मुरादाबाद में तेंदुआ रेस्क्यू अभियान तेज, 21 ट्रैपिंग केज से निगरानी और ग्रामीणों को जागरूकता

af8a4e13-d59e-4438-b539-3672f62d0fc8

रिपोर्ट – मोहम्मद अरशद 

मुरादाबाद: ठाकुरद्वारा तहसील क्षेत्र में मानव-तेंदुआ संघर्ष की स्थिति को नियंत्रित करने और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वन विभाग का अभियान लगातार जारी है। इसी क्रम में ग्राम सरकड़ा परम में एक वयस्क नर तेंदुए को ट्रैप केज के माध्यम से सुरक्षित रूप से रेस्क्यू किया गया। वहीं, तेंदुआ संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अब तक कुल 21 ट्रैपिंग केज लगाए जा चुके हैं।

प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी डॉ. विनय कुमार सिंह ने बताया कि जिलाधिकारी डॉ. राजेन्द्र पैंसिया के निर्देश पर ठाकुरद्वारा क्षेत्र में वन विभाग की टीमें लगातार सक्रिय हैं। तेंदुए की गतिविधियों वाले गांवों में निगरानी बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीणों को सुरक्षा उपायों की जानकारी भी दी जा रही है।

वन विभाग के अनुसार, सरकड़ा परम में रेस्क्यू किए गए वयस्क नर तेंदुए को ट्रैप केज के जरिए सुरक्षित तरीके से पकड़ा गया। इसके अलावा संवेदनशील क्षेत्रों में रेस्क्यू व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए नए ट्रैप केज भी स्थापित किए गए हैं।

ठाकुरद्वारा क्षेत्र में 21 ट्रैपिंग केज लगाए गए

मानव-तेंदुआ संघर्ष की आशंका वाले क्षेत्रों में वन विभाग ने निगरानी और रेस्क्यू व्यवस्था को मजबूत किया है। विभाग की ओर से अब तक ठाकुरद्वारा तहसील के संवेदनशील क्षेत्रों में 21 ट्रैपिंग केज लगाए जा चुके हैं।

इसके अलावा लौंगी खुर्द, कोठा महदूद और शिव नगर में नए ट्रैप केज लगाए गए हैं। इन स्थानों पर तेंदुए की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।

वन विभाग का कहना है कि ट्रैपिंग केज लगाने का उद्देश्य तेंदुए की गतिविधियों वाले क्षेत्रों में जरूरत पड़ने पर सुरक्षित रेस्क्यू कार्रवाई को आसान बनाना है। इसके लिए रेस्क्यू टीमें लगातार क्षेत्र में निगरानी कर रही हैं।

ANIDER डिवाइस से बढ़ाई जा रही निगरानी

तेंदुओं की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने के लिए वन विभाग ने तकनीकी संसाधनों का भी इस्तेमाल शुरू किया है। लालापुर पीपलसाना और लालपुर गोसाई में खेत और आबादी के बीच दो स्थानों पर ANIDER डिवाइस लगाई गई हैं।

विभाग के अनुसार, किसी जानवर के डिवाइस के पास पहुंचने पर इससे ध्वनि उत्पन्न होती है। इससे संबंधित क्षेत्र में निगरानी और सतर्कता बढ़ाने में सहायता मिलती है।

इस व्यवस्था के माध्यम से वन विभाग को संवेदनशील क्षेत्रों में गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिल रही है। साथ ही, ग्रामीणों को भी आसपास की परिस्थितियों को लेकर सतर्क किया जा रहा है।

ग्रामीणों को तेंदुए से बचाव के उपाय बताए

मानव-तेंदुआ संघर्ष को कम करने के लिए केवल रेस्क्यू अभियान ही नहीं, बल्कि ग्रामीणों में जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

इसी उद्देश्य से पीलीभीत टाइगर रिजर्व की ‘बाघ मित्र एक्सप्रेस’ टीम ने वन विभाग के साथ मिलकर विभिन्न गांवों में जागरूकता अभियान चलाया। टीम ने गक्खरपुर, काजीपुरा, चटकाली, कोठा महमूद, पांयदापुर और रायभुड़ समेत कई गांवों में पहुंचकर ग्रामीणों से संवाद किया।

इस दौरान ग्रामीणों को तेंदुए की मौजूदगी की स्थिति में बरती जाने वाली सावधानियों और सुरक्षा उपायों की जानकारी दी गई। ग्रामीणों से अपील की गई कि तेंदुए की गतिविधि दिखाई देने पर स्वयं उसके करीब जाने के बजाय तत्काल वन विभाग को सूचना दें।

