राहुल-प्रियंका का धरना: छात्र ने दिखाए पैलेटगन के छर्रे, पुलिस पर FIR न दर्ज करने का आरोप

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Digital UP News Desk

नई दिल्ली: छात्र से जुड़े एक मामले को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने धरना देकर पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। धरने के दौरान एक छात्र ने अपने जख्म दिखाते हुए दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान उस पर पैलेटगन के छर्रे लगे थे। छात्र ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस की ओर से जख्मी छात्र की एफआईआर दर्ज नहीं करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। इस मामले को लेकर कांग्रेस ने सरकार और पुलिस प्रशासन से जवाब मांगते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल बढ़ गई है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने छात्र के आरोपों को गंभीर बताते हुए उसके साथ खड़े होने का संदेश दिया। धरने के दौरान छात्र ने अपने शरीर पर लगे जख्मों की ओर ध्यान दिलाया और दावा किया कि उसे पुलिस कार्रवाई के दौरान चोट लगी। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

छात्र ने दिखाए जख्म, पुलिस पर लगाया गंभीर आरोप

धरने के दौरान छात्र ने कथित तौर पर पैलेटगन के छर्रे लगने से हुए जख्मों को दिखाया। उसका कहना था कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई में वह घायल हुआ। छात्र के मुताबिक, घटना के बाद वह अपनी शिकायत दर्ज कराने की कोशिश कर रहा है, लेकिन एफआईआर दर्ज कराने को लेकर उसे परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

छात्र ने आरोप लगाया कि पुलिस की ओर से यह निर्देश दिए जा रहे हैं कि जख्मी छात्र की एफआईआर दर्ज न की जाए। यह आरोप सामने आने के बाद कांग्रेस नेताओं ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। पार्टी नेताओं का कहना है कि यदि किसी छात्र को चोट लगी है और वह शिकायत दर्ज कराना चाहता है, तो उसकी शिकायत को नियमानुसार दर्ज कर पूरे मामले की जांच की जानी चाहिए।

हालांकि, पुलिस की ओर से इस आरोप पर क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया दी गई है, यह स्पष्ट होना जरूरी है। किसी भी घटना में दोनों पक्षों का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर स्पष्ट हो सकती है।

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी का धरना

छात्र के समर्थन में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के धरने ने मामले को राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बना दिया है। दोनों नेताओं ने छात्र की बात सुनी और उसके आरोपों को सार्वजनिक रूप से उठाया। कांग्रेस का कहना है कि छात्रों की आवाज को दबाने के बजाय उनकी शिकायतों पर पारदर्शी तरीके से कार्रवाई होनी चाहिए।

धरने के दौरान कांग्रेस नेताओं ने पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना है कि यदि प्रदर्शन के दौरान किसी छात्र को चोट लगी है तो पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साथ ही, यदि पुलिस पर एफआईआर दर्ज नहीं करने का आरोप है, तो इसकी भी जांच की जानी चाहिए कि शिकायत दर्ज करने में बाधा क्यों आई।

राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की मौजूदगी से इस मामले को राजनीतिक समर्थन भी मिला है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने छात्र के साथ खड़े होकर प्रशासन से जवाब मांगने की बात कही।

पैलेटगन के इस्तेमाल पर उठे सवाल

छात्र द्वारा पैलेटगन के छर्रे दिखाए जाने के बाद पुलिस कार्रवाई के तरीके पर भी चर्चा शुरू हो गई है। पैलेटगन से चोट लगने का दावा सामने आने के बाद यह सवाल उठता है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने किस तरह की कार्रवाई की और किन परिस्थितियों में बल प्रयोग किया गया।

ऐसे मामलों में घटना की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण होती है। पुलिस कार्रवाई का वीडियो, मौके पर मौजूद लोगों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर स्थिति का आकलन किया जा सकता है। यदि मेडिकल जांच में छात्र की चोटों की पुष्टि होती है, तो जांच एजेंसियों के लिए घटना के कारणों और जिम्मेदारी तय करने में मदद मिल सकती है।

