योगी आदित्यनाथ को लेकर कथित भ्रामक खबर पर हिंदू युवा वाहिनी में आक्रोश, थानों में दी तहरीर

59

रिपोर्ट- धर्मेंद्र पाण्डेय

वाराणसी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और हिंदू युवा वाहिनी को लेकर कथित तौर पर भ्रामक एवं तथ्यहीन खबरें प्रसारित किए जाने के आरोप को लेकर वाराणसी में हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखने को मिली। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कुछ खबरों में ऐसे दावे किए जा रहे हैं, जिनमें पर्याप्त तथ्यों की पुष्टि नहीं की गई है। इसी मामले को लेकर संगठन के कार्यकर्ताओं ने वाराणसी के चेतगंज और सिगरा थाने में तहरीर देकर जांच और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

कार्यकर्ताओं का कहना है कि बीते दिनों गोरखपुर निवासी कमलेश चौहान की हत्या से जुड़े मामले को लेकर अभिषेक उपाध्याय द्वारा लगातार कुछ खबरें प्रसारित की जा रही हैं। संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार, इन खबरों में किए गए दावों की तथ्यात्मक पुष्टि आवश्यक है। उनका आरोप है कि खबरों के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और हिंदू युवा वाहिनी की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

चेतगंज और सिगरा थाने में दी गई तहरीर

मामले को लेकर हिंदू युवा वाहिनी के वाराणसी मंडल प्रभारी भारतेंदु तिवारी के नेतृत्व में कार्यकर्ता चेतगंज और सिगरा थाने पहुंचे। यहां उन्होंने पुलिस अधिकारियों को तहरीर सौंपते हुए पूरे मामले की जांच कराने की मांग की। कार्यकर्ताओं ने पुलिस से आग्रह किया कि संबंधित खबरों में किए गए दावों, उनके स्रोत और प्रसारण की परिस्थितियों की निष्पक्षता से जांच की जाए।

तहरीर में कार्यकर्ताओं की ओर से आरोपों की जांच कर तथ्य सामने लाने और यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या कानून का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की गई है। हालांकि, पूरे मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

खबर प्रसारित करने से पहले तथ्य जांचने की मांग

हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने कहा कि किसी भी संवेदनशील घटना से जुड़ी जानकारी जनता तक पहुंचाने से पहले उसके तथ्यों की पुष्टि करना आवश्यक है। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति, संगठन या सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति से संबंधित खबर यदि पर्याप्त सत्यापन के बिना प्रसारित होती है तो उससे संबंधित पक्ष की प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है।

कार्यकर्ताओं ने कहा कि पत्रकारिता और सोशल मीडिया के माध्यम से सूचनाओं के प्रसार में जिम्मेदारी बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए किसी भी घटना से जुड़े दावे को प्रकाशित या प्रसारित करने से पहले उपलब्ध तथ्यों, आधिकारिक जानकारी और संबंधित पक्ष के बयान को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और संगठन का नाम जुड़ने पर जताई नाराजगी

कार्यकर्ताओं की नाराजगी का एक प्रमुख कारण कथित खबरों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और हिंदू युवा वाहिनी का नाम जोड़े जाने को बताया गया है। संगठन के पदाधिकारियों का आरोप है कि जिस तरीके से मामले को प्रस्तुत किया जा रहा है, उससे लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।

उन्होंने पुलिस प्रशासन से मांग की कि मामले के प्रत्येक पहलू की जांच की जाए। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया जाए कि संबंधित खबरों में लगाए गए आरोप किस आधार पर किए गए और उनके समर्थन में क्या तथ्य उपलब्ध हैं।

निष्पक्ष जांच की मांग

हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ पूर्वाग्रह के आधार पर कार्रवाई कराना नहीं, बल्कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराना है। उनका कहना है कि यदि किसी खबर में तथ्यात्मक त्रुटि है या किसी व्यक्ति अथवा संगठन के बारे में गलत जानकारी प्रसारित की गई है तो उसके संबंध में कानून के अनुसार उचित कदम उठाया जाना चाहिए।

इसके साथ ही कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि किसी घटना की वास्तविक स्थिति सामने आने से पहले सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों पर अपुष्ट दावों के प्रसार से बचना चाहिए। इससे न केवल संबंधित पक्ष प्रभावित हो सकता है, बल्कि आम लोगों के बीच भी गलतफहमी पैदा होने की संभावना रहती है।

पुलिस जांच के बाद सामने आएगी स्थिति

पुलिस की ओर से तहरीर प्राप्त होने के बाद मामले की जांच किए जाने की बात कही गई है। ऐसे में अब जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि संबंधित खबरों में लगाए गए आरोपों का आधार क्या है और क्या किसी प्रकार के नियम या कानून का उल्लंघन हुआ है।

फिलहाल, पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामले में लगाए गए आरोपों में कितनी तथ्यात्मकता है। वहीं, हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष और प्रभावी जांच की उम्मीद जताई है।

सोशल मीडिया पर खबरों की पुष्टि जरूरी

आज के दौर में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसी भी घटना की जानकारी बहुत तेजी से लोगों तक पहुंचती है। ऐसे में खबरों की विश्वसनीयता और तथ्य-जांच का महत्व और बढ़ जाता है। विशेष रूप से किसी हत्या या अन्य संवेदनशील घटना से जुड़े मामलों में आधिकारिक पुष्टि के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं माना जाता।

इसी क्रम में कार्यकर्ताओं ने भी अपील की कि किसी भी खबर को आगे साझा करने से पहले उसके स्रोत और तथ्यों की जांच की जानी चाहिए। उनका कहना है कि सही सूचना का प्रसार समाज में भरोसा बनाए रखने के लिए जरूरी है।

जांच के परिणाम का इंतजार

वाराणसी में तहरीर दिए जाने के बाद अब पूरे मामले में पुलिस की जांच पर नजर है। हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने संबंधित खबरों की सत्यता की जांच कर दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

वहीं, मामले में जिन लोगों या पक्षों पर आरोप लगाए गए हैं, उनका पक्ष और पुलिस जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी। फिलहाल, यह मामला कथित भ्रामक खबरों के प्रसारण और उनके खिलाफ की गई शिकायत तक सीमित है। पुलिस की जांच के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।