सावन में नॉनवेज दुकानें बंद कराने का मामला हाईकोर्ट पहुंचा, अमरोहा पुलिस से मांगा जवाब
Digital UP News Desk
प्रयागराज: सावन माह में चिकन, मटन और अन्य नॉनवेज दुकानों को बंद कराने का मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। अमरोहा में पुलिस की ओर से नॉनवेज दुकानदारों को जारी किए गए नोटिस को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने कांवड़ मार्गों से अलग स्थित दुकानों को भी बिना तारीख वाले नोटिस जारी कर बंद कराया, जिससे दुकानदारों और नॉनवेज भोजन से जुड़े कारोबारियों की आजीविका प्रभावित हुई है।
अमरोहा निवासी नासिर फारूकी ने इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की है। याचिका में सावन के दौरान चिकन और मटन की दुकानों को बंद कराने के लिए जारी पुलिस नोटिस की वैधानिकता पर सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने इस कार्रवाई को गैरकानूनी बताते हुए अदालत से हस्तक्षेप करने और संबंधित नोटिस को रद्द करने की मांग की है।
नॉनवेज दुकानों के पुलिस नोटिस को दी गई चुनौती
याचिका में कहा गया है कि अमरोहा में कांवड़ यात्रियों की आवाजाही वाले मार्गों के अलावा शहर के अन्य इलाकों में संचालित नॉनवेज दुकानों को भी पुलिस की ओर से बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। याचिकाकर्ता का आरोप है कि कई दुकानदारों को ऐसा नोटिस दिया गया, जिस पर कोई स्पष्ट तारीख दर्ज नहीं थी।
नासिर फारूकी का कहना है कि कांवड़ मार्ग से दूर स्थित गली-मोहल्लों में चलने वाली दुकानों पर भी इस कार्रवाई का असर पड़ा है। उनके मुताबिक, पुलिस के नोटिस के बाद कई मांस विक्रेताओं के साथ-साथ नॉनवेज भोजन परोसने वाले होटल और रेस्टोरेंट भी अपना कारोबार संचालित नहीं कर पा रहे हैं।
याचिका में अदालत का ध्यान इस ओर भी दिलाया गया है कि इस तरह की कार्रवाई से बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। इसलिए पूरे मामले में कानूनी स्थिति स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
अमरोहा में 21 दुकानों को नोटिस देने का दावा
याचिका में दावा किया गया है कि अमरोहा शहर कोतवाली पुलिस ने शहरी क्षेत्र में संचालित नॉनवेज की करीब 21 दुकानों को नोटिस जारी किया था। इन नोटिसों में मीट की दुकानों को 30 दिनों तक बंद रखने के निर्देश दिए जाने की बात कही गई है।
पुलिस के इस निर्देश का प्रभाव केवल मीट बेचने वाली दुकानों तक सीमित नहीं रहा। नॉनवेज भोजन परोसने वाले होटल और रेस्टोरेंट भी इससे प्रभावित हुए। कारोबारियों का कहना है कि दुकानें और प्रतिष्ठान बंद रहने से उनकी रोजाना की आय पर असर पड़ता है।
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में कहा है कि पुलिस के नोटिस में चार सोमवार का उल्लेख किया गया था। हालांकि, उनके आरोप के मुताबिक, व्यवहार में पूरे सावन माह के दौरान चिकन और मटन की दुकानें नहीं खोलने दी जा रही हैं।
इस वजह से याचिका में नोटिस की भाषा और उसके आधार पर की जा रही कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
हाईकोर्ट ने अधिकारियों से मांगा जवाब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नासिर फारूकी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अमरोहा के संबंधित पुलिस प्रशासन और प्रमुख सचिव से जवाब तलब किया है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों से यह स्पष्ट करने को कहा है कि नॉनवेज दुकानों को बंद कराने की कार्रवाई किस आधार पर की गई।
हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के बाद अब संबंधित अधिकारियों को अपना पक्ष रखना होगा। इसके बाद अदालत उपलब्ध तथ्यों और अधिकारियों के जवाब के आधार पर आगे की कार्यवाही पर विचार कर सकती है।
