आजमगढ़ में शिक्षणेत्तर कर्मचारियों ने दिया धरना, 11 सूत्रीय मांगों में कैशलेस चिकित्सा की रखी मांग और जानिए विस्तार से

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रिपोर्ट – पित्तेश्वर कुमार 

आजमगढ़: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षणेत्तर संघ के आह्वान पर बुधवार को आजमगढ़ जिले के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षणेत्तर कर्मचारियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय पर एक दिवसीय धरना दिया। इस दौरान कर्मचारियों ने शासन से लंबे समय से लंबित मांगों पर जल्द शासनादेश जारी करने की मांग उठाई।

धरने में शामिल कर्मचारियों ने अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर आवाज उठाई। इनमें अर्हताधारी शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को शिक्षक पद पर पदोन्नति का प्रावधान, सेवानिवृत्ति पर 300 दिन के अर्जित अवकाश के नकदीकरण, कैशलेस चिकित्सा सुविधा, पदोन्नति में वेतन वृद्धि और पुरानी पेंशन योजना जैसी प्रमुख मांगें शामिल रहीं।

धरने के बाद संघ की ओर से मुख्यमंत्री और जिला विद्यालय निरीक्षक को संबोधित ज्ञापन भी सौंपा गया। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि उनकी मांगों को लेकर पूर्व में शासन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ कई दौर की वार्ता हो चुकी है। इस दौरान मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया, लेकिन अब तक अपेक्षित शासनादेश जारी नहीं किए गए हैं।

11 सूत्रीय मांगों को लेकर कर्मचारियों ने उठाई आवाज

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षणेत्तर संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत लिपिक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी विद्यालयों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद उन्हें कई ऐसी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है, जो कर्मचारियों के हित से जुड़ी हैं।

इसी को लेकर संगठन ने 11 सूत्रीय मांगों को प्रमुखता से उठाया। कर्मचारियों ने कहा कि उनकी मांगें लंबे समय से शासन स्तर पर लंबित हैं। इसलिए अब इन पर स्पष्ट निर्णय लेकर शासनादेश जारी किया जाना चाहिए।

धरने के दौरान जिला अध्यक्ष इंद्रासन सिंह ने कहा कि अर्हताधारी शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को शिक्षक पद पर पदोन्नति का प्रावधान मिलना चाहिए। इसके अलावा सेवानिवृत्ति के समय राजकीय कर्मचारियों की तरह 300 दिन के अर्जित अवकाश के नकदीकरण की सुविधा भी दिए जाने की मांग की गई।

कैशलेस चिकित्सा सुविधा की मांग प्रमुख

कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में कैशलेस चिकित्सा सुविधा भी शामिल रही। संघ ने शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी कैशलेस इलाज की सुविधा का लाभ दिए जाने की मांग की।

संगठन के अनुसार, 5 सितंबर 2025 को सरकार की ओर से विभिन्न श्रेणियों के शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा की घोषणा की गई थी। इसके बाद 4 फरवरी 2026 को जारी शासनादेश में अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के लिपिक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को इस सुविधा से बाहर रखे जाने पर संघ ने आपत्ति जताई।

कर्मचारियों का कहना है कि वे विद्यालयों में शिक्षकों के साथ मिलकर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाते हैं। ऐसे में चिकित्सा जैसी मूलभूत सुविधा के मामले में भी समानता होनी चाहिए। इसलिए उन्हें कैशलेस चिकित्सा सुविधा के दायरे में शामिल करने की मांग की गई है।

विद्यालय प्रबंध समिति में प्रतिनिधित्व की मांग

धरने के दौरान शिक्षणेत्तर कर्मचारियों ने विद्यालय प्रबंध समिति में प्रतिनिधित्व दिए जाने की मांग भी उठाई। संघ का कहना है कि विद्यालय के प्रशासनिक और दैनिक संचालन में लिपिक एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।

ऐसे में शिक्षकों की तरह शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी विद्यालय प्रबंध समिति में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। इसके साथ ही राष्ट्रपति और राज्य पुरस्कारों में शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए भी प्रावधान किए जाने की मांग की गई।

संघ का कहना है कि कर्मचारियों के योगदान को देखते हुए उन्हें प्रोत्साहन और सम्मान के अवसर भी उपलब्ध कराए जाने चाहिए।

CCC प्रमाणपत्र की शर्त खत्म करने की मांग

शिक्षणेत्तर कर्मचारियों ने चतुर्थ श्रेणी से लिपिक पद पर पदोन्नति के लिए अनिवार्य किए गए CCC प्रमाणपत्र की शर्त को समाप्त करने की मांग की। संगठन के अनुसार, इस शर्त के कारण पदोन्नति की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