दूसरी ओर, पुलिस के लिए भी यह जरूरी है कि वह घटनाक्रम के संबंध में अपना पक्ष स्पष्ट करे। यदि पुलिस का कहना है कि बल प्रयोग नियमों के तहत किया गया था, तो उसके कारण और परिस्थितियां सार्वजनिक की जानी चाहिए। इससे किसी भी तरह की गलतफहमी को दूर करने में मदद मिल सकती है।

एफआईआर दर्ज करने के आरोप से बढ़ा विवाद

मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू एफआईआर दर्ज नहीं करने का आरोप है। छात्र की ओर से यदि लिखित शिकायत दी गई है, तो उस पर पुलिस ने क्या कार्रवाई की, यह सवाल अब चर्चा में है। शिकायत दर्ज करने और जांच की प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने आने पर ही यह तय हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है।

कांग्रेस नेताओं ने इसी मुद्दे को लेकर प्रशासन से पारदर्शिता की मांग की है। पार्टी का कहना है कि किसी भी छात्र या नागरिक की शिकायत को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। साथ ही, यदि किसी पुलिसकर्मी या अधिकारी की भूमिका पर सवाल उठते हैं, तो निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।

वहीं, प्रशासन की ओर से पूरे मामले की जांच कराए जाने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। जांच के दौरान घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य, वीडियो फुटेज, मेडिकल दस्तावेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान अहम हो सकते हैं।

राजनीतिक मुद्दा बनने की ओर बढ़ा मामला

छात्र के आरोप और राहुल-प्रियंका के धरने के बाद यह मामला अब केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है। कांग्रेस इसे छात्रों के अधिकार और पुलिस जवाबदेही से जोड़कर देख रही है। वहीं, प्रशासन के लिए चुनौती यह है कि मामले की निष्पक्ष जांच के जरिए वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।

दरअसल, छात्र आंदोलनों से जुड़े मामलों में पुलिस और प्रशासन की भूमिका को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में किसी भी कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी होता है। इसी तरह प्रदर्शनकारियों की ओर से भी कानून और व्यवस्था का पालन किया जाना आवश्यक है।

इस मामले में भी सबसे महत्वपूर्ण बात यही होगी कि आरोपों की जांच तथ्यों के आधार पर हो। केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से स्थिति स्पष्ट नहीं होगी। इसलिए मेडिकल रिपोर्ट, पुलिस रिकॉर्ड और उपलब्ध वीडियो साक्ष्यों की जांच के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आ सकता है।

निष्पक्ष जांच की मांग

कांग्रेस की ओर से छात्र के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। पार्टी का कहना है कि छात्र को यदि पुलिस कार्रवाई में चोट लगी है तो इसके लिए जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। साथ ही, एफआईआर दर्ज करने से संबंधित आरोपों की भी जांच होनी चाहिए।

वहीं, पूरे मामले में प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण है। यदि छात्र की शिकायत दर्ज की गई है, तो उसकी जांच की स्थिति बताई जानी चाहिए। यदि शिकायत दर्ज नहीं हुई है, तो उसके कारण स्पष्ट किए जाने चाहिए।

फिलहाल, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के धरने के बाद मामला राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। छात्र द्वारा दिखाए गए जख्म और एफआईआर दर्ज नहीं करने के आरोपों ने पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, आरोपों की वास्तविकता और घटना की पूरी परिस्थितियां निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट होंगी।

ऐसे में अब सभी की नजर प्रशासन और पुलिस की अगली कार्रवाई पर है। यदि जांच पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ती है और दोनों पक्षों के साक्ष्यों को शामिल किया जाता है, तो घटना की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। फिलहाल कांग्रेस छात्र के समर्थन में खड़ी है और प्रशासन से जवाब मांग रही है, जबकि मामले में आधिकारिक जांच और पुलिस का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है।

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