अयोध्या के मछली भोज पर सियासी घमासान, अजय राय ने CM योगी पर किया पलटवार
Digital UP News Desk
लखनऊ: अयोध्या में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के स्वागत कार्यक्रम के दौरान आयोजित मछली भोज को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच इस मुद्दे को लेकर तीखी राजनीतिक बहस देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा रायबरेली में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पर निशाना साधे जाने के बाद अजय राय ने भी पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री से उनके आरोपों के समर्थन में तस्वीर या प्रमाण पेश करने की चुनौती दी है।
अजय राय ने कहा कि मुख्यमंत्री उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को साबित करने के लिए कोई तस्वीर सामने लाएं। उन्होंने कहा कि यदि उनके पास ऐसी कोई तस्वीर है, जिसमें वह मछली भोज करते हुए दिखाई दे रहे हैं, तो वह तत्काल अपने पद से इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। वहीं, उन्होंने यह भी कहा कि यदि ऐसी कोई तस्वीर नहीं है तो बिना प्रमाण के आरोप लगाने से बचना चाहिए।
निषाद समाज के कार्यक्रम में शामिल हुए थे अजय राय
अजय राय ने अपने बयान में कहा कि उन्हें अयोध्या में निषाद समाज की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था। उनके मुताबिक, कार्यक्रम में मछली तैयार की जा रही थी या नहीं, यह आयोजन करने वाले लोगों का विषय है। उन्होंने कहा कि वह आमंत्रण पर कार्यक्रम में पहुंचे, वहां मौजूद रहे और इसके बाद वापस लौट आए।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने मछली पालन और मछली खाने को निषाद समाज की पारंपरिक जीवनशैली से जोड़ते हुए कहा कि इस समुदाय की अपनी सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराएं रही हैं। उन्होंने धार्मिक और ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए निषादराज का उल्लेख किया और कहा कि निषाद समाज की परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए।
अजय राय ने आरोप लगाया कि भाजपा निषाद समाज की परंपराओं को लेकर राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि समाज इस तरह की टिप्पणियों को याद रखेगा। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से एक बार फिर कहा कि यदि उनके पास उनके खिलाफ कोई प्रमाण है तो उसे सार्वजनिक किया जाए।
CM योगी ने अजय राय पर साधा निशाना
दरअसल, रायबरेली में वीर सेनानायक राणा बेनी माधव बख्श सिंह की जयंती के अवसर पर आयोजित भाव समर्पण कार्यक्रम को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संबोधित किया। इसी दौरान उन्होंने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के अयोध्या दौरे और मछली भोज को लेकर सवाल उठाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का व्यवहार जनता के सामने है। उन्होंने आरोप लगाया कि अजय राय हनुमानगढ़ी में पूजा-अर्चना करने जाते हैं और इसके बाद बाहर मछली की दावत में शामिल होते हैं। मुख्यमंत्री ने इसे दोहरे व्यवहार से जोड़ते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा।
योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कांग्रेस की राजनीतिक शैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक तरफ धार्मिक स्थलों पर आस्था प्रदर्शित की जाती है, जबकि दूसरी तरफ ऐसे कार्यक्रमों में शामिल हुआ जाता है, जिसे लेकर विवाद खड़ा हो जाता है। मुख्यमंत्री ने इस पूरे घटनाक्रम को कांग्रेस की कथित दोहरी राजनीति से जोड़कर पेश किया।
अजय राय ने मांगा प्रमाण
मुख्यमंत्री के बयान के बाद अजय राय ने सीधे तौर पर उनसे प्रमाण की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि उनके पास ऐसी कोई तस्वीर मौजूद है, तो उसे जारी किया जाना चाहिए। अजय राय ने दावा किया कि वह तस्वीर सामने आने पर अपने पद से इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री पर बिना प्रमाण के आरोप लगाने का आरोप भी लगाया। अजय राय ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में किसी व्यक्ति के खिलाफ टिप्पणी करते समय तथ्यों और प्रमाणों का ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि निषाद समाज के कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी को राजनीतिक विवाद का विषय बनाना उचित नहीं है।