इसके अलावा हाईस्कूल और इंटरमीडिएट विद्यालयों के लिपिकों की वेतन विसंगति दूर करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही। कर्मचारियों ने रोके गए विभिन्न भत्तों को बहाल करने की मांग उठाते हुए कहा कि इससे कर्मचारियों को आर्थिक राहत मिल सकती है।

साथ ही वर्ष 2014 के बाद नियुक्त शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की सामूहिक बीमा कटौती किए जाने की मांग भी रखी गई।

पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग

संघ ने 1 अप्रैल 2005 के बाद नियुक्त अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों पर पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग भी की।

कर्मचारियों का कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्था उनके लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए पुरानी पेंशन योजना को लेकर शासन स्तर पर सकारात्मक निर्णय लिया जाना चाहिए।

इसके अलावा चतुर्थ श्रेणी से कनिष्ठ सहायक और कनिष्ठ सहायक से वरिष्ठ सहायक पद पर पदोन्नति होने पर पहले की तरह एक वेतन वृद्धि का लाभ दिए जाने की मांग भी की गई।

नियमित नियुक्तियां शुरू करने की मांग

शिक्षणेत्तर कर्मचारियों ने लंबे समय से लिपिक और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नियमित नियुक्तियां नहीं होने का मुद्दा भी उठाया। संघ ने मांग की कि इन पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया दोबारा शुरू की जाए।

संगठन का कहना है कि विद्यालयों में कर्मचारियों की आवश्यकता के बावजूद लंबे समय से नियमित नियुक्तियां नहीं होने से मौजूदा कर्मचारियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं। इसलिए रिक्त पदों पर नियमानुसार नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करना जरूरी है।

इसके अलावा आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए भी मांगें रखी गईं। संघ ने कहा कि ऐसे कर्मचारियों का विभाग द्वारा देय वेतन सीधे कोषागार के माध्यम से उनके बैंक खातों में भेजा जाना चाहिए।

साथ ही आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा के लिए स्पष्ट नियमावली बनाए जाने की मांग भी की गई।

पूर्व में हो चुकी है मांगों पर वार्ता

संघ पदाधिकारियों का कहना है कि कर्मचारियों की समस्याओं और मांगों को लेकर शासन तथा शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ पहले भी कई बार वार्ता हो चुकी है। इन वार्ताओं के दौरान विभिन्न मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था।

हालांकि, कर्मचारियों का दावा है कि आश्वासन के बावजूद अभी तक अपेक्षित शासनादेश जारी नहीं हुए हैं। इसी कारण संगठन ने धरने के माध्यम से एक बार फिर अपनी मांगों को शासन तक पहुंचाया है।

कर्मचारियों ने उम्मीद जताई कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी और लंबित मामलों में जल्द निर्णय लिया जाएगा।

ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग

एक दिवसीय धरने के बाद संघ की ओर से मुख्यमंत्री और जिला विद्यालय निरीक्षक को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया। इसमें सभी 11 मांगों को शामिल करते हुए शासन स्तर पर जल्द कार्रवाई की मांग की गई।

ज्ञापन के माध्यम से कर्मचारियों ने कहा कि उनकी मांगों का समाधान होने से अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को राहत मिलेगी। साथ ही कर्मचारियों से जुड़े कई लंबित विषयों का समाधान भी हो सकेगा।

धरने में संगठन के पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठाई। इस दौरान कैशलेस चिकित्सा सुविधा को विशेष रूप से प्रमुख मुद्दे के तौर पर रखा गया।

आगे की रणनीति तय करने की चेतावनी

धरने के दौरान संघ पदाधिकारियों ने कहा कि यदि शासन की ओर से उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती है तो संगठन आगे की रणनीति तय करेगा। हालांकि, फिलहाल कर्मचारियों ने शासन से सकारात्मक निर्णय की उम्मीद जताई है।

कुल मिलाकर, आजमगढ़ में शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का यह धरना उनकी लंबित सेवा संबंधी मांगों को लेकर आयोजित किया गया। 11 सूत्रीय मांगों में कैशलेस चिकित्सा सुविधा, पदोन्नति, पुरानी पेंशन, वेतन विसंगति दूर करने, भत्तों की बहाली और नियमित नियुक्तियां शुरू करने जैसे मुद्दे शामिल रहे।

अब कर्मचारियों की नजर शासन के अगले कदम पर है। यदि इन मांगों पर शासनादेश जारी होते हैं तो इससे अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है।