सोनिया गांधी की आत्मकथा ‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ नवंबर में होगी प्रकाशित, राहुल ने मां के संघर्ष को किया याद

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Digital UP News Desk

नई दिल्ली: कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी की बहुप्रतीक्षित आत्मकथा ‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ इस साल नवंबर में प्रकाशित होने जा रही है। किताब में सोनिया गांधी के बचपन, भारत आने, राजीव गांधी से प्रेम और विवाह, गांधी परिवार में उनके प्रवेश तथा उन व्यक्तिगत और राजनीतिक घटनाओं का जिक्र है, जिन्होंने उनके जीवन की दिशा बदल दी। इसके साथ ही आत्मकथा में पिछले करीब छह दशकों में भारत में हुए सामाजिक और आर्थिक बदलावों को भी सोनिया गांधी अपने निजी अनुभवों के नजरिए से सामने रखेंगी।

अमेरिकी प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस की इम्प्रिंट अल्फ्रेड ए. नॉफ ने घोषणा की है कि किताब 10 नवंबर को बाजार में आएगी। हालांकि, भारत में इसके प्रकाशन की तारीख को लेकर पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया की ओर से अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में भारतीय पाठकों को किताब के स्थानीय संस्करण और उपलब्धता के संबंध में आगे की घोषणा का इंतजार रहेगा।

राहुल गांधी ने मां के संघर्ष को किया याद

आत्मकथा के प्रकाशन की घोषणा के मौके पर राहुल गांधी ने अपनी मां सोनिया गांधी के जीवन और संघर्ष को याद करते हुए भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी मां को लंबे समय से जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए देखा है। राहुल गांधी के मुताबिक, राजीव गांधी के निधन के बाद सोनिया गांधी के लिए जीवन बेहद चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन उन्होंने हर परिस्थिति का सामना साहस और गरिमा के साथ किया।

राहुल गांधी ने अपनी मां के निजी स्वभाव का जिक्र करते हुए कहा कि सोनिया गांधी ने हमेशा अपने व्यक्तिगत जीवन को सार्वजनिक चर्चा से दूर रखा। इसलिए उनके लिए अपनी जीवन यात्रा को किताब के माध्यम से दुनिया के सामने रखना आसान नहीं रहा होगा। उन्होंने खुशी और गर्व जताया कि उनकी मां की कहानी अब उन लाखों लोगों तक पहुंचेगी, जो उनके जीवन और सार्वजनिक भूमिका से जुड़े रहे हैं।

राहुल गांधी ने अपने पिता राजीव गांधी के जन्मदिन का भी उल्लेख किया। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि वह कल्पना कर सकते हैं कि उनके पिता आज ऊपर से मुस्कुरा रहे होंगे और सोनिया गांधी को गर्व से देख रहे होंगे। राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को हुआ था।

कैम्ब्रिज से शुरू होती है सोनिया गांधी की कहानी

अल्फ्रेड ए. नॉफ की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आत्मकथा की शुरुआत इंग्लैंड के कैम्ब्रिज से होती है। वर्ष 1965 में 19 वर्षीय सोनिया मैनो की मुलाकात राजीव गांधी से हुई। यही मुलाकात आगे चलकर एक रिश्ते में बदली और दोनों का विवाह हुआ।

किताब में सोनिया गांधी अपने उस दौर को याद करती हैं, जब वह इटली से निकलकर इंग्लैंड पहुंचीं और फिर उनका जीवन भारत से जुड़ गया। इस तरह आत्मकथा केवल एक राजनीतिक परिवार में प्रवेश की कहानी नहीं है, बल्कि एक ऐसी महिला की व्यक्तिगत यात्रा भी है, जिसने अलग देश, संस्कृति और सामाजिक वातावरण को अपनाया।

इटली के बचपन से गांधी परिवार तक

सोनिया गांधी का जन्म इटली में हुआ था और उन्होंने अपने शुरुआती जीवन का एक हिस्सा युद्ध के बाद के यूरोप में बिताया। आत्मकथा में उनके बचपन और परिवार से जुड़ी यादों के साथ उस दौर के सामाजिक वातावरण का भी वर्णन किया गया है।

राजीव गांधी से विवाह के बाद जब सोनिया गांधी भारत आईं तो उनके सामने एक बिल्कुल अलग संस्कृति और जीवनशैली थी। गांधी परिवार में प्रवेश के साथ ही उन्हें देश की राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों को करीब से समझने का अवसर मिला। उन्होंने हिंदी सीखी, साड़ी पहनने की भारतीय परंपरा अपनाई और भारतीय खान-पान से परिचित हुईं।

हालांकि, उनका जीवन केवल पारिवारिक बदलावों तक सीमित नहीं रहा। गांधी परिवार का हिस्सा बनने के बाद उन्होंने देश की राजनीति में तेजी से बदलते घटनाक्रम को भी बहुत करीब से देखा।

