इटावा में ARTO हुमा परवीन का आरोप: पीछा करने और धमकी देने की शिकायत, SSP से मांगी सुरक्षा

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Digital UP News Desk

इटावा। जिले में परिवहन विभाग की प्रवर्तन कार्रवाई के बाद ARTO हुमा परवीन ने अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उनका आरोप है कि 5 अगस्त को एक अवैध ट्रक जब्त किए जाने के बाद से कुछ लोग उनकी गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं और लगातार उनका पीछा कर रहे हैं। आरोप के मुताबिक, कभी कार तो कभी स्कूटी से उनका पीछा किया जाता है और सुनसान स्थानों पर उनकी गाड़ी को रोकने की कोशिश की जाती है। इस दौरान उन्हें धमकियां दिए जाने की भी बात सामने आई है।

ARTO हुमा परवीन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को लिखित शिकायत दी है। साथ ही उन्होंने SSP से सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि उनके पास कथित घटनाओं से संबंधित वीडियो साक्ष्य भी मौजूद हैं, जिन्हें जरूरत पड़ने पर जांच अधिकारियों को उपलब्ध कराया जा सकता है।

5 अगस्त को ट्रक जब्त करने के बाद बढ़ी परेशानी

बताया जा रहा है कि 5 अगस्त को ARTO हुमा परवीन ने कार्रवाई करते हुए एक ट्रक को जब्त किया था। आरोप है कि इस कार्रवाई के बाद से ही उनके साथ संदिग्ध गतिविधियां शुरू हुईं। ARTO के मुताबिक, उनकी गाड़ी का लगातार पीछा किया जा रहा है। कभी कार और कभी स्कूटी से पीछा किए जाने की बात कही गई है।

इसके अलावा, आरोप यह भी है कि कुछ मौकों पर सुनसान स्थानों पर उनकी गाड़ी को रोकने का प्रयास किया गया और उन्हें धमकाया गया। ऐसे में परिवहन अधिकारी ने अपनी सुरक्षा को लेकर पुलिस प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि ARTO का पीछा करने और उन्हें धमकाने के पीछे कौन लोग थे तथा उनकी वास्तविक मंशा क्या थी।

वीडियो साक्ष्य होने का दावा

इस मामले में ARTO हुमा परवीन का सबसे महत्वपूर्ण दावा कथित वीडियो साक्ष्यों को लेकर है। उन्होंने कहा है कि उनके पास ऐसी घटनाओं से जुड़े वीडियो उपलब्ध हैं, जिनके आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ाई जा सकती है।

वीडियो साक्ष्य जांच में अहम भूमिका निभा सकते हैं। यदि वीडियो में वाहनों के नंबर, संबंधित व्यक्तियों की पहचान या घटनास्थल से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण तथ्य स्पष्ट दिखाई देते हैं, तो पुलिस के लिए आरोपों की पड़ताल करना आसान हो सकता है। इसलिए अब जांच में इन वीडियो की प्रमाणिकता और घटनाक्रम से उनके संबंध की भी जांच महत्वपूर्ण होगी।

यूट्यूबर या दलाल पर लगाए गए आरोप

ARTO की शिकायत में कथित तौर पर एक यूट्यूबर या दलाल पर भी आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि संबंधित व्यक्ति मौरम और गिट्टी लदे ट्रकों को पास कराने के लिए सक्रिय रहता है। इसके बदले एक ट्रक से कथित तौर पर करीब एक हजार रुपये लिए जाने का दावा किया गया है।

आरोपों के मुताबिक, संबंधित व्यक्ति कथित रूप से खनन से जुड़े वाहन चालकों और अन्य लोगों के संपर्क में रहता है। इतना ही नहीं, ARTO की लोकेशन की जानकारी भी कथित तौर पर खनन से जुड़े लोगों तक पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। यदि जांच में यह बात सही पाई जाती है तो मामला केवल पीछा करने या धमकी देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अवैध परिवहन और कथित वसूली से जुड़े पहलुओं की भी जांच हो सकती है।

फिलहाल यह स्पष्ट करना जरूरी है कि शिकायत में लगाए गए आरोप जांच के अधीन हैं। किसी व्यक्ति को दोषी मानने से पहले पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तथ्य सामने आना जरूरी है।

खनन और ओवरलोडिंग के खिलाफ कार्रवाई से जुड़ा मामला

इटावा समेत प्रदेश के कई जिलों में परिवहन विभाग और प्रशासन की ओर से अवैध खनन, ओवरलोडिंग तथा नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ समय-समय पर अभियान चलाए जाते हैं। मौरम और गिट्टी जैसे खनिज पदार्थों को ले जाने वाले वाहनों की जांच भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।

ऐसे मामलों में परिवहन विभाग की कार्रवाई से संबंधित वाहन मालिकों और चालकों पर आर्थिक एवं कानूनी कार्रवाई हो सकती है। इसलिए प्रवर्तन अधिकारियों की कार्रवाई के बाद किसी अधिकारी पर दबाव बनाने या उसे प्रभावित करने का प्रयास प्रशासन के लिए गंभीर विषय माना जाता है।

यदि किसी अधिकारी को कार्रवाई के बाद धमकी या निगरानी जैसी स्थिति का सामना करना पड़ता है, तो इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक हो जाती है। इससे न केवल संबंधित अधिकारी की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि विभागीय कार्रवाई की निष्पक्षता पर भी भरोसा कायम रहेगा।

SSP से सुरक्षा की मांग

ARTO हुमा परवीन ने अपनी शिकायत के माध्यम से वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मामले की जांच कराने और सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि लगातार पीछा किए जाने और धमकी मिलने की कथित घटनाओं के कारण उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता है।

अब पुलिस के सामने सबसे पहले शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता जांचने की चुनौती होगी। इसके लिए घटनास्थलों के आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज, कथित तौर पर पीछा करने वाले वाहनों की पहचान, मोबाइल लोकेशन तथा उपलब्ध वीडियो साक्ष्यों की जांच की जा सकती है।

इसके साथ ही जिन लोगों पर आरोप लगाए गए हैं, उनसे भी पूछताछ की जा सकती है। यदि जांच में किसी तरह की आपराधिक गतिविधि, धमकी, अवैध वसूली या सरकारी अधिकारी के काम में बाधा डालने के प्रमाण मिलते हैं, तो पुलिस नियमानुसार कार्रवाई कर सकती है।

जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर

फिलहाल ARTO की शिकायत के बाद मामला जांच के दायरे में है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। ऐसे में संबंधित सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना भी जरूरी है।

मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि यदि किसी अधिकारी की लोकेशन वास्तव में अवैध खनन या परिवहन से जुड़े लोगों तक पहुंचाई जा रही थी, तो यह प्रवर्तन कार्रवाई की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा गंभीर प्रश्न हो सकता है। इसलिए पुलिस और प्रशासन के लिए शिकायत में उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों की बारीकी से जांच करना आवश्यक होगा।

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