अमरोहा में खुले पानी के टैंक में गिरने से दो साल के मासूम की मौत – जानिए कहां?

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रिपोर्ट – इकबाल अंसारी 

अमरोहा: उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले के गजरौला थाना क्षेत्र में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। मोहल्ला पश्चिमी सुल्तान नगर में खेलते समय दो साल का मासूम खुले पानी के टैंक में गिर गया। हादसे में मासूम की मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया, वहीं आसपास के लोगों में भी खुले टैंक को लेकर नाराजगी देखने को मिली।

मृतक बच्चे की पहचान मोहम्मद शहजान पुत्र शाहरुख के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार, शहजान घर के बाहर खेल रहा था। इसी दौरान खेलते-खेलते वह पास के एक खाली प्लॉट में पहुंच गया। प्लॉट में पानी का एक टैंक बना हुआ था, जो खुला पड़ा था। बारिश के कारण टैंक में पानी भरा हुआ था।

खेलते-खेलते खुले टैंक तक पहुंचा मासूम

बताया गया कि घटना के समय परिवार के लोग अपने काम में व्यस्त थे। शहजान घर के बाहर अन्य बच्चों की तरह खेल रहा था। कुछ देर बाद जब वह दिखाई नहीं दिया तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। पहले परिवार ने आसपास के इलाके में बच्चे को खोजा, लेकिन उसका पता नहीं चल सका।

काफी तलाश के बाद परिजनों की नजर पानी से भरे टैंक पर गई। वहां मासूम के मिलने के बाद परिवार के लोग उसे तत्काल बाहर निकालकर अस्पताल ले गए। परिजनों को उम्मीद थी कि समय रहते इलाज मिलने पर बच्चे की जान बच सकती है। हालांकि, निजी अस्पताल में चिकित्सकों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया।

बच्चे की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया। माता-पिता और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मोहल्ले के लोग भी घटना से दुखी नजर आए और परिवार को ढांढस बंधाने के लिए उनके घर पहुंचे।

खुले टैंक को लेकर परिजनों ने उठाए सवाल

मृतक बच्चे के परिजनों का आरोप है कि खाली प्लॉट में बना पानी का टैंक काफी समय से खुला पड़ा था। उनका कहना है कि टैंक पर ढक्कन लगाए जाने को लेकर पहले भी प्लॉट मालिक से आग्रह किया गया था, लेकिन कथित तौर पर इस ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

परिजनों का कहना है कि यदि टैंक को सुरक्षित तरीके से ढक दिया गया होता तो यह हादसा टल सकता था। हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने भी खुले पानी के टैंक और ऐसे स्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, बरसात के मौसम में खुले गड्ढों, टैंकों और जलभराव वाले स्थानों के आसपास विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। खासकर छोटे बच्चों के लिए ऐसे स्थान जोखिमपूर्ण हो सकते हैं। इसलिए लोगों ने मांग की है कि खाली प्लॉटों और खुले जलस्रोतों की जांच कर उन्हें सुरक्षित कराया जाए।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

दो साल के मासूम की मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। जिस बच्चे की किलकारियों से घर का माहौल खुशनुमा रहता था, उसकी अचानक मौत से परिवार में मातम पसर गया। घटना के बाद मोहल्ले में भी शोक का माहौल है।

मृतक के दादा शकील और पिता शाहरुख ने घटना को लेकर अपनी पीड़ा व्यक्त की। परिजनों का कहना है कि बच्चे की सुरक्षा को लेकर लापरवाही नहीं होनी चाहिए थी। उनका आरोप है कि अगर खुले टैंक को समय रहते ढक दिया जाता तो शायद यह हादसा नहीं होता।

परिवार की ओर से उठाए गए इन सवालों के बाद अब स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि आबादी वाले इलाकों में खुले टैंक और गड्ढों को लेकर किस तरह की सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।

बारिश के मौसम में बढ़ जाती है सावधानी की जरूरत

बरसात के दौरान खाली प्लॉटों, निर्माणाधीन स्थानों और जलभराव वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी है। बारिश के पानी के कारण कई बार गड्ढे और टैंक दिखाई नहीं देते। ऐसे में छोटे बच्चों के लिए खतरा और बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों की सामान्य सलाह है कि घरों के आसपास खुले टैंक, कुएं, गड्ढे या जलभराव वाले स्थानों को सुरक्षित तरीके से ढका जाए। इसके अलावा बच्चों को ऐसे स्थानों के पास अकेले खेलने से रोकना भी जरूरी है।

हालांकि, किसी हादसे के बाद केवल परिवार की जिम्मेदारी पर सवाल उठाना उचित नहीं है। सार्वजनिक या खाली स्थानों पर बने खुले टैंक और अन्य संभावित जोखिम वाले स्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करना संबंधित जिम्मेदार लोगों की भी जिम्मेदारी बनती है।

स्थानीय लोगों में चिंता

हादसे के बाद सुल्तान नगर के लोगों में भी चिंता का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए समय रहते सावधानी बरतना जरूरी है। खासकर उन स्थानों की पहचान की जानी चाहिए, जहां खुले टैंक, गहरे गड्ढे या अन्य जोखिम मौजूद हैं।

लोगों का कहना है कि यदि किसी खाली प्लॉट में पानी का टैंक बना है तो उसके आसपास सुरक्षा घेरा होना चाहिए और टैंक को मजबूत ढक्कन से ढका जाना चाहिए। इसके साथ ही बच्चों और अभिभावकों को भी ऐसे स्थानों के प्रति जागरूक रहना चाहिए।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि घरों और आबादी के आसपास मौजूद खुले जलस्रोतों को सुरक्षित बनाने के लिए कितनी गंभीरता से कदम उठाए जा रहे हैं। दो साल के मासूम की मौत परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, लेकिन ऐसी घटनाओं से सबक लेकर भविष्य में इस तरह के हादसों को रोकने के प्रयास किए जा सकते हैं।

गजरौला के सुल्तान नगर में हुई इस घटना के बाद परिवार अपने मासूम को खोने के गम में है। वहीं स्थानीय लोग खुले टैंक को लेकर अपनी चिंता जाहिर कर रहे हैं। अब जरूरत है कि आबादी वाले क्षेत्रों में खुले टैंकों और अन्य संभावित जोखिम वाले स्थानों की सुरक्षा पर ध्यान दिया जाए, ताकि किसी और परिवार को ऐसी पीड़ा से न गुजरना पड़े।

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