कानपुर में ‘मिशन सेफ फ्यूचर 2.0’ के तहत 10 स्कूली वाहनों पर कार्रवाई, फिटनेस को लेकर चेतावनी
रिपोर्ट – हरी शंकर शर्मा
कानपुर: स्कूली बच्चों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर पूरे प्रदेश में ‘मिशन सेफ फ्यूचर 2.0’ अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में मंगलवार को कानपुर में परिवहन विभाग के प्रवर्तन अधिकारियों ने स्कूली वाहनों की जांच करते हुए 10 वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की। अधिकारियों ने स्कूल प्रबंधकों को वाहनों की फिटनेस बनाए रखने और सभी जरूरी सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
यह अभियान 11 अगस्त से 25 अगस्त 2026 तक चलाया जाएगा। अभियान का मुख्य उद्देश्य स्कूली बच्चों को सुरक्षित परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना और नियमों का पालन नहीं करने वाले स्कूली वाहनों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
स्कूली वाहनों की जांच के लिए अभियान
कानपुर मंडल आरटीओ प्रवर्तन अधिकारी राहुल श्रीवास्तव ने बताया कि शासन की ओर से ‘मिशन सेफ फ्यूचर 2.0’ के संचालन के संबंध में निर्देश प्राप्त हुए हैं। इसके बाद परिवहन विभाग के प्रवर्तन अधिकारियों ने अभियान के तहत स्कूली वाहनों की जांच शुरू की।
मंगलवार को हुई कार्रवाई के दौरान कुल 10 स्कूली वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की गई। अधिकारियों ने वाहनों की स्थिति और आवश्यक दस्तावेजों से जुड़े पहलुओं की जांच की।
परिवहन विभाग की ओर से स्कूल प्रबंधकों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि बच्चों को लाने-ले जाने वाले वाहनों की फिटनेस वैध हो और उनमें निर्धारित सुरक्षा उपकरण मौजूद हों।
स्कूल प्रबंधकों को जारी किए गए नोटिस
जांच के दौरान जिन स्कूली वाहनों में कमियां पाई गईं, उनके संबंध में स्कूल प्रबंधकों को नोटिस जारी किए गए हैं। विभाग की ओर से वाहन की फिटनेस और जरूरी सुरक्षा मानकों को पूरा कराने के निर्देश दिए गए।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि स्कूली बच्चों को ले जाने वाले वाहनों में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। इसलिए स्कूल प्रबंधन को वाहनों के दस्तावेज, फिटनेस और आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाओं को समय से पूरा कराने के लिए कहा गया है।
अधिकारियों के अनुसार, अभियान का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं, बल्कि स्कूल प्रबंधन को सुरक्षा मानकों के प्रति जागरूक करना भी है।
जुलाई में भी चला था अभियान
परिवहन विभाग के अनुसार, इससे पहले जुलाई महीने में भी ‘मिशन सेफ फ्यूचर’ अभियान चलाया गया था। उस दौरान अधिकारियों ने कई स्कूलों में जाकर स्कूली वाहनों का निरीक्षण किया था।
निरीक्षण के दौरान वाहनों में पाई गई कमियों को दूर करने के लिए स्कूल प्रबंधकों को निर्देश दिए गए थे। विभाग की ओर से वाहन फिटनेस, आवश्यक दस्तावेज और सुरक्षा उपकरणों से संबंधित मानकों का पालन करने के लिए कहा गया था।
इसके बावजूद कुछ स्कूल संचालकों द्वारा पहले दिए गए निर्देशों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं किए जाने की बात सामने आई। इसी को देखते हुए अब ‘मिशन सेफ फ्यूचर 2.0’ अभियान के तहत दोबारा जांच और प्रवर्तन कार्रवाई की जा रही है।
10 स्कूली वाहनों पर हुई कार्रवाई
मंगलवार को अभियान के दौरान प्रवर्तन अधिकारियों ने विभिन्न स्थानों पर स्कूली वाहनों की जांच की। इस दौरान कुल 10 वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
अधिकारियों ने स्कूल संचालकों को चेतावनी दी कि यदि वाहन बिना आवश्यक दस्तावेजों, वैध फिटनेस या निर्धारित सुरक्षा मानकों के सड़क पर संचालित पाए गए, तो उनके खिलाफ आगे की कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
परिवहन विभाग की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि नियमों का पालन नहीं करने वाले वाहनों को आवश्यकता पड़ने पर सीज करने की कार्रवाई की जा सकती है।
इस चेतावनी का उद्देश्य स्कूल संचालकों को अपने वाहनों की स्थिति समय रहते ठीक कराने के लिए प्रेरित करना है, ताकि बच्चों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
बच्चों की सुरक्षा पर विशेष जोर
स्कूली वाहनों में रोजाना बड़ी संख्या में बच्चे यात्रा करते हैं। ऐसे में वाहनों की फिटनेस और सुरक्षा व्यवस्था का सीधा संबंध बच्चों की सुरक्षित यात्रा से है।
इसी वजह से परिवहन विभाग की ओर से अभियान में स्कूली वाहनों को प्राथमिकता दी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि बच्चों को ले जाने वाले वाहनों की नियमित जांच कराई जाए और आवश्यक मानकों को पूरा किया जाए।
