंगला गोपालपुर को जोड़ने वाली सड़क इन दिनों बदहाल स्थिति में पहुंच गई है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की ओर से करीब दो वर्ष पहले बनवाई गई इस सड़क पर जगह-जगह गड्ढे और टूटे हिस्से दिखाई दे रहे हैं। सड़क की खराब हालत के कारण स्थानीय ग्रामीणों के साथ-साथ स्कूली बच्चों और रोजाना आवागमन करने वाले राहगीरों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क का निर्माण हुए अभी अधिक समय नहीं बीता है, लेकिन इसके बावजूद सड़क कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो चुकी है। ऐसे में सड़क निर्माण की गुणवत्ता और विभागीय निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से सड़क का स्थलीय निरीक्षण कराकर जल्द मरम्मत कराने की मांग की है।
मुगल रोड से गोपालपुर तक जाती है सड़क
जानकारी के अनुसार, यह सड़क मुगल रोड से गोपालपुर रोड को जोड़ती है। मार्ग के किनारे जीआरपीपी इंटर कॉलेज भी स्थित है, जिसके कारण प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और शिक्षक इस रास्ते से गुजरते हैं।
इसके अलावा आसपास के गांवों के लोग भी अपने दैनिक कार्यों के लिए इसी सड़क का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में सड़क की खराब स्थिति का सीधा असर स्थानीय लोगों के आवागमन पर पड़ रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक, पहले सड़क ठीक होने के कारण लोगों को आने-जाने में ज्यादा परेशानी नहीं होती थी। हालांकि, अब सड़क पर कई स्थानों पर गड्ढे हो गए हैं और कुछ हिस्से टूट चुके हैं। इससे दोपहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी पड़ रही है।
निर्माण के करीब दो साल बाद सड़क की हालत खराब
स्थानीय ग्रामीणों का दावा है कि इस सड़क का निर्माण लोक निर्माण विभाग के माध्यम से करीब दो वर्ष पहले कराया गया था। इतने कम समय में सड़क के कई हिस्सों के खराब होने से निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
लोगों का कहना है कि किसी सड़क का निर्माण होने के बाद उसकी नियमित देखरेख और समय-समय पर निरीक्षण जरूरी है। यदि शुरुआती स्तर पर ही सड़क के टूटे हिस्सों की मरम्मत कर दी जाती तो स्थिति इतनी खराब नहीं होती।
हालांकि, सड़क खराब होने के वास्तविक कारणों का पता विभागीय जांच के बाद ही चल सकेगा। निर्माण में किसी प्रकार की कमी रही या सड़क पर अत्यधिक आवागमन अथवा अन्य कारणों से क्षति हुई, यह भी निरीक्षण के बाद स्पष्ट हो सकता है।
स्कूली बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी
सड़क के किनारे विद्यालय होने के कारण यहां से रोजाना बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं गुजरते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, सड़क पर बने गड्ढों के कारण बच्चों को आवागमन में परेशानी होती है।
विशेष रूप से पैदल चलने वाले विद्यार्थियों को सड़क के टूटे हिस्सों से होकर निकलना पड़ता है। वहीं, वाहनों की आवाजाही के दौरान गड्ढों से बचने के प्रयास में असुविधा और बढ़ जाती है।
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क की खराब स्थिति के कारण कई बार बच्चे और राहगीर गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं। हालांकि, इन घटनाओं की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग या प्रशासन की ओर से नहीं की गई है।
फिलहाल स्थानीय लोग चाहते हैं कि विद्यालय के आसपास की सड़क को प्राथमिकता के आधार पर ठीक कराया जाए, ताकि विद्यार्थियों और अन्य राहगीरों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिल सके।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ सड़क का वीडियो
सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर एक ग्रामीण ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया। वीडियो सामने आने के बाद सड़क की स्थिति चर्चा में आ गई। वीडियो में सड़क के टूटे हिस्से और जगह-जगह बने गड्ढे दिखाई देने का दावा किया गया है।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता और उसकी देखरेख को लेकर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सड़क का निर्माण लगभग दो वर्ष पहले हुआ था तो इतनी जल्दी सड़क का क्षतिग्रस्त होना जांच का विषय होना चाहिए।
