इटावा में रहस्यमयी बीमारी का कहर, दो बच्चों की मौत; 12 बीमार, जानिए पूरा मामला
रिपोर्ट- रोहित सिंह चौहान
इटावा: उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के चकरनगर विकासखंड क्षेत्र में एक गांव में अचानक फैली बीमारी ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। गढ़ाकास्दा गांव में बीते दो दिनों के दौरान दो बच्चों की मौत हो गई, जबकि करीब 12 बच्चे बीमार बताए जा रहे हैं। इनमें एक बच्चे की हालत गंभीर होने पर उसे इटावा के निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है। वहीं, अन्य बीमार बच्चों का इटावा और औरैया के अलग-अलग निजी अस्पतालों में उपचार चल रहा है।
घटना की जानकारी सामने आने के बाद गांव में हड़कंप की स्थिति बन गई। ग्रामीणों ने गांव और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के आसपास साफ-सफाई की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए बीमारी के फैलने के संभावित कारणों की जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में जगह-जगह गंदगी है और आसपास स्थित एक मुर्गी फार्म से भी दुर्गंध आती है। हालांकि, बीमारी वास्तव में किस कारण से फैली है, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
24 घंटे के भीतर दो बच्चों की मौत
जानकारी के मुताबिक, गढ़ाकास्दा गांव में महेंद्र दोहरे के करीब 14 वर्षीय बेटे सत्येंद्र की गुरुवार रात तबीयत बिगड़ गई। बुखार के बाद उसकी हालत गंभीर हुई और उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके कुछ समय बाद गांव के ही मुकेश कठेरिया की 13 वर्षीय बेटी गुनगुन भी बीमार पड़ गई।
परिजन गुनगुन की हालत बिगड़ने पर उसे उपचार के लिए औरैया के बाबरपुर स्थित निजी अस्पताल ले जाने के लिए निकले। हालांकि, रास्ते में बारिश के कारण परेशानी हुई और बच्ची की मौत हो गई। महज 24 घंटे के भीतर दो बच्चों की मौत की खबर से पूरे गांव में चिंता का माहौल बन गया।
इसके बाद गांव में कई और बच्चों के बीमार होने की सूचना सामने आई। कुछ बच्चों को परिजनों ने इटावा और औरैया के निजी अस्पतालों में भर्ती कराया, जबकि कुछ बच्चों का उपचार गांव में ही कराया जा रहा है।
एक बच्चे की हालत गंभीर, आईसीयू में भर्ती
बीमार बच्चों में आशिक पुत्र अरविंद की हालत गंभीर बताई जा रही है। उसे इटावा के एक निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है। चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार चल रहा है।
इसके अलावा कई अन्य बच्चों को औरैया के बाबरपुर और अजीतमल क्षेत्र के निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। परिजनों के अनुसार, कुछ बच्चों को तेज बुखार और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं। हालांकि, इन लक्षणों के पीछे कौन-सी बीमारी जिम्मेदार है, इसकी स्पष्ट जानकारी स्वास्थ्य विभाग की जांच के बाद ही सामने आ सकेगी।
गांव में कई बच्चे बीमार
ग्रामीणों के अनुसार, गढ़ाकास्दा गांव में कई परिवारों के बच्चे अचानक बीमार हुए हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक बीमार बच्चों में कुनाल पुत्र मुकेश कठेरिया, मीनाक्षी पुत्री मुकेश, प्रिंसी पुत्री अरविंद, शिवानी पुत्री अरविंद, काजल पुत्री अरविंद, आशिक पुत्र अरविंद, आर्यन पुत्र श्रीकृष्ण दोहरे, राघव पुत्र प्रेम सिंह दोहरे, अनामिका पुत्री कुलदीप, आशिक पुत्र अभय कुमार, शिप्रा पुत्री राजकुमार और प्रिया पुत्री राजकुमार शामिल हैं।
इनमें से कुछ बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि कुछ बच्चे गांव में ही उपचार और निगरानी में हैं। पड़ोसी गांव पुरा मल्लाहन में भी दो बच्चों के बीमार होने की जानकारी सामने आई है।
ग्रामीणों ने सफाई व्यवस्था पर उठाए सवाल
घटना के बाद ग्रामीणों ने गांव में सफाई व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों केशवराम, राम प्रकाश, शिव मंगल और मिथलेश कुमारी समेत अन्य लोगों का कहना है कि गांव में कई स्थानों पर गंदगी जमा रहती है। उनका आरोप है कि सफाई कर्मियों की नियमित मौजूदगी नहीं रहती और कभी-कभार सफाई होने पर भी पूरे गांव को साफ नहीं किया जाता।
ग्रामीणों के मुताबिक, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के आसपास भी साफ-सफाई की स्थिति बेहतर नहीं है। इसके अलावा गांव के नजदीक एक मुर्गी फार्म संचालित हो रहा है, जहां से दुर्गंध आने की बात कही जा रही है। ग्रामीणों को आशंका है कि गंदगी और आसपास की परिस्थितियों के कारण बीमारी फैलने में भूमिका हो सकती है।
हालांकि, यह केवल ग्रामीणों की आशंका है। बीमारी का वास्तविक कारण क्या है, इसका निर्धारण स्वास्थ्य विभाग की जांच और चिकित्सकीय रिपोर्ट के आधार पर ही किया जा सकेगा।
स्वास्थ्य विभाग ने गांव में लगाया हेल्थ कैंप
दो बच्चों की मौत और कई बच्चों के बीमार होने की सूचना मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया है। विभाग की टीम ने गांव में हेल्थ कैंप लगाकर जांच-पड़ताल शुरू कर दी है। कैंप में ग्रामीणों के स्वास्थ्य की जांच की जा रही है और बीमार बच्चों की स्थिति पर विशेष नजर रखी जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में बीमारी के संभावित कारणों की जानकारी जुटाने के साथ-साथ लोगों को स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतने के लिए भी जागरूक कर रही है। इसके अलावा बीमार बच्चों के उपचार और उनकी स्थिति की निगरानी की जा रही है।
बीमारी के कारण की जांच जरूरी
फिलहाल गांव में बीमारी के फैलने का सटीक कारण स्पष्ट नहीं है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती बीमारी की वजह का पता लगाना और संक्रमण या अन्य स्वास्थ्य जोखिम को आगे फैलने से रोकना है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अचानक कई लोगों के बीमार होने की स्थिति में पानी, भोजन, स्वच्छता, मच्छरों या अन्य पर्यावरणीय कारणों समेत विभिन्न संभावनाओं की जांच की जाती है। इसलिए किसी एक कारण को जिम्मेदार मानने से पहले चिकित्सकीय जांच और संबंधित नमूनों की रिपोर्ट का इंतजार करना जरूरी है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से गांव में व्यापक साफ-सफाई कराने, स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने और बीमारी के कारणों की जल्द जांच कराने की मांग की है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