अजय राय ने कहा कि निषाद समाज में मछली पालन और मछली पकड़ने की परंपरा लंबे समय से रही है। उनके अनुसार, इसे समुदाय की जीवनशैली और सामाजिक परंपरा के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। इसलिए इस मुद्दे पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से बचने की जरूरत है।
धार्मिक आस्था और राजनीतिक बयानबाजी पर बहस
अयोध्या भगवान राम की नगरी होने के कारण धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण स्थान रखती है। ऐसे में यहां किसी राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान होने वाली गतिविधियां आसानी से राजनीतिक चर्चा का विषय बन जाती हैं। मौजूदा विवाद भी इसी वजह से प्रदेश की राजनीति में तेजी से चर्चा में आया है।
एक ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अजय राय के अयोध्या दौरे और मछली भोज को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठाए हैं। वहीं, दूसरी ओर अजय राय ने इसे निषाद समाज की परंपरा से जोड़ते हुए मुख्यमंत्री से प्रमाण मांग लिया है। इस तरह मामला अब केवल एक भोज तक सीमित न रहकर राजनीतिक और सामाजिक विमर्श का हिस्सा बन गया है।
हालांकि, इस पूरे विवाद में दोनों पक्षों के बयानों के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप प्रमुख रूप से सामने आए हैं। ऐसे में जनता के बीच भी इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
माफिया और कानून-व्यवस्था को लेकर भी CM का हमला
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कांग्रेस पर केवल मछली भोज को लेकर ही निशाना नहीं साधा। उन्होंने प्रदेश में पुराने दौर की कानून-व्यवस्था और माफिया से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र किया।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती राजनीतिक दौर में अपराध और माफिया तत्वों का प्रभाव बढ़ गया था। उन्होंने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के परिवार से जुड़े एक पुराने आपराधिक मामले का भी उल्लेख किया और आरोप लगाया कि उस समय अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि परिस्थितियों में बदलाव तब आया, जब सरकार ने कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कड़े कदम उठाए। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार ने प्रदेश में माफिया और अपराध के प्रभाव को कम करने के लिए लगातार कार्रवाई की है।
दूसरी ओर, अजय राय ने मुख्यमंत्री की टिप्पणियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि राजनीतिक विरोध के लिए व्यक्तिगत आरोपों का सहारा नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों के संबंध में प्रमाण सार्वजनिक करने की मांग दोहराई।
विवाद के राजनीतिक मायने
अयोध्या में मछली भोज को लेकर शुरू हुआ विवाद अब भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी का नया मुद्दा बन गया है। एक तरफ भाजपा इसे कांग्रेस के कथित दोहरे राजनीतिक व्यवहार से जोड़ रही है, जबकि कांग्रेस इसे निषाद समाज की परंपरा और सामाजिक जीवन से जोड़कर भाजपा पर राजनीति करने का आरोप लगा रही है।
विशेष रूप से उत्तर प्रदेश की राजनीति में धार्मिक और सामाजिक मुद्दों का प्रभाव काफी व्यापक रहा है। इसलिए अयोध्या से जुड़े किसी भी राजनीतिक घटनाक्रम पर दोनों प्रमुख दलों की प्रतिक्रिया स्वाभाविक रूप से चर्चा का विषय बनती है।
फिलहाल, अजय राय की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दी गई प्रमाण पेश करने की चुनौती और मुख्यमंत्री की ओर से कांग्रेस पर लगाए गए आरोपों के बीच राजनीतिक बहस जारी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों दलों की ओर से और बयान सामने आने की संभावना है।
कुल मिलाकर, अयोध्या का मछली भोज अब राजनीतिक बयानबाजी का केंद्र बन गया है। हालांकि, विवाद के बीच दोनों पक्ष अपने-अपने राजनीतिक और सामाजिक तर्क सामने रख रहे हैं। ऐसे में इस पूरे घटनाक्रम का असर उत्तर प्रदेश की आगामी राजनीतिक बहस पर कितना पड़ता है, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।

