जयपुर के रामपुरा कंवरपुरा में स्कूल निरीक्षण को लेकर CJP टीम का विरोध, आरोप-प्रत्यारोप से बढ़ा तनाव

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Digital UP News Desk

जयपुर: राजधानी जयपुर के बगरू क्षेत्र स्थित रामपुरा कंवरपुरा गांव में शुक्रवार को जर्जर सरकारी प्राथमिक विद्यालय को लेकर विवाद गहरा गया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के को-कन्वीनर आशुतोष रांका और उनकी टीम जब स्कूल का निरीक्षण करने पहुंची, तो ग्रामीणों की ओर से विरोध किया गया। देखते ही देखते स्थिति तनावपूर्ण हो गई और टीम को मौके से वापस लौटना पड़ा। घटना के बाद ग्रामीणों और CJP नेताओं की ओर से एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए गए।

मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया, जब स्कूल के बाहर ग्रामीणों और स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं ने धरना शुरू कर दिया। इसके साथ ही गांव के मुख्य रास्ते पर ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़ी कर आवाजाही को नियंत्रित किया गया। दूसरी ओर, CJP को-कन्वीनर आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ के जरिए घटना को लेकर भाजपा और स्थानीय प्रशासन पर सवाल उठाए।

सुबह स्कूल निरीक्षण के लिए पहुंची CJP टीम

जानकारी के अनुसार, शुक्रवार सुबह करीब 8 बजे CJP के कुछ कार्यकर्ता रामपुरा कंवरपुरा स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय का जायजा लेने पहुंचे थे। पार्टी की ओर से स्कूल की मौजूदा स्थिति और बच्चों की पढ़ाई से जुड़ी परिस्थितियों की जानकारी लेने की बात सामने आई। हालांकि, टीम के गांव पहुंचते ही कुछ ग्रामीणों ने इसका विरोध शुरू कर दिया।

विरोध के दौरान कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों के बीच तीखी बहस तथा धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। इसके बाद CJP कार्यकर्ताओं को गांव से बाहर कर दिया गया। आरोप है कि बाद में टीम के साथ मारपीट और पथराव भी हुआ। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग पक्षों के दावे सामने आए हैं और आधिकारिक स्तर पर जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

स्कूल के बाहर ग्रामीणों ने शुरू किया धरना

CJP टीम के लौटने के बाद गांव में माहौल और तनावपूर्ण हो गया। ग्रामीण और स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता स्कूल के बाहर धरने पर बैठ गए। बताया गया कि ग्रामीणों ने गांव के मुख्य रास्ते पर ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़ी कर दी। इसके बाद रास्ते से गुजरने वाले वाहनों की जांच किए जाने की भी बात सामने आई।

ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल भवन लंबे समय से जर्जर स्थिति में है। भवन की स्थिति को देखते हुए बच्चों की पढ़ाई फिलहाल पास के एक बाड़े में कराई जा रही है। उनका दावा है कि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।

ग्रामीणों का दावा- स्कूल के जीर्णोद्धार के लिए मंजूर हैं 12.50 लाख रुपये

विवाद के बीच ग्रामीणों की ओर से यह दावा किया गया कि स्कूल भवन के जीर्णोद्धार के लिए सरकार ने 12.50 लाख रुपये की राशि स्वीकृत कर दी है। ग्रामीणों का कहना है कि जब भवन की मरम्मत के लिए प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, तब CJP की ओर से स्कूल का निरीक्षण कर राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश की जा रही है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बाहरी राजनीतिक गतिविधियों के कारण गांव का माहौल खराब हो रहा है। उनका कहना है कि स्कूल की समस्या का समाधान प्रशासनिक स्तर पर किया जाना चाहिए और बच्चों की शिक्षा को राजनीतिक विवाद का हिस्सा नहीं बनाया जाना चाहिए।

हालांकि, स्वीकृत राशि और उसके इस्तेमाल से संबंधित स्थिति को लेकर संबंधित विभाग की आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।

आशुतोष रांका ने भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप

घटना के बाद CJP के को-कन्वीनर आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर कई पोस्ट साझा किए। उन्होंने दावा किया कि रामपुरा कंवरपुरा का सरकारी स्कूल पिछले कई वर्षों से बेहद खराब परिस्थितियों में संचालित हो रहा है।

रांका ने आरोप लगाया कि जब उनकी टीम के सदस्य स्कूल की स्थिति देखने पहुंचे तो उनके साथ कथित तौर पर मारपीट की गई और उन्हें वहां से हटाने की कोशिश की गई। उन्होंने इस घटना के लिए भाजपा से जुड़े लोगों को जिम्मेदार बताया।

