कानपुर में स्टंटबाज बाइकर्स पर चलेगा अभियान, बिना हेलमेट वाहन चलाने वालों पर बढ़ेगी सख्ती

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रिपोर्ट- विक्की रघुवंशी

कानपुर। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए प्रशासन ने अब प्रवर्तन कार्रवाई और तेज करने का फैसला लिया है। खासतौर पर सड़कों पर बाइक से स्टंट करने वालों तथा ग्रामीण इलाकों में बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने वालों के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जाएगा। वहीं, राष्ट्रीय राजमार्ग-34 पर उपखनिजों की ढुलाई करने वाले वाहनों में ओवरलोडिंग और अस्पष्ट नंबर प्लेट के मामलों पर भी सख्ती बढ़ाई जाएगी।शुक्रवार को सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक हुई। बैठक में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने, यातायात नियमों का प्रभावी अनुपालन कराने और सड़क किनारे अतिक्रमण हटाने समेत कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर समीक्षा की गई। इस दौरान अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि सड़क सुरक्षा से जुड़े नियमों के पालन में किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो।

स्टंटबाज बाइकर्स पर विशेष नजर

बैठक में जिलाधिकारी ने सड़कों पर स्टंट करने वाले बाइकर्स के खिलाफ विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सड़क पर स्टंट न केवल यातायात व्यवस्था को प्रभावित करता है, बल्कि अन्य वाहन चालकों के लिए भी जोखिम पैदा कर सकता है। इसलिए पुलिस और परिवहन विभाग ऐसे मामलों में लगातार निगरानी रखते हुए नियमानुसार कार्रवाई करें।इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने वालों की जांच बढ़ाने को कहा गया। प्रशासन का जोर इस बात पर है कि सड़क सुरक्षा नियम केवल शहर तक सीमित न रहें, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी उनका प्रभावी पालन कराया जाए। अधिकारियों को नियमित जांच और प्रवर्तन अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।

जुलाई में 63 हजार से अधिक यातायात कार्रवाई

सड़क सुरक्षा समिति की समीक्षा में सामने आया कि जुलाई 2026 में यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पुलिस और परिवहन विभाग ने व्यापक कार्रवाई की। दोनों विभागों के आंकड़ों को मिलाकर विभिन्न नियमों के उल्लंघन के 63 हजार से अधिक मामलों में कार्रवाई की गई।

सबसे अधिक कार्रवाई बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने वालों के खिलाफ हुई। जुलाई में ऐसे 39,021 मामलों में कार्रवाई की गई। इसके अलावा रॉन्ग साइड ड्राइविंग के 11,778 और ओवर स्पीडिंग के 9,151 मामलों में कार्रवाई की गई।

इसी क्रम में बिना सीट बेल्ट वाहन चलाने के 1,807, मॉडिफाइड साइलेंसर एवं प्रेशर हॉर्न के 1,809, बिना ड्राइविंग लाइसेंस वाहन चलाने के 1,453 और वाहन चलाते समय मोबाइल फोन के इस्तेमाल के 931 मामलों में कार्रवाई की गई।

वहीं, बिना फिटनेस वाहन संचालन के 902, ड्रंक एंड ड्राइविंग के 363, अंडर एज ड्राइविंग के चार तथा निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए स्कूली वाहनों के 44 मामलों में भी कार्रवाई की गई। प्रशासन ने संकेत दिया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आगे भी अभियान जारी रहेगा।

एनएच-34 पर ओवरलोड वाहनों की होगी सघन जांच

बैठक में राष्ट्रीय राजमार्ग-34 पर उपखनिजों की ढुलाई करने वाले वाहनों की ओवरलोडिंग का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। समीक्षा के दौरान बताया गया कि कुछ वाहनों में नंबर प्लेट को इस तरह छिपाया जाता है या वह इतनी अस्पष्ट होती है कि उसे आसानी से पढ़ा नहीं जा सकता।

जुलाई में ऐसे मामलों में यातायात विभाग ने 435 चालान किए। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि उपखनिजों की ढुलाई करने वाले वाहनों की ओवरलोडिंग की सघन जांच की जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रत्येक वाहन की नंबर प्लेट स्पष्ट रूप से दिखाई दे।

उन्होंने संबंधित विभागों से नियमित प्रवर्तन कार्रवाई करने और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

