जनगणना 2027: 40 सवालों में दर्ज होगी जाति, आधार से लेकर मोबाइल और वैक्सीन तक की जानकारी

WhatsApp Image 2026-08-14 at 2.57.32 PM

Digital UP News Desk

नई दिल्ली: भारत की आगामी जनगणना-2027 कई मायनों में महत्वपूर्ण होने जा रही है। इस बार जनगणना में जाति से जुड़ी जानकारी भी दर्ज की जाएगी। केंद्र सरकार ने जनगणना की प्रक्रिया को डिजिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। आधिकारिक जनगणना पोर्टल पर जारी प्रश्नावली में नाम, उम्र, वैवाहिक स्थिति, भाषा, धर्म, शिक्षा और रोजगार से जुड़े सवालों के साथ जाति/जनजाति से संबंधित जानकारी भी शामिल है। सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि जनगणना-2027 के दूसरे चरण में जाति की गणना की जाएगी।

जनगणना-2027 इसलिए भी खास है क्योंकि यह देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी। इसमें गणनाकर्मियों के मोबाइल ऐप के जरिए डेटा दर्ज करने के साथ नागरिकों को Self-Enumeration यानी स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करने की सुविधा भी दी जाएगी। सरकार के मुताबिक, जनगणना की प्रक्रिया Census Act, 1948 और Census Rules, 1990 के प्रावधानों के तहत संचालित होगी।

जाति की जानकारी होगी जनगणना का अहम हिस्सा

जनगणना-2027 में जाति की गणना को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। केंद्र सरकार ने जून 2025 में घोषणा की थी कि 2027 की जनगणना में जातियों की गणना भी की जाएगी। इसके बाद गृह मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि जाति से संबंधित जानकारी जनगणना के दूसरे चरण यानी Population Enumeration में शामिल की जाएगी।

आधिकारिक प्रश्नावली में जाति/जनजाति का नाम दर्ज करने के लिए सवाल नंबर 10 रखा गया है। इससे जनगणना में सामाजिक संरचना से संबंधित अधिक विस्तृत आंकड़े जुटाने का रास्ता खुलता है। हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की गणना संबंधित अधिसूचित सूचियों के आधार पर की जाएगी।

इस जानकारी का उपयोग देश की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को समझने, विभिन्न समुदायों से संबंधित नीतियां तैयार करने तथा सरकारी योजनाओं की बेहतर योजना बनाने में किया जा सकता है।

पहचान से लेकर परिवार तक की जानकारी

जनगणना के दौरान प्रत्येक व्यक्ति से उसकी बुनियादी पहचान और पारिवारिक स्थिति से संबंधित जानकारी ली जाएगी। इसमें नाम, परिवार के मुखिया से संबंध, लिंग, उम्र, वैवाहिक स्थिति, मातृभाषा, अन्य भाषाएं और धर्म जैसे सवाल शामिल हैं। इसके अलावा जाति/जनजाति से जुड़ी जानकारी भी दर्ज की जाएगी।

इस तरह जनगणना केवल देश की आबादी की संख्या निर्धारित करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भी पता लगाने में मदद करेगी कि देश में रहने वाली आबादी की सामाजिक, भाषाई और शैक्षिक स्थिति कैसी है।

इसके साथ ही परिवार और व्यक्ति से जुड़ी अन्य जरूरी जानकारियां भी दर्ज की जाएंगी। इससे भविष्य में जनसंख्या के विभिन्न वर्गों के लिए नीतियां तैयार करने में सरकारी एजेंसियों को आंकड़ों का आधार मिल सकेगा।

शिक्षा और डिजिटल साक्षरता पर भी फोकस

जनगणना-2027 में शिक्षा से संबंधित जानकारी को भी प्रमुखता दी गई है। व्यक्ति साक्षर है या नहीं, उसने कितनी शिक्षा प्राप्त की है और वह स्कूल या कॉलेज में पढ़ रहा है या नहीं, जैसे सवाल पूछे जाएंगे। आधिकारिक प्रश्नावली में शिक्षा और स्कूल/कॉलेज में भागीदारी से जुड़े सवाल शामिल हैं।

आज के डिजिटल दौर को देखते हुए डिजिटल साक्षरता भी महत्वपूर्ण विषय बन चुकी है। ऐसे में जनगणना से प्राप्त आंकड़े देश में शिक्षा और डिजिटल पहुंच की स्थिति को समझने में उपयोगी साबित हो सकते हैं। खासकर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच डिजिटल पहुंच के अंतर को समझने में इन आंकड़ों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

