कानपुर में शुरू हुआ ‘तेरे मेरे सपने’ सेंटर, शादी से पहले रिश्ते को मजबूत बनाने की मिलेगी ट्रेनिंग

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रिपोर्ट- मुकेश वर्मा 

कानपुर: शादी जिंदगी का एक महत्वपूर्ण फैसला है। हालांकि, शादी के बाद बदलती जीवनशैली, आपसी अपेक्षाओं, संवाद की कमी और पारिवारिक परिस्थितियों के कारण कई दंपतियों के बीच मनमुटाव पैदा हो जाता है। कई बार छोटी-छोटी गलतफहमियां समय के साथ बड़ी समस्या का रूप ले लेती हैं। ऐसे में शादी से पहले ही एक-दूसरे को समझने और वैवाहिक जीवन की जिम्मेदारियों के लिए तैयार होने की जरूरत महसूस की जा रही है।

इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए कानपुर में ‘तेरे मेरे सपने’ नाम से प्री-मैरिटल कम्युनिकेशन सेंटर की शुरुआत की गई है। इसे राज्य का पहला प्री-मैरिटल कम्युनिकेशन सेंटर बताया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य विवाह योग्य युवाओं और मंगेतरों को शादी से पहले रिश्ते की बुनियाद मजबूत करने के लिए जरूरी संवाद, समझ और व्यवहारिक तैयारी उपलब्ध कराना है।

शादी से पहले रिश्ते को समझने पर जोर

आज के समय में शादी के प्रति युवाओं की सोच तेजी से बदल रही है। करियर, व्यक्तिगत स्वतंत्रता, बदलती जीवनशैली और सोशल मीडिया के प्रभाव के कारण रिश्तों की प्रकृति भी पहले की तुलना में अलग हुई है। ऐसे में शादी के बाद पति-पत्नी के बीच एक-दूसरे से जुड़ी अपेक्षाएं पूरी न होने पर तनाव की स्थिति बन सकती है।

‘तेरे मेरे सपने’ सेंटर इसी अंतर को कम करने की कोशिश करेगा। यहां शादी करने जा रहे कपल्स को यह समझाने का प्रयास किया जाएगा कि सफल दांपत्य जीवन केवल प्रेम पर निर्भर नहीं करता, बल्कि आपसी सम्मान, भरोसे, संवाद और जिम्मेदारियों की समझ भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि शादी से पहले ही दोनों साथी एक-दूसरे की सोच, प्राथमिकताओं, जीवनशैली और अपेक्षाओं को बेहतर तरीके से समझ लें तो भविष्य में होने वाले कई विवादों को कम किया जा सकता है।

संवाद की कमी दूर करने पर विशेष फोकस

वैवाहिक रिश्तों में संवाद की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कई बार पति-पत्नी एक-दूसरे से नाराज तो होते हैं, लेकिन अपनी भावनाओं को सही तरीके से व्यक्त नहीं कर पाते। इसके परिणामस्वरूप गलतफहमियां बढ़ती जाती हैं।

सेंटर में कपल्स को इफेक्टिव कम्युनिकेशन के तरीके बताए जाएंगे। उन्हें यह समझाया जाएगा कि असहमति होने पर भी बातचीत को किस तरह सकारात्मक बनाए रखा जा सकता है। इसके साथ ही अपनी बात रखने और साथी की बात ध्यान से सुनने की कला पर भी जोर दिया जाएगा।

इस दौरान युवाओं को यह भी समझाने का प्रयास होगा कि हर मतभेद का मतलब रिश्ता खराब होना नहीं है। बल्कि, सही संवाद के जरिए कई असहमतियों का समाधान निकाला जा सकता है।

अपेक्षाओं को व्यावहारिक बनाने की कोशिश

शादी के बाद विवाद का एक बड़ा कारण पति-पत्नी की एक-दूसरे से जुड़ी अपेक्षाएं भी होती हैं। कई बार व्यक्ति अपने साथी से ऐसी उम्मीदें करने लगता है, जिन्हें पूरा करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होता।

‘तेरे मेरे सपने’ सेंटर में मैनेजिंग एक्सपेक्टेशंस यानी अपेक्षाओं के प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। विशेषज्ञ कपल्स को यह समझाने में मदद करेंगे कि शादी के बाद व्यक्तिगत पसंद और साझा जिम्मेदारियों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

इसके अलावा दोनों पार्टनर्स को यह समझने का अवसर मिलेगा कि रिश्ते में समझौता और सहयोग किस सीमा तक जरूरी है तथा व्यक्तिगत पहचान और पसंद का सम्मान कैसे बरकरार रखा जा सकता है।

परिवार और रिश्तेदारों के साथ तालमेल

भारतीय समाज में शादी केवल दो व्यक्तियों का रिश्ता नहीं मानी जाती, बल्कि इसके साथ दो परिवार भी जुड़ते हैं। ऐसे में शादी के बाद नए परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों के साथ तालमेल बैठाना कई बार चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

सेंटर में पारिवारिक सामंजस्य को लेकर भी मार्गदर्शन दिया जाएगा। कपल्स को बताया जाएगा कि नए परिवार के साथ बेहतर संबंध कैसे बनाए जाएं और साथ ही पति-पत्नी अपने व्यक्तिगत स्पेस को किस तरह बनाए रख सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, रिश्तों में संतुलन बनाए रखने के लिए सीमाओं की स्पष्ट समझ जरूरी है। इसलिए युवाओं को परिवार के प्रति जिम्मेदारियों और अपने निजी जीवन के बीच संतुलन स्थापित करने के व्यावहारिक तरीके बताए जाएंगे।

वित्तीय जिम्मेदारियों की भी होगी चर्