बदायूं में 15.50 लाख रुपये की रहस्यमयी चोरी, बंद अलमारी से गायब हुई नकदी, जांच में जुटी पुलिस
Digital UP News Desk
बदायूं: उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले के बिसौली कस्बे में 15.50 लाख रुपये की रहस्यमयी चोरी का मामला सामने आया है। चोरी की इस घटना ने पुलिस को भी उलझन में डाल दिया है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जिस अलमारी में लाखों रुपये रखे गए थे, उसका ताला बंद मिला। वहीं, घर के किसी भी दरवाजे या ताले पर जबरन प्रवेश किए जाने के स्पष्ट निशान नहीं मिले। इसके बावजूद अलमारी में रखी करीब 15.50 लाख रुपये की नकदी में से लगभग पूरी रकम गायब हो गई और अंदर सिर्फ 400 रुपये मिले।
मामला बिसौली कस्बे के मोहल्ला पक्की सराय का है। यहां रहने वाले टिम्बर कारोबारी इरसाद अली ने पुलिस को बताया कि उन्होंने हाल ही में एक प्लॉट बेचा था। इस प्लॉट की बिक्री से उन्हें करीब 10 लाख रुपये प्राप्त हुए थे। इसके अलावा कारोबार से जुड़ी नकदी भी उनके पास थी। दोनों रकम को मिलाकर करीब 15.50 लाख रुपये उन्होंने घर की अलमारी में रखे थे।
परिवार के घर से बाहर जाने के बाद सामने आई चोरी
बताया जा रहा है कि घटना वाले दिन इरसाद अली अपनी पत्नी, तीन बच्चों और बहन के साथ फैजगंज स्थित रिश्तेदारी में गए थे। परिवार के अनुसार, सभी लोग करीब तीन घंटे तक घर से बाहर रहे। इसके बाद वे वापस घर लौट आए। उस समय परिवार को घर में किसी तरह की गड़बड़ी दिखाई नहीं दी।
अगले दिन जब इरसाद अली की पत्नी ने अलमारी खोली तो नकदी गायब देखकर परिवार के लोग हैरान रह गए। अलमारी में रखी करीब 15.50 लाख रुपये की रकम में से लगभग पूरी नकदी गायब थी। केवल 400 रुपये अंदर रखे मिले। इसके बाद परिवार ने घर के दरवाजे, ताले और अन्य स्थानों को देखा, लेकिन जबरन प्रवेश के कोई स्पष्ट निशान नहीं मिले।
मामले की जानकारी तत्काल डायल-112 के माध्यम से पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण शुरू किया।
एसपी देहात समेत कई टीमें जांच में जुटीं
लाखों रुपये की चोरी की सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लिया। एसपी देहात डॉ. हृदेश कठेरिया, सीओ अंशुमन श्रीवास्तव और स्थानीय पुलिस टीम मौके पर पहुंची। इसके साथ ही एसओजी टीम और डॉग स्क्वॉड को भी जांच में लगाया गया।
पुलिस ने घर के अंदर और आसपास के क्षेत्र का बारीकी से निरीक्षण किया। अलमारी, दरवाजों और ताले की स्थिति को देखा गया। इसके अलावा यह पता लगाने का प्रयास किया गया कि कहीं किसी रास्ते से घर में प्रवेश तो नहीं किया गया था।
हालांकि, देर रात तक चली जांच के बाद भी पुलिस को ऐसा कोई ठोस सुराग नहीं मिला, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि घर में प्रवेश किस तरह हुआ और अलमारी में रखी नकदी आखिर किसने निकाली।
बंद अलमारी और गायब नकदी ने बढ़ाई पुलिस की परेशानी
इस मामले की सबसे अहम कड़ी अलमारी को माना जा रहा है। परिवार के अनुसार, अलमारी में रकम रखी गई थी और बाद में उसका ताला बंद मिला। ऐसे में पुलिस के सामने यह सवाल है कि नकदी अलमारी से किस तरह बाहर निकाली गई।
आमतौर पर चोरी की घटनाओं में घर के दरवाजे, खिड़की या ताले पर छेड़छाड़ के निशान मिल जाते हैं। लेकिन इस मामले में ऐसा कोई स्पष्ट निशान सामने नहीं आया है। इसलिए पुलिस अब चोरी की सामान्य संभावना के साथ-साथ अंदरूनी जानकारी रखने वाले व्यक्ति की भूमिका की भी जांच कर रही है।
हालांकि, जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति पर संदेह करना उचित नहीं होगा। पुलिस सभी संभावित पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की पड़ताल कर रही है।
प्लॉट की बिक्री से मिली रकम भी जांच का अहम हिस्सा
इरसाद अली के मुताबिक, हाल ही में प्लॉट बेचने के बाद उन्हें 10 लाख रुपये मिले थे। यह रकम उनके कारोबार की नकदी के साथ घर की अलमारी में रखी गई थी। पुलिस अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इतनी बड़ी रकम घर में रखे जाने की जानकारी किन-किन लोगों को थी।