रोजगार और आर्थिक गतिविधि की भी होगी जानकारी

जनगणना-2027 में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े सवाल भी पूछे जाएंगे। व्यक्ति ने पिछले वर्ष किसी समय काम किया था या नहीं, उसकी मुख्य गतिविधि क्या रही और वह किस प्रकार के काम से जुड़ा था, जैसी जानकारी दर्ज की जाएगी।

इसके जरिए देश में रोजगार की स्थिति, कामगारों की संरचना और अलग-अलग क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों की तस्वीर सामने आ सकती है। इसके अलावा काम की प्रकृति और रोजगार से जुड़ी अन्य जानकारी भविष्य की योजनाओं और नीतियों के लिए आधार उपलब्ध करा सकती है।

जन्मस्थान और माइग्रेशन की जानकारी

जनगणना में लोगों के जन्मस्थान और निवास से जुड़ी जानकारी भी महत्वपूर्ण होगी। किसी व्यक्ति का जन्म कहां हुआ, वह वर्तमान स्थान पर कब से रह रहा है और यदि उसने स्थान बदला है तो उसके पीछे क्या कारण था—इस तरह के सवालों के जरिए देश में माइग्रेशन यानी पलायन की स्थिति को समझने में मदद मिल सकती है।

भारत में रोजगार, शिक्षा, विवाह और अन्य कारणों से एक राज्य या शहर से दूसरे स्थान पर जाने की प्रवृत्ति लंबे समय से रही है। इसलिए जनगणना से मिलने वाले माइग्रेशन संबंधी आंकड़े शहरीकरण, आवास, रोजगार और सार्वजनिक सेवाओं की योजना बनाने में उपयोगी हो सकते हैं।

डिजिटल जनगणना में Self-Enumeration की सुविधा

जनगणना-2027 की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक इसका डिजिटल स्वरूप है। सरकार के अनुसार गणनाकर्मी मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए डेटा दर्ज करेंगे। साथ ही नागरिकों को Self-Enumeration की सुविधा भी दी गई है। इसका मतलब है कि पात्र व्यक्ति निर्धारित ऑनलाइन व्यवस्था के जरिए अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर सकता है।

हालांकि, स्वयं जानकारी दर्ज करने के बाद गणनाकर्मियों द्वारा डेटा की पुष्टि की जाएगी। सरकार का उद्देश्य डिजिटल तकनीक के माध्यम से जनगणना की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाना है।

पहले चरण यानी House Listing and Housing Census के सवाल जनवरी 2026 में अधिसूचित किए जा चुके हैं। वहीं दूसरे चरण में प्रत्येक व्यक्ति से संबंधित जनसांख्यिकीय, सामाजिक-आर्थिक, शिक्षा, माइग्रेशन और अन्य जानकारी जुटाई जाएगी। जाति की गणना भी इसी दूसरे चरण में होगी।

कब होगी जनगणना-2027?

सरकार के अनुसार जनगणना दो चरणों में आयोजित की जाएगी। पहला चरण यानी मकान सूचीकरण एवं मकान गणना अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सुविधा के अनुसार कराया जाना है। दूसरा चरण यानी Population Enumeration फरवरी 2027 में होगा। कुछ हिमाच्छादित क्षेत्रों के लिए अलग समय-सारिणी निर्धारित की गई है।

जनगणना-2027 की सामान्य संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 की मध्यरात्रि निर्धारित की गई है। वहीं लद्दाख तथा जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ गैर-समकालिक हिमाच्छादित क्षेत्रों के लिए संदर्भ तिथि 1 अक्टूबर 2026 रखी गई है।

व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता का प्रावधान

जनगणना में लोगों से बड़ी मात्रा में व्यक्तिगत जानकारी जुटाई जाती है। ऐसे में डेटा की गोपनीयता भी महत्वपूर्ण विषय है। सरकार ने कहा है कि जनगणना से संबंधित व्यक्तिगत जानकारी को कानून के तहत गोपनीय रखा जाता है। Census Act, 1948 के प्रावधानों के तहत जनगणना रिकॉर्ड की गोपनीयता सुनिश्चित करने की व्यवस्था है।

इसलिए जनगणना-2027 केवल आबादी की गिनती की प्रक्रिया नहीं होगी, बल्कि यह भारत की सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक और जनसांख्यिकीय तस्वीर तैयार करने का एक बड़ा प्रयास होगी। खास तौर पर जाति की गणना, डिजिटल प्रक्रिया और Self-Enumeration जैसी सुविधाएं इसे पिछली जनगणनाओं से अलग बनाती हैं।

You may have missed