फर्रुखाबाद में पुरानी पेंशन बहाली और टीईटी की अनिवार्यता खत्म करने की मांग
रिपोर्ट- हर्ष वर्मा
फर्रुखाबाद। पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने, सरकारी संस्थानों के निजीकरण पर रोक लगाने और शिक्षक भर्ती में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग को लेकर फर्रुखाबाद में अटेवा पेंशन बचाओ मंच एवं ऑल टीचर्स एंड एम्प्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन ने आवाज उठाई। संगठन के पदाधिकारियों और शिक्षक-कर्मचारियों ने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन भेजकर लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के समाधान की मांग की। संगठन ने कहा कि कर्मचारियों और शिक्षकों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सरकार को इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने की मांग
संगठन की ओर से दिए गए ज्ञापन में कहा गया कि वर्ष 2004 के बाद नियुक्त शिक्षक, कर्मचारी और अधिकारी नई पेंशन योजना (एनपीएस) के दायरे में आते हैं। संगठन का कहना है कि नई पेंशन व्यवस्था के कारण कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले आर्थिक लाभ को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पदाधिकारियों ने पुरानी पेंशन व्यवस्था को कर्मचारियों के हित में बताते हुए इसे दोबारा लागू करने की मांग की।
अटेवा पेंशन बचाओ मंच का कहना है कि सरकारी सेवा में अपना लंबा समय देने वाले कर्मचारियों के लिए सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए पेंशन व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिससे कर्मचारियों को भविष्य को लेकर भरोसा मिल सके। संगठन ने सरकार से मांग की कि नई पेंशन योजना की समीक्षा करते हुए पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।
एनपीएस को लेकर संगठन ने जताई चिंता
ज्ञापन में संगठन ने एनपीएस को लेकर भी अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। पदाधिकारियों का दावा है कि मौजूदा व्यवस्था में कर्मचारियों को अपेक्षित पेंशन सुरक्षा नहीं मिल पा रही है। इसके अलावा संगठन ने यह भी कहा कि पेंशन व्यवस्था को लेकर कर्मचारियों में लगातार चिंता बनी हुई है।
हालांकि, संगठन की ओर से उठाए गए इन मुद्दों का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करना और उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक स्थिरता उपलब्ध कराना बताया गया। पदाधिकारियों ने सरकार से कर्मचारियों और शिक्षकों के प्रतिनिधियों के साथ संवाद कर पेंशन व्यवस्था पर व्यापक विचार-विमर्श करने की मांग की।
20-25 वर्षों से पढ़ा रहे शिक्षकों ने उठाई टीईटी पर आपत्ति
ज्ञापन में शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी टीईटी की अनिवार्यता का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि कई शिक्षक पिछले 20 से 25 वर्षों से लगातार शिक्षण कार्य कर रहे हैं। ऐसे में लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो रही है।
संगठन का कहना है कि वर्षों से विद्यालयों में शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षकों के अनुभव और सेवा को भी महत्व दिया जाना चाहिए। पदाधिकारियों के मुताबिक, लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के सामने टीईटी से जुड़ी अनिवार्यता के कारण सेवा को लेकर असुरक्षा की भावना उत्पन्न हो सकती है। इसका असर केवल शिक्षक तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उनके परिवार पर भी पड़ सकता है।
इसीलिए संगठन ने मांग की कि लंबे समय से शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षकों की सेवा और अनुभव को ध्यान में रखते हुए टीईटी की अनिवार्यता पर पुनर्विचार किया जाए। साथ ही, शिक्षकों की समस्याओं का समाधान बातचीत और व्यावहारिक नीति के माध्यम से किया जाए।
सरकारी संस्थानों के निजीकरण पर रोक की मांग
अटेवा और ऑल टीचर्स एंड एम्प्लाइज वेलफेयर एसोसिएशन ने सरकारी संस्थानों के निजीकरण को लेकर भी चिंता जताई। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि शिक्षा और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी सेवाओं से जुड़े संस्थानों का निजीकरण आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल सकता है।
संगठन का कहना है कि शिक्षा जैसी बुनियादी सेवा तक सभी वर्गों की पहुंच बनी रहनी चाहिए। इसलिए सरकारी संस्थानों को मजबूत करने की दिशा में काम किया जाना जरूरी है। पदाधिकारियों ने सरकार से निजीकरण की नीतियों की समीक्षा करने और आवश्यक सरकारी सेवाओं को सार्वजनिक क्षेत्र में मजबूत बनाए रखने की मांग की।
प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन
अपनी मांगों को लेकर संगठन की ओर से प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन भेजा गया। इसमें पुरानी पेंशन व्यवस्था को बहाल करने, लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने तथा सरकारी संस्थानों के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग प्रमुख रही।
ज्ञापन में कहा गया कि शिक्षक और कर्मचारी सरकारी व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। इसलिए उनकी सेवा शर्तों, पेंशन और रोजगार से जुड़े विषयों पर सरकार को संवेदनशीलता के साथ निर्णय लेना चाहिए। संगठन ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार कर्मचारियों और शिक्षकों की मांगों पर सकारात्मक विचार करेगी।
शिक्षक-कर्मचारियों की भागीदारी
ज्ञापन कार्यक्रम में संगठन के प्रदेश, जिला और ब्लॉक स्तर के पदाधिकारी तथा बड़ी संख्या में शिक्षक-कर्मचारी शामिल रहे। पदाधिकारियों ने कहा कि कर्मचारियों और शिक्षकों से जुड़े मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीके से सरकार तक पहुंचाया जाता रहेगा।
संगठन ने स्पष्ट किया कि पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली, टीईटी की अनिवार्यता से जुड़े मुद्दे और सरकारी संस्थानों के निजीकरण जैसे विषय उसके प्रमुख एजेंडे में शामिल हैं। इसके लिए संगठन स्तर पर आगे भी जनजागरूकता और संवाद कार्यक्रम जारी रखने की बात कही गई।