हालांकि, वायरल वीडियो के आधार पर निर्माण की गुणवत्ता को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इसके लिए सड़क की तकनीकी जांच और संबंधित रिकॉर्ड की समीक्षा आवश्यक होगी।
पीडब्ल्यूडी से स्थलीय निरीक्षण की मांग
ग्रामीणों ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से सड़क का स्थलीय निरीक्षण कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि अधिकारी मौके पर पहुंचकर सड़क की वास्तविक स्थिति देखें और जरूरत के अनुसार मरम्मत कार्य शुरू कराएं।
ग्रामीणों के मुताबिक, सड़क की मरम्मत में देरी होने पर समस्या और बढ़ सकती है। बारिश के दौरान गड्ढों में पानी भरने से सड़क की स्थिति और खराब होने की आशंका रहती है। इसके अलावा, पानी भरे गड्ढों की गहराई का अनुमान नहीं लग पाने से वाहन चालकों को भी परेशानी हो सकती है।
इसलिए स्थानीय लोगों ने मांग की है कि संबंधित विभाग जल्द से जल्द सड़क की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करे।
निर्माण की गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल
सड़क के दो वर्ष के भीतर खराब होने को लेकर सबसे बड़ा सवाल निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी को लेकर है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण के दौरान इस्तेमाल की गई सामग्री और कार्य की गुणवत्ता की जांच की जानी चाहिए थी।
साथ ही, निर्माण पूरा होने के बाद सड़क की स्थिति की निगरानी भी आवश्यक थी। यदि सड़क निर्धारित मानकों के अनुरूप बनाई गई थी तो कम समय में इसके क्षतिग्रस्त होने का कारण भी सामने आना चाहिए।
हालांकि, इन सभी सवालों का जवाब संबंधित विभाग की तकनीकी जांच के बाद ही मिल सकेगा। विभागीय अधिकारी सड़क का निरीक्षण करने के बाद ही यह बता सकते हैं कि सड़क किस वजह से खराब हुई और मरम्मत के लिए क्या कदम उठाए जाने हैं।
ग्रामीणों में नाराजगी, जल्द कार्रवाई की मांग
सड़क की खराब स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क केवल आवागमन का माध्यम नहीं है, बल्कि आसपास के गांवों और विद्यालय को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी भी है।
ऐसे में इसकी बदहाली का असर बड़ी संख्या में लोगों पर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन और पीडब्ल्यूडी से समस्या का जल्द समाधान कराने की अपील की है।
लोगों का कहना है कि सड़क की मरम्मत के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि भविष्य में सड़क लंबे समय तक बेहतर स्थिति में बनी रहे। इसके लिए निर्माण और मरम्मत कार्य में गुणवत्ता मानकों का पालन जरूरी है।
मरम्मत के साथ गुणवत्ता जांच भी जरूरी
स्थानीय लोगों की मांग केवल सड़क की मरम्मत तक सीमित नहीं है। ग्रामीण चाहते हैं कि सड़क की खराब स्थिति की वजह भी सामने आए। यदि सड़क निर्माण में कोई तकनीकी कमी पाई जाती है तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
वहीं, यदि सड़क किसी अन्य कारण से क्षतिग्रस्त हुई है तो भविष्य में ऐसी समस्या न हो, इसके लिए आवश्यक तकनीकी उपाय किए जाने चाहिए।
इससे न केवल वर्तमान समस्या का समाधान होगा, बल्कि सड़क की उपयोगिता और टिकाऊपन भी बेहतर किया जा सकेगा।
अब विभागीय कार्रवाई का इंतजार
फिलहाल सड़क की बदहाल स्थिति का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद स्थानीय लोगों की नजर पीडब्ल्यूडी विभाग की कार्रवाई पर है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि अधिकारी मामले का संज्ञान लेकर मौके का निरीक्षण करेंगे और आवश्यकतानुसार सड़क की मरम्मत कराएंगे।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सड़क के किनारे विद्यालय होने के कारण बच्चों की सुविधा और सुरक्षित आवागमन को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही, सड़क की तकनीकी स्थिति की जांच कर उचित समाधान निकाला जाए।
कुल मिलाकर, घाटमपुर में करीब दो वर्ष पहले बनी सड़क का कई जगहों पर क्षतिग्रस्त होना स्थानीय लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। सड़क पर बने गड्ढों से जहां राहगीरों को दिक्कत हो रही है, वहीं स्कूली बच्चों के आवागमन को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। अब ग्रामीणों की निगाहें पीडब्ल्यूडी विभाग पर हैं कि वह सड़क का निरीक्षण कर कितनी जल्दी मरम्मत शुरू कराता है और निर्माण की गुणवत्ता से जुड़े सवालों पर क्या कदम उठाता है।