तेंदुआ गतिविधियों वाले गांवों में नियमित गश्त

जिन गांवों से तेंदुआ दिखाई देने या उसकी गतिविधियों की सूचना मिल रही है, वहां वन विभाग की रेस्क्यू टीमों द्वारा नियमित गश्त की जा रही है।

टीमों द्वारा थर्मल स्कैनिंग के माध्यम से भी निगरानी की जा रही है। इसके जरिए रात के समय संवेदनशील क्षेत्रों में गतिविधियों पर नजर रखने में सहायता मिल रही है।

इसके अतिरिक्त वन विभाग के प्रचार-प्रसार वाहन के माध्यम से लाउडस्पीकर और जनसंपर्क अभियान चलाकर ग्रामीणों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीणों की भागीदारी और सतर्कता मानव-तेंदुआ संघर्ष को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

आकस्मिक स्थिति के लिए विशेष रेस्क्यू टीमें तैयार

डॉ. विनय कुमार सिंह ने बताया कि किसी भी आकस्मिक स्थिति में तत्काल कार्रवाई के लिए वन विभाग की ओर से विशेष रेस्क्यू टीमों का गठन किया गया है।

इन टीमों को संवेदनशील क्षेत्रों में सक्रिय रखा गया है, ताकि तेंदुए की गतिविधि की सूचना मिलने पर आवश्यक कार्रवाई जल्द शुरू की जा सके। इसके अलावा वाइल्डलाइफ एसओएस और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीमें भी संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त और निगरानी में सहयोग कर रही हैं।

इससे क्षेत्र में वन विभाग और सहयोगी संस्थाओं के बीच समन्वित निगरानी व्यवस्था विकसित की गई है। वहीं, वन संरक्षक एवं क्षेत्रीय निदेशक, मुरादाबाद ने भी ठाकुरद्वारा क्षेत्र में चल रहे अभियान का स्थलीय निरीक्षण किया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

रामगंगा का जलस्तर बढ़ने से बढ़ी चुनौती

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, रामगंगा नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण क्षेत्र के कई खेतों में पानी भर गया है। ऐसे में तेंदुओं के रात के समय सूखे और सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की संभावना बढ़ सकती है।

इसी को देखते हुए संवेदनशील गांवों में निगरानी और गश्त को और बढ़ा दिया गया है। वन विभाग की टीमें संभावित क्षेत्रों पर नजर रख रही हैं और ग्रामीणों को विशेष सतर्कता बरतने के लिए जागरूक कर रही हैं।

अधिकारियों का कहना है कि जलभराव जैसी परिस्थितियों में वन्यजीवों की गतिविधियों में बदलाव आ सकता है। इसलिए ग्रामीणों को भी सावधानी बरतने और तेंदुए की गतिविधि से जुड़ी किसी भी सूचना को तुरंत संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने की सलाह दी जा रही है।

ग्रामीणों से सहयोग की अपील

वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि तेंदुए की मौजूदगी की जानकारी मिलने पर घबराने के बजाय सतर्कता बरतें। तेंदुए को देखने की स्थिति में उसके पास जाने, उसे घेरने या स्वयं पकड़ने का प्रयास नहीं करना चाहिए।

इसके बजाय तत्काल वन विभाग की रेस्क्यू टीम को सूचना देना उचित होगा। अधिकारियों के मुताबिक, प्रशिक्षित टीम ही परिस्थिति का आकलन कर आवश्यक कार्रवाई करेगी।

वहीं, रात के समय संवेदनशील क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही से बचने और समूह में रहने जैसे सामान्य सुरक्षा उपायों को अपनाने के लिए भी ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है।

अभियान से मजबूत हो रही निगरानी व्यवस्था

मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा क्षेत्र में वन विभाग की ओर से चलाए जा रहे अभियान में रेस्क्यू, निगरानी, तकनीकी संसाधनों और जनजागरूकता को एक साथ जोड़ा गया है। सरकड़ा परम में वयस्क नर तेंदुए के सुरक्षित रेस्क्यू के बाद अब संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया गया है।

21 ट्रैपिंग केज, ANIDER डिवाइस, थर्मल स्कैनिंग, नियमित गश्त और जागरूकता अभियान के जरिए वन विभाग मानव-तेंदुआ संघर्ष को कम करने की दिशा में काम कर रहा है। साथ ही, जलस्तर बढ़ने के कारण पैदा हुई परिस्थितियों को देखते हुए ग्रामीण इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है।

प्रशासन और वन विभाग का लक्ष्य ग्रामीणों की सुरक्षा के साथ-साथ वन्यजीवों के सुरक्षित प्रबंधन को सुनिश्चित करना है। इसके लिए विभागीय टीमें लगातार क्षेत्र में सक्रिय रहेंगी और तेंदुए की गतिविधियों से संबंधित सूचनाओं के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।