कानपुर में पुरानी पेंशन बहाली को लेकर अटेवा की तिरंगा यात्रा, 25 सितंबर को लखनऊ में महारैली का ऐलान
रिपोर्ट- विक्की रघुवंशी
कानपुर। पुरानी पेंशन योजना की बहाली, कार्यरत शिक्षकों पर टीईटी (TET) की अनिवार्यता समाप्त करने और सरकारी संस्थानों के निजीकरण के विरोध में अटेवा ने शुक्रवार को तिरंगा यात्रा निकाली। अटेवा जिलाध्यक्ष नीरज तिवारी के नेतृत्व में विभिन्न कर्मचारी, शिक्षक और सहयोगी संगठनों के पदाधिकारी व सदस्य यात्रा में शामिल हुए। तिरंगा यात्रा जीएनके इंटर कॉलेज से शुरू होकर जिलाधिकारी कार्यालय तक पहुंची। यहां प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा गया।
अटेवा पदाधिकारियों ने कहा कि पुरानी पेंशन कर्मचारियों के भविष्य की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। संगठन लंबे समय से इसकी बहाली की मांग को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन कर रहा है। इसके साथ ही कार्यरत शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता लागू किए जाने और सरकारी संस्थानों के निजीकरण को लेकर भी कर्मचारी संगठनों ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
25 सितंबर को लखनऊ में महारैली
तिरंगा यात्रा के दौरान अटेवा जिलाध्यक्ष नीरज तिवारी ने कहा कि संगठन पिछले कई वर्षों से लगातार पुरानी पेंशन बहाली की मांग सरकार के सामने रख रहा है। उनका कहना था कि कर्मचारियों की मांग पर अभी तक अपेक्षित निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार पुरानी पेंशन बहाली सहित अन्य मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती है तो कर्मचारी संगठन आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे।
इसी क्रम में अटेवा ने आगामी 25 सितंबर को लखनऊ में विशाल महारैली आयोजित करने का ऐलान किया है। संगठन का कहना है कि महारैली के माध्यम से कर्मचारियों और शिक्षकों की मांगों को सरकार तक मजबूती से पहुंचाया जाएगा। इसके लिए विभिन्न विभागों और कर्मचारी संगठनों से अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की गई है।
कार्यरत शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता का विरोध
अटेवा के महामंत्री सुनील बाजपेई ने कार्यरत शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जो शिक्षक वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे हैं, उनके लिए सेवा के दौरान दोबारा किसी परीक्षा की अनिवार्यता उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से इस व्यवस्था पर पुनर्विचार करने और आवश्यक होने पर अध्यादेश के माध्यम से कार्यरत शिक्षकों पर लागू टीईटी अनिवार्यता को समाप्त करने की मांग की।
सुनील बाजपेई ने कहा कि शिक्षकों की योग्यता और उनके लंबे अनुभव को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, शिक्षा व्यवस्था में कार्यरत शिक्षकों को अनावश्यक परीक्षा प्रक्रिया में उलझाने के बजाय उनके अनुभव और सेवाकाल को महत्व दिया जाना चाहिए।
निजीकरण को लेकर कर्मचारी संगठनों की आपत्ति
मंडलीय मंत्री डॉ. यतीन्द्र शर्मा ने सरकारी संस्थानों के निजीकरण का विरोध किया। उन्होंने कहा कि सरकारी संस्थानों की भूमिका आम नागरिकों और कर्मचारियों के हितों से जुड़ी है। ऐसे में निजीकरण के फैसलों पर व्यापक स्तर पर विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कर्मचारी संगठन निजीकरण के खिलाफ अपनी आवाज लोकतांत्रिक तरीके से उठाते रहेंगे। उनके मुताबिक, सरकारी संस्थानों की सेवाएं आम लोगों, खासकर मध्यम और निम्न आय वर्ग के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसलिए सार्वजनिक संस्थानों को मजबूत करने की दिशा में काम किया जाना चाहिए।
NPS और UPS को लेकर भी नाराजगी