रांका ने अपने पोस्ट में सवाल उठाया कि यदि सरकारी स्कूल की स्थिति सुधारने की कोशिश की जा रही है, तो इसका विरोध क्यों किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय स्तर पर कुछ लोग राजनीतिक संरक्षण में इस तरह की गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं।

हालांकि, CJP नेता के आरोपों पर भाजपा या संबंधित स्थानीय लोगों का पक्ष इस रिपोर्ट को तैयार किए जाने तक स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया है। इसलिए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

स्कूल की जर्जर स्थिति बनी विवाद की मुख्य वजह

पूरे विवाद के केंद्र में सरकारी प्राथमिक विद्यालय की स्थिति है। ग्रामीणों के अनुसार, स्कूल भवन जर्जर होने के कारण बच्चों को फिलहाल वैकल्पिक स्थान पर पढ़ाया जा रहा है। दूसरी ओर, CJP इस व्यवस्था को लेकर सरकार और स्थानीय प्रशासन से सवाल पूछ रही है।

सरकारी स्कूलों की आधारभूत सुविधाएं लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय रही हैं। ऐसे में किसी विद्यालय की इमारत की खराब स्थिति सामने आने पर प्रशासन की जिम्मेदारी होती है कि वह सुरक्षा, मरम्मत और विद्यार्थियों की पढ़ाई से संबंधित व्यवस्था सुनिश्चित करे।

इसी वजह से रामपुरा कंवरपुरा का मामला भी अब केवल स्थानीय विवाद तक सीमित नहीं रह गया है। इसमें राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जुड़ने के कारण मामला अधिक चर्चा में आ गया है।

प्रशासन की भूमिका पर भी उठे सवाल

घटना के बाद स्थानीय प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती गांव में सामान्य स्थिति बहाल करने की है। रास्ते पर वाहनों की जांच और स्कूल के बाहर धरने जैसी गतिविधियों के कारण आम लोगों की आवाजाही प्रभावित होने की बात सामने आई है।

ऐसे में प्रशासन को दोनों पक्षों की शिकायतें सुनकर वास्तविक स्थिति की जांच करनी होगी। यदि मारपीट, पथराव या सार्वजनिक रास्ते में बाधा डालने जैसी घटनाओं की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की आवश्यकता होगी।

इसके साथ ही स्कूल भवन की तकनीकी स्थिति का भी निष्पक्ष निरीक्षण जरूरी है। यदि भवन वास्तव में बच्चों के लिए सुरक्षित नहीं है, तो वैकल्पिक व्यवस्था के साथ जल्द से जल्द मरम्मत कार्य पूरा करना प्राथमिकता होनी चाहिए।

राजनीतिक आरोपों के बीच बच्चों की पढ़ाई सबसे अहम

रामपुरा कंवरपुरा का विवाद यह भी दिखाता है कि स्थानीय स्तर पर शिक्षा से जुड़ी समस्याएं किस तरह राजनीतिक टकराव का रूप ले सकती हैं। एक तरफ CJP स्कूल की स्थिति को मुद्दा बनाकर सरकार पर सवाल उठा रही है, वहीं ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय के जीर्णोद्धार के लिए पहले ही धन स्वीकृत किया जा चुका है।

ऐसे में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण कब मिलेगा। राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप से अलग प्रशासन को स्कूल की वास्तविक स्थिति का आकलन कर स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।

यदि 12.50 लाख रुपये की राशि वास्तव में स्वीकृत हो चुकी है, तो उसके तहत होने वाले काम, कार्य शुरू होने की तारीख और पूरा होने की समयसीमा भी सार्वजनिक की जानी चाहिए। इससे विवाद को तथ्यों के आधार पर समझने में मदद मिलेगी।

आगे जांच से साफ होगी पूरी तस्वीर

फिलहाल रामपुरा कंवरपुरा में स्कूल निरीक्षण को लेकर हुए विवाद के बाद दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आए हैं। CJP जहां अपने कार्यकर्ताओं के साथ कथित दुर्व्यवहार का आरोप लगा रही है, वहीं ग्रामीण स्कूल के मुद्दे को लेकर पार्टी की राजनीतिक मंशा पर सवाल उठा रहे हैं।

इस मामले में निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटनाक्रम की वास्तविक शुरुआत कैसे हुई और विवाद किस स्तर तक पहुंचा। फिलहाल प्रशासन के सामने गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ स्कूल से जुड़े मूल मुद्दे का समाधान करने की चुनौती है।

सबसे जरूरी बात यह है कि राजनीतिक विवाद से अलग बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए। यदि विद्यालय भवन की मरम्मत आवश्यक है, तो संबंधित विभाग को तय प्रक्रिया के अनुसार काम जल्द पूरा करना चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को अस्थायी व्यवस्था में लंबे समय तक पढ़ाई न करनी पड़े।

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