इसके साथ ही वाहनों के चालक और परिचालक से संबंधित जरूरी दस्तावेजों और अन्य निर्धारित नियमों का भी पालन सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।
नियमों की अनदेखी पर होगी कार्रवाई
अभियान के दौरान परिवहन विभाग ने स्कूल संचालकों को स्पष्ट संदेश दिया है कि स्कूली वाहनों के संचालन में नियमों की अनदेखी नहीं की जा सकती।
यदि कोई वाहन बिना पूरे प्रपत्र, वैध फिटनेस या निर्धारित सुरक्षा मानकों के सड़क पर चलता पाया जाता है, तो विभाग द्वारा नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। गंभीर कमियों की स्थिति में वाहन को सीज करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
इसलिए स्कूल प्रबंधन को सलाह दी गई है कि वे अपने सभी वाहनों की स्थिति की जांच कराएं और यदि कोई कमी है तो उसे तत्काल दूर कराएं।
फिटनेस और सुरक्षा उपकरण जरूरी
स्कूली वाहन केवल परिवहन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि उनमें बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। इसलिए वाहनों की फिटनेस के साथ-साथ आवश्यक सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता महत्वपूर्ण है।
परिवहन विभाग की ओर से स्कूल प्रबंधकों को वाहनों को फिट रखने और निर्धारित उपकरणों से लैस रखने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि वाहन की तकनीकी स्थिति सही होने के साथ-साथ आवश्यक दस्तावेज भी अद्यतन होने चाहिए। इससे जांच के दौरान किसी प्रकार की समस्या से बचा जा सकता है और बच्चों की यात्रा अधिक सुरक्षित बनाई जा सकती है।
स्कूल संचालकों को जिम्मेदारी निभाने की अपील
परिवहन विभाग ने स्कूल संचालकों से अपील की है कि वे अभियान को केवल कार्रवाई के रूप में न देखें, बल्कि इसे बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारी के रूप में लें।
स्कूल प्रबंधन को अपने वाहनों की समय-समय पर जांच कराने, फिटनेस प्रमाणपत्र की वैधता सुनिश्चित करने और सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा, जिन वाहनों में पहले कमियां पाई गई थीं, उन्हें दोबारा सड़क पर उतारने से पहले आवश्यक सुधार कराना भी जरूरी है।
अभियान में कई अधिकारी रहे मौजूद
‘मिशन सेफ फ्यूचर 2.0’ के तहत मंगलवार को हुई कार्रवाई में परिवहन विभाग के कई अधिकारी शामिल रहे। अभियान में एआरटीओ प्रवर्तन कहकशां खातून, सोमलता यादव, पीटीओ दीपक सिंह और डी.के. सिंह समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
अधिकारियों ने स्कूली वाहनों की जांच के साथ-साथ स्कूल प्रबंधकों को सुरक्षा मानकों का पालन करने के संबंध में आवश्यक जानकारी भी दी।
विभाग की ओर से आने वाले दिनों में भी अभियान जारी रखने की बात कही गई है।
25 अगस्त तक चलेगा अभियान
‘मिशन सेफ फ्यूचर 2.0’ अभियान 11 अगस्त से शुरू होकर 25 अगस्त तक चलाया जाएगा। इस दौरान स्कूली वाहनों की जांच और नियमों के पालन की स्थिति पर नजर रखी जाएगी।
परिवहन विभाग की कार्रवाई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों को स्कूल आने-जाने के लिए इस्तेमाल होने वाले वाहन निर्धारित मानकों के अनुरूप हों।
जुलाई में चलाए गए अभियान के बाद भी जिन वाहनों या स्कूल प्रबंधकों द्वारा कमियों को दूर नहीं किया गया, उनके खिलाफ अब कार्रवाई की जा रही है। आगे भी जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
सुरक्षित परिवहन के लिए जरूरी है सहयोग
स्कूली बच्चों की सुरक्षा केवल परिवहन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें स्कूल प्रबंधन, वाहन संचालक, चालक और अभिभावकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
स्कूल प्रबंधन को वाहनों की फिटनेस और दस्तावेजों की नियमित जांच करनी चाहिए। वहीं, अभिभावकों को भी बच्चों को स्कूल ले जाने वाले वाहनों की स्थिति और सुरक्षा व्यवस्था के प्रति जागरूक रहना चाहिए।
यदि सभी स्तर पर निर्धारित नियमों का पालन किया जाए, तो स्कूली बच्चों के लिए सुरक्षित परिवहन व्यवस्था तैयार करने में मदद मिल सकती है।
कुल मिलाकर, कानपुर में ‘मिशन सेफ फ्यूचर 2.0’ अभियान के तहत मंगलवार को 10 स्कूली वाहनों पर कार्रवाई की गई। परिवहन विभाग ने स्कूल प्रबंधकों को वाहनों की फिटनेस, आवश्यक दस्तावेज और सुरक्षा उपकरणों को दुरुस्त रखने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियमों का पालन नहीं करने वाले वाहनों के खिलाफ आगे नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। 25 अगस्त तक चलने वाले इस अभियान के दौरान स्कूली वाहनों की जांच जारी रहने की उम्मीद है।