एनएमओपीएस डिफेंस के राष्ट्रीय सचिव रमेश पाल ने कहा कि कर्मचारी संगठन एनपीएस और यूपीएस को लेकर अपनी असहमति पहले भी जाहिर करते रहे हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की मांग पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली है और संगठन इसी मुद्दे को लेकर आगे भी संघर्ष जारी रखेगा।
उन्होंने कहा कि पेंशन कर्मचारियों के भविष्य से जुड़ा विषय है। इसलिए सरकार को कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक और व्यापक दृष्टिकोण के साथ विचार करना चाहिए। रमेश पाल ने कहा कि कर्मचारी संगठनों की ओर से उठाए जा रहे मुद्दों का समाधान संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना चाहिए।
विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने लिया हिस्सा
तिरंगा यात्रा में कई विभागों और कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। लेखपाल संघ, टीएससीटी, एनएमओपीएस डिफेंस, सिंचाई विभाग, फार्मासिस्ट एसोसिएशन, नर्सेस संघ, आईटीआई, पीडब्ल्यूडी, दीवानी न्यायालय कर्मचारी संघ, सेल टैक्स, उद्योग निदेशालय और सेवायोजन कार्यालय सहित विभिन्न विभागों के कर्मचारी यात्रा में शामिल हुए।
इसके अलावा उच्चतर शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा और बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़े शिक्षकों ने भी तिरंगा यात्रा में भागीदारी की। कर्मचारियों और शिक्षकों ने पुरानी पेंशन बहाली, निजीकरण पर रोक तथा कार्यरत शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता समाप्त करने की मांग को लेकर अपना समर्थन व्यक्त किया।
सभी संगठनों से एकजुट होने की अपील
आदर्श माध्यमिक शिक्षक संघ के महामंत्री कुलदीप यादव ने कहा कि कर्मचारी और शिक्षक संगठनों को अपने साझा मुद्दों पर एकजुट होकर संघर्ष करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग संगठनों की मांगों में कई मुद्दे समान हैं। ऐसे में सामूहिक प्रयासों के माध्यम से सरकार के सामने कर्मचारियों की बात प्रभावी ढंग से रखी जा सकती है।
वहीं, फार्मासिस्ट एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के प्रदेश महामंत्री राजेन्द्र पटेल ने कहा कि पुरानी पेंशन कर्मचारियों के लिए भविष्य की आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखने के लिए तैयार हैं।
तिरंगा यात्रा में बड़ी संख्या में कर्मचारी और शिक्षक शामिल
तिरंगा यात्रा में विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए। कार्यक्रम में रमेश पाल, कुलदीप यादव, डॉ. यतीन्द्र शर्मा, शिव नारायण साहू, राजेन्द्र पटेल, मनोज भूषण पाण्डेय, धनन्जय सिंह, सतीश द्विवेदी, विवेक यादव, अरविन्द कुशवाहा, सर्वेश त्रिवेदी, मोहित सचान, सुजीत कुशवाहा, संतोष अग्निहोत्री, नीरजा मिश्रा, किरण बाला, अंजना बाजपेई, कुमुद बाला और अर्चना पाण्डेय समेत कई कर्मचारी व शिक्षक मौजूद रहे।
इसके अलावा अर्चना सैनी, विजय पाल, मोहन मुरारी, अभिषेक पासी, अनूप यादव, अजय पाल, अतुल मिश्रा, आत्माराम, अक्षय कुमार, दिनेश, तेज बहादुर, नितिन मिश्रा, सुनील वर्मा, चन्द्रशेखर, भरत दीक्षित, अरविन्द, धर्मेन्द्र यादव, उमाकान्त पाल, शाहिद, विकास सक्सेना, अमित कुमार, अमित दुबे, विजय मनीष, शहनवाज, राजेश शर्मा, अजीत, विजय हिमांशु, विद्यासागर, सत्यवीर, प्रशांतराय और अजय सिंह सहित अन्य लोग भी उपस्थित रहे।
आगे आंदोलन तेज करने की तैयारी
तिरंगा यात्रा के माध्यम से कर्मचारी संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर एकजुटता का संदेश दिया। ज्ञापन सौंपने के बाद संगठन ने स्पष्ट किया कि यदि मांगों पर सरकार की ओर से सकारात्मक पहल नहीं होती है तो आंदोलन को अगले चरण में ले जाया जाएगा। इसी कड़ी में 25 सितंबर को लखनऊ में प्रस्तावित महारैली को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