अतिक्रमण पर पीडब्ल्यूडी के दो अधिशासी अभियंताओं से जवाब तलब

सड़क सुरक्षा व्यवस्था में अतिक्रमण भी बड़ी चुनौती है। बैठक के दौरान पीडब्ल्यूडी की सड़कों पर अतिक्रमण की स्थिति की समीक्षा की गई। इस दौरान पीडब्ल्यूडी प्रांतीय खंड की ओर से सड़कों पर अतिक्रमण की स्थिति की स्पष्ट जानकारी प्रस्तुत नहीं किए जाने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई।

उन्होंने प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता अनूप कुमार मिश्रा से स्पष्टीकरण तलब किया। वहीं, पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड के अधिशासी अभियंता अखंडेश्वर प्रसाद ने बताया कि उनके डिवीजन की सड़कों पर कुल 30 अतिक्रमण चिह्नित किए गए हैं। इनमें 22 अस्थायी और आठ स्थायी अतिक्रमण शामिल हैं।

सभी 30 अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी नहीं किए जाने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताते हुए स्पष्टीकरण मांगा। साथ ही अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया को नियमानुसार तेज करने के निर्देश दिए।

पीडब्ल्यूडी एनएच खंड की ओर से बताया गया कि रामादेवी से कल्याणपुर तक 905 अवैध अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी किए गए हैं। जिलाधिकारी ने इस मार्ग पर अतिक्रमण के चिन्हीकरण और कार्रवाई को और तेज करने के निर्देश दिए। दूसरी ओर, एनएचएआई के परियोजना प्रबंधक पंकज यादव ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर चिह्नित 823 अतिक्रमण हटाए जा चुके हैं।

स्कूली वाहन चालकों का होगा चरित्र सत्यापन

बैठक में बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। मिशन सेफ फ्यूचर के तहत स्कूली वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने प्रत्येक स्कूली वाहन चालक का चरित्र सत्यापन और स्वास्थ्य परीक्षण कराने के निर्देश दिए।

इसके साथ ही चालकों की आंखों की जांच भी कराई जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्कूली वाहनों का संचालन सुरक्षित तरीके से हो और बच्चों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि स्कूली वैन में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इसके लिए नियमित जांच अभियान चलाने और नियमों का उल्लंघन मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

घायल को अस्पताल पहुंचाने पर 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि

सड़क दुर्घटना के बाद समय पर मदद पहुंचाने वाले लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए बैठक में राहवीर योजना की भी समीक्षा की गई। योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को गोल्डन ऑवर में अस्पताल पहुंचाने वाले पात्र व्यक्ति को 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दिए जाने का प्रावधान है।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार कराने के निर्देश दिए, ताकि अधिक से अधिक लोग दुर्घटना पीड़ितों की मदद के लिए आगे आएं और उन्हें समय पर उपचार मिल सके।

इसके अलावा पीएम राहत जन आरोग्य योजना की भी समीक्षा की गई। इसके तहत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अधिकतम सात दिनों तक अथवा 1.50 लाख रुपये तक, जो भी पहले हो, कैशलेस उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। कानपुर नगर में इस सुविधा के लिए नौ अस्पताल चिह्नित किए गए हैं।

इनमें वेदान्ता हॉस्पिटल, डेल्टा हॉस्पिटल, आशीर्वाद हॉस्पिटल, चांदनी हॉस्पिटल प्रा. लि., उजाला सिग्नस कुलवंती हॉस्पिटल, नारायणा हॉस्पिटल, रामादेवी मेडिकल सेंटर प्रा. लि., रामा हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर तथा रामा हॉस्पिटल शामिल हैं।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों से कहा कि इन योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाई जाए, ताकि दुर्घटना पीड़ितों को समय पर उपचार और उपलब्ध सरकारी सुविधाओं का लाभ मिल सके।

सड़क सुरक्षा नियमों के पालन पर प्रशासन का जोर

कुल मिलाकर जिला प्रशासन ने सड़क सुरक्षा को लेकर प्रवर्तन और जागरूकता दोनों स्तरों पर कार्रवाई तेज करने का संकेत दिया है। एक ओर जहां स्टंटबाज बाइकर्स, बिना हेलमेट वाहन चलाने वालों, ओवरलोड वाहनों और यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई बढ़ाई जाएगी, वहीं दूसरी ओर स्कूली वाहनों की सुरक्षा और दुर्घटना पीड़ितों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

बैठक में डीसीपी ट्रैफिक रवींद्र कुमार, अपर जिलाधिकारी (नगर) आलोक कुमार गुप्ता समेत संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासन की ओर से अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि सड़क सुरक्षा से जुड़े सभी अभियानों की नियमित समीक्षा की जाए और नियमों के पालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।

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