इंदिरा गांधी और संजय गांधी से जुड़ी यादें

आत्मकथा में सोनिया गांधी अपनी सास और देश की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ अपने संबंधों को भी याद करती हैं। इंदिरा गांधी भारतीय राजनीति की बेहद प्रभावशाली शख्सियत थीं और सोनिया गांधी ने उनके साथ परिवार के सदस्य के रूप में कई महत्वपूर्ण वर्ष बिताए।

इसी दौरान परिवार को कई बड़े सदमों का सामना करना पड़ा। संजय गांधी की विमान दुर्घटना में मौत और बाद में इंदिरा गांधी की हत्या जैसी घटनाओं ने सोनिया गांधी के निजी जीवन पर गहरा प्रभाव डाला। किताब में इन घटनाओं को केवल राजनीतिक घटनाओं के रूप में नहीं, बल्कि परिवार के भीतर महसूस किए गए दुख और बदलाव के संदर्भ में भी देखा गया है।

राजीव गांधी की मौत के बाद बदली जिंदगी

राजीव गांधी की हत्या सोनिया गांधी के जीवन की सबसे बड़ी त्रासद घटनाओं में से एक रही। उनके पति की मौत के बाद उनका जीवन पूरी तरह बदल गया। सार्वजनिक जीवन और राजनीति से दूरी बनाए रखने की उनकी कोशिशों के बावजूद परिस्थितियां उन्हें धीरे-धीरे राजनीति के केंद्र में ले आईं।

सोनिया गांधी ने लंबे समय तक सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखी। बाद में उन्होंने कांग्रेस की कमान संभाली और राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आत्मकथा में इस बदलाव की व्यक्तिगत वजहों और उन परिस्थितियों पर भी प्रकाश डाला गया है, जिनके कारण उन्होंने सार्वजनिक जीवन में अपनी भूमिका को स्वीकार किया।

2004 में प्रधानमंत्री पद स्वीकार करने से इनकार

सोनिया गांधी के राजनीतिक जीवन का सबसे चर्चित प्रसंग वर्ष 2004 का रहा, जब कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन ने लोकसभा चुनाव में सफलता हासिल की। उस समय सोनिया गांधी को प्रधानमंत्री पद के लिए स्वाभाविक दावेदार माना जा रहा था। हालांकि, उन्होंने प्रधानमंत्री पद स्वीकार नहीं किया।

इसके बजाय उन्होंने डॉ. मनमोहन सिंह को सरकार का नेतृत्व करने के लिए आगे किया। सोनिया गांधी के इस निर्णय ने भारतीय राजनीति में व्यापक चर्चा पैदा की थी। आत्मकथा में इस महत्वपूर्ण फैसले और उससे जुड़े व्यक्तिगत तथा राजनीतिक पहलुओं को भी जगह दी गई है।

छह दशकों के भारत की कहानी

‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ को केवल व्यक्तिगत संस्मरण नहीं माना जा रहा है। किताब के माध्यम से सोनिया गांधी भारत में पिछले करीब 60 वर्षों के दौरान आए सामाजिक और आर्थिक बदलावों को भी देखने का प्रयास करती हैं।

एक विदेशी मूल की युवती के भारत आने से लेकर देश के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवार का हिस्सा बनने और फिर राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने तक की उनकी यात्रा अपने आप में भारत के कई दौरों को जोड़ती है। इसलिए उनकी व्यक्तिगत कहानी के साथ-साथ देश के बदलते राजनीतिक और सामाजिक परिवेश की झलक भी आत्मकथा में दिखाई दे सकती है।

निजी अनुभवों को सार्वजनिक करने की चुनौती

सोनिया गांधी ने अपने जीवन के बारे में सार्वजनिक रूप से बहुत कम विस्तार से बात की है। यही कारण है कि उनकी आत्मकथा को लेकर राजनीतिक और साहित्यिक दोनों स्तरों पर उत्सुकता बनी हुई है। उन्होंने संकेत दिया है कि अपने जीवन के बारे में लिखना उनके लिए आसान नहीं था।

दरअसल, आत्मकथा लिखने का अर्थ उन निजी अनुभवों और भावनाओं को सार्वजनिक करना था, जिन्हें उन्होंने वर्षों तक अपने भीतर रखा। अपनों को खोने, परिवार में आए बदलावों और सार्वजनिक जीवन की जिम्मेदारियों ने उनके जीवन को कई स्तरों पर प्रभावित किया।

इस लिहाज से ‘बिलॉन्गिंग: अ जर्नी ऑफ लव’ सोनिया गांधी के राजनीतिक जीवन का दस्तावेज होने के साथ-साथ उनके निजी सफर की कहानी भी है। किताब में इटली के बचपन से शुरू होकर कैम्ब्रिज, राजीव गांधी से मुलाकात, भारत आगमन, गांधी परिवार में प्रवेश, व्यक्तिगत दुखों और राजनीति तक पहुंचने की पूरी यात्रा को समझने का अवसर मिलेगा।

नवंबर में किताब के प्रकाशित होने के बाद पाठकों को सोनिया गांधी के जीवन के उन पहलुओं को करीब से जानने का मौका मिलेगा, जिन्हें उन्होंने अब तक सार्वजनिक मंचों से काफी हद तक निजी रखा है।

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