हालांकि, इस मामले में अंतिम निर्णय अभी आना बाकी है। इसलिए फिलहाल यह स्पष्ट नहीं कहा जा सकता कि हाईकोर्ट इस कार्रवाई को लेकर आगे क्या आदेश जारी करेगा।
आजीविका प्रभावित होने का याचिका में दावा
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में नॉनवेज कारोबार से जुड़े लोगों की आजीविका का मुद्दा प्रमुखता से उठाया है। उनका कहना है कि दुकानदारों के अलावा होटल, रेस्टोरेंट, वहां काम करने वाले कर्मचारी और इस कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की आय भी प्रभावित होती है।
दरअसल, किसी दुकान या रेस्टोरेंट के बंद होने का असर केवल उसके मालिक तक सीमित नहीं रहता। उससे जुड़े कर्मचारियों और छोटे स्तर पर कारोबार करने वाले लोगों की आमदनी भी प्रभावित हो सकती है। इसी आधार पर याचिका में अदालत से मामले में हस्तक्षेप की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि यदि किसी विशेष मार्ग या क्षेत्र में प्रशासन की ओर से कोई प्रतिबंध लागू किया जाता है तो उसकी सीमा और कानूनी आधार स्पष्ट होना चाहिए। साथ ही, संबंधित कारोबारियों को भी नियमों की स्पष्ट जानकारी दी जानी चाहिए।
कांवड़ मार्ग और अन्य इलाकों को लेकर विवाद
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल कांवड़ मार्ग और अन्य इलाकों में स्थित नॉनवेज दुकानों को लेकर है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कांवड़ यात्रियों की आवाजाही वाले रास्तों से दूर स्थित दुकानों को भी बंद कराया गया।
याचिकाकर्ता का कहना है कि यदि प्रशासन की कार्रवाई किसी विशेष मार्ग या धार्मिक आयोजन की व्यवस्था से जुड़ी है, तो उसका दायरा स्पष्ट होना चाहिए। इसी विषय को लेकर उन्होंने हाईकोर्ट से कानूनी स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया है।
दूसरी ओर, पुलिस प्रशासन को अब अदालत के समक्ष अपनी कार्रवाई का आधार और संबंधित परिस्थितियां स्पष्ट करनी होंगी। इसलिए आने वाली सुनवाई इस मामले के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कारोबारियों की नजर हाईकोर्ट की सुनवाई पर
अमरोहा में नॉनवेज कारोबार से जुड़े लोगों की नजर अब हाईकोर्ट की आगे की सुनवाई पर है। दुकानदारों और रेस्टोरेंट संचालकों के लिए यह मामला सीधे उनके कारोबार और आय से जुड़ा हुआ है।
यदि अदालत इस मामले में कोई अंतरिम या अन्य निर्देश जारी करती है, तो उसका असर संबंधित दुकानों और कारोबारियों पर पड़ सकता है। हालांकि, फिलहाल अदालत ने केवल संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है और मामले में अंतिम फैसला नहीं आया है।
इसलिए कारोबारियों और आम लोगों के लिए अदालत की अगली कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी।
कानूनी प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होगी स्थिति
सावन माह में नॉनवेज दुकानों को बंद कराने का मामला अब प्रशासनिक कार्रवाई से आगे बढ़कर न्यायिक जांच के दायरे में आ गया है। हाईकोर्ट में दाखिल जनहित याचिका के जरिए पुलिस के नोटिस की वैधानिकता पर सवाल उठाए गए हैं।
फिलहाल अदालत ने अमरोहा के संबंधित अधिकारियों और प्रमुख सचिव से जवाब मांगा है। ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इस कार्रवाई को किस आधार पर सही ठहराता है और याचिकाकर्ता की आपत्तियों पर क्या जवाब देता है।
कुल मिलाकर, सावन में नॉनवेज दुकानें बंद कराने का मामला अब हाईकोर्ट के समक्ष है। अदालत की आगामी सुनवाई में पुलिस की कार्रवाई, नोटिस की वैधानिकता और दुकानदारों की आजीविका से जुड़े पहलुओं पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। तब तक मामले में किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