इसके अलावा पुलिस घटना से पहले और बाद की परिस्थितियों को भी जोड़कर देख रही है। परिवार कब घर से निकला, कितनी देर बाहर रहा और वापस आने के बाद क्या-क्या हुआ, इन सभी बिंदुओं की जानकारी जुटाई जा रही है।
यदि किसी बाहरी व्यक्ति को परिवार की दिनचर्या या घर में रखी रकम की जानकारी थी, तो यह जांच में महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है। फिर भी, फिलहाल पुलिस ने किसी संभावित आरोपी के संबंध में कोई आधिकारिक निष्कर्ष नहीं दिया है।
लिखित तहरीर में देरी से भी उठे सवाल
मामले में एक अन्य पहलू भी पुलिस की जांच का हिस्सा बना हुआ है। घटना के बाद पीड़ित परिवार की ओर से तत्काल लिखित तहरीर नहीं दिए जाने की बात सामने आई है। इसके कारण पुलिस घटना के पूरे क्रम को और अधिक विस्तार से समझने का प्रयास कर रही है।
पुलिस यह जानना चाहती है कि चोरी का पता कब चला और उसके बाद परिवार ने किन परिस्थितियों में पुलिस को सूचना दी। साथ ही, नकदी के संबंध में उपलब्ध जानकारी और रकम के स्रोत की भी आवश्यक जांच की जा सकती है।
लाखों रुपये की रकम होने के कारण पुलिस इस मामले में हर तथ्य को सावधानी से जोड़ रही है। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले घटनास्थल और संबंधित लोगों से मिली जानकारी का मिलान किया जा रहा है।
सीसीटीवी और आसपास की गतिविधियों की भी पड़ताल संभव
मामले की जांच में आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी अहम साबित हो सकती है। यदि घटनास्थल के आसपास किसी घर, दुकान या रास्ते पर कैमरे लगे हैं, तो पुलिस उनके जरिए घटना के समय की गतिविधियों का पता लगा सकती है।
इसके अलावा पुलिस यह भी जांच कर सकती है कि परिवार के घर से बाहर रहने के दौरान आसपास किसी संदिग्ध व्यक्ति की गतिविधि तो नहीं हुई। एसओजी टीम द्वारा स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाई जा रही है।
वहीं, डॉग स्क्वॉड की मदद से भी घटनास्थल के आसपास संभावित सुराग तलाशे गए हैं। हालांकि, अभी तक पुलिस के हाथ ऐसा कोई निर्णायक सबूत नहीं लगा है, जिससे चोरी की पूरी तस्वीर साफ हो सके।
सामान्य चोरी से अलग नजर आ रहा मामला
बिसौली में सामने आई यह घटना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसमें चोरी की सामान्य परिस्थितियां दिखाई नहीं दे रही हैं। एक तरफ अलमारी में रखी बड़ी रकम गायब है, वहीं दूसरी तरफ घर में जबरन प्रवेश के निशान नहीं हैं। इसके अलावा अलमारी भी बंद मिली।
यही परिस्थितियां पुलिस के सामने कई सवाल खड़े कर रही हैं। क्या किसी ऐसे व्यक्ति ने रकम निकाली, जिसे घर की व्यवस्था और अलमारी के बारे में जानकारी थी? क्या नकदी रखने की जानकारी पहले से किसी को थी? या फिर घटना के पीछे कोई दूसरा कारण है? इन सभी सवालों का जवाब पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही मिल सकेगा।
पुलिस को जांच पूरी होने का इंतजार
फिलहाल बिसौली पुलिस इस मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध तथ्यों की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। इसके साथ ही घटनास्थल से मिले सुरागों और संबंधित लोगों से प्राप्त जानकारी का भी विश्लेषण किया जा रहा है।
जांच आगे बढ़ने के साथ यह पता चलने की उम्मीद है कि 15.50 लाख रुपये की नकदी आखिर किस तरह गायब हुई। फिलहाल पुलिस ने मामले में किसी भी संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया है।
इस रहस्यमयी चोरी ने बिसौली ही नहीं, बल्कि पूरे बदायूं में चर्चा जरूर बढ़ा दी है। हालांकि, पुलिस की जांच पूरी होने से पहले घटना को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। अब सभी की नजर पुलिस की अगली कार्रवाई और जांच से सामने आने वाले तथ्यों पर है।

