जौहर विश्वविद्यालय में कथित वित्तीय अनियमितताओं की ईडी जांच, सरकारी धन और दान की रकम पर नजर

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Digital UP News Desk

रामपुर स्थित जौहर विश्वविद्यालय और उससे जुड़े जौहर ट्रस्ट को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई के बाद जांच का दायरा बढ़ता नजर आ रहा है। पूर्व मंत्री आजम खां और उनके परिजनों के नियंत्रण वाले ट्रस्ट से जुड़े विश्वविद्यालय में कथित वित्तीय अनियमितताओं, सरकारी धन के इस्तेमाल और चंदे की रकम से जुड़े दस्तावेजों की ईडी ने गहनता से जांच की है। बुधवार को हुई कार्रवाई के दौरान ईडी की टीम ने विश्वविद्यालय, ट्रस्ट के कार्यालय और उससे जुड़े कई अन्य ठिकानों पर दस्तावेज खंगाले।

ईडी की कार्रवाई करीब 16 घंटे तक चली। जांच एजेंसी ने विश्वविद्यालय के निर्माण, जमीन खरीद, इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने, ट्रस्ट को मिले चंदे और विभिन्न निर्माण कार्यों से संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल की। कार्रवाई के दौरान 11 फर्मों से जुड़े दस्तावेज भी टीम द्वारा अपने साथ ले जाए जाने की जानकारी सामने आई है।

सरकारी धन के इस्तेमाल की भी जांच

जांच का एक प्रमुख पहलू सरकारी बजट और सांसद-विधायक निधि से संबंधित धनराशि के कथित इस्तेमाल से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ईडी को ऐसे दस्तावेज और रिकॉर्ड मिले हैं, जिनसे सरकारी विभागों से प्राप्त धन के कथित दुरुपयोग की जांच को दिशा मिली है।

बताया जा रहा है कि जिन कार्यों के लिए सरकारी धन स्वीकृत हुआ था, उनमें से कुछ रकम कथित तौर पर नकद निकाली गई और उसे जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण कार्यों में लगाए जाने की आशंका है। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

जांच के दायरे में जल निगम, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), ग्राम्य विकास विभाग, संस्कृति विभाग, पिछड़ा वर्ग विभाग, नगर विकास और सिंचाई विभाग से जुड़े पुराने कार्य भी बताए जा रहे हैं। ईडी सरकारी धन से हुए निर्माण कार्यों और विश्वविद्यालय में कराए गए कार्यों के बीच संभावित संबंधों की पड़ताल कर रही है।

छह ठेकेदारों से पूछताछ की तैयारी

सूत्रों के अनुसार, सांसद-विधायक निधि से जुड़े काम कराने वाले करीब छह ठेकेदार भी ईडी की जांच के दायरे में आ सकते हैं। इन ठेकेदारों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी कर तलब किए जाने की संभावना है।

जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर सकती है कि सरकारी अनुबंध हासिल करने के बाद संबंधित निर्माण कंपनियों ने वास्तविक रूप से कौन-कौन से कार्य किए और भुगतान की गई रकम का इस्तेमाल किस उद्देश्य से हुआ। इसके साथ ही निर्माण कार्यों से जुड़े बिल, भुगतान, बैंक लेनदेन और लेखा रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।

जानकारी के मुताबिक, रामपुर की कुछ निजी कंस्ट्रक्शन फर्मों को सरकारी ठेके मिले थे। आरोप है कि इन ठेकों से प्राप्त रकम का इस्तेमाल निर्धारित सरकारी कार्यों के बजाय ट्रस्ट से जुड़ी संपत्तियों और विश्वविद्यालय के निर्माण में किया गया। जौहर एसोसिएट्स और सीके एसोसिएट्स से जुड़े करीब 86 करोड़ रुपये की सरकारी रकम के कथित गलत इस्तेमाल को भी जांच में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विश्वविद्यालय निर्माण पर 494 करोड़ रुपये के खर्च की पड़ताल

ईडी की जांच में जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण पर अनुमानित करीब 494 करोड़ रुपये खर्च होने से संबंधित हिसाब-किताब भी महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। एजेंसी यह जानने का प्रयास कर रही है कि इतनी बड़ी रकम विश्वविद्यालय के निर्माण, जमीन खरीद और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में किस तरह खर्च की गई।

ट्रस्ट की ओर से निर्माण कार्यों में खर्च की गई धनराशि और जमीन खरीद से जुड़े सभी रिकॉर्ड उपलब्ध कराए गए या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है। इसके अलावा विश्वविद्यालय के निर्माण में इस्तेमाल हुई सामग्री, ठेकेदारों को किए गए भुगतान और संबंधित कंपनियों के वित्तीय लेनदेन की भी जांच का हिस्सा बनाया गया है।

वहीं, सरकारी बजट से प्राप्त करीब 88 करोड़ रुपये और ट्रस्ट को मिले दान की रकम के इस्तेमाल से जुड़े रिकॉर्ड भी ईडी की पड़ताल में बताए जा रहे हैं। एजेंसी यह समझने की कोशिश कर रही है कि ट्रस्ट को प्राप्त धन किन स्रोतों से आया और उसका उपयोग किन कार्यों में किया गया।

दानदाताओं पर भी ईडी की नजर

जौहर ट्रस्ट को मिले दान की जांच अब मामले का एक अहम हिस्सा बनती दिखाई दे रही है। ट्रस्ट ने जिन व्यक्तियों, संस्थाओं और कंपनियों से दान प्राप्त करने का दावा किया था, उनसे भी पूछताछ किए जाने की संभावना है।

जांच के दायरे में पिरामिड कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर्स, सालार ओवरसीज लिमिटेड, एआर एजुकेशन ट्रस्ट, अर्थ इंफ्राटेक, रेमिगेट इंफ्रा डेवलपर्स, रॉयल इम्पोरिया इंफ्रा टेक, फैजा परवीन, मोहम्मद हसीब, रोबोट विनिमय प्राइवेट लिमिटेड, वंडर सप्लायर्स प्राइवेट लिमिटेड और ड्रीम ऑफ पर्ल रियलिटी एंड सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड जैसे नाम बताए गए हैं।

इसके अलावा ट्रस्ट द्वारा कथित तौर पर 11 ऐसी संस्थाओं से दान प्राप्त करने की बात भी सामने आई है, जिनके अस्तित्व और वास्तविक गतिविधियों की जांच की जा रही है। ईडी अब इन संस्थाओं से जुड़े बैंक खातों, दस्तावेजों और लेनदेन की जानकारी जुटा सकती है।

पुराने अधिकारियों और आर्किटेक्ट फर्म की भूमिका भी जांच के घेरे में

जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े मामले की जांच लंबे समय से विभिन्न स्तरों पर चलती रही है। अब ईडी की कार्रवाई के बाद उस अवधि में संबंधित विभागों में तैनात रहे अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आने की बात सामने आ रही है।

बताया जा रहा है कि नगर विकास विभाग के एक तत्कालीन अधिकारी की भूमिका को लेकर पहले भी सवाल उठे थे। इसी तरह लखनऊ की एक आर्किटेक्ट फर्म को विश्वविद्यालय से जुड़े कार्यों के लिए किए गए करोड़ों रुपये के भुगतान की भी जांच की जा रही है। ईडी यह पता लगाने का प्रयास कर सकती है कि इन भुगतान के बदले वास्तविक रूप से कौन-सी सेवाएं प्रदान की गईं और उनके लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया या नहीं।

हालांकि, किसी अधिकारी, ठेकेदार, कंपनी या दानदाता की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल ईडी दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन के आधार पर पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

आगे बढ़ सकती है पूछताछ और जांच

बुधवार को हुई कार्रवाई के बाद ईडी के हाथ लगे दस्तावेज अब जांच की अगली दिशा तय कर सकते हैं। विश्वविद्यालय और ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड, सरकारी भुगतान, दान की रकम, जमीन खरीद और निर्माण कार्यों के बीच संबंधों की पड़ताल के बाद संबंधित लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।

इस पूरे मामले में पूर्व मंत्री आजम खां के साथ-साथ ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों, ठेकेदारों, कंपनियों, दानदाताओं और संबंधित विभागों के तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है। फिलहाल ईडी की कार्रवाई को लेकर संबंधित पक्षों की ओर से अंतिम प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।

जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होगा कि जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण में इस्तेमाल हुई रकम के स्रोत क्या थे, सरकारी धन का उपयोग निर्धारित उद्देश्यों के अनुसार हुआ या नहीं और ट्रस्ट को प्राप्त दान की रकम का वास्तविक इस्तेमाल किस प्रकार किया गया। फिलहाल ईडी द्वारा जुटाए गए दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड इस जांच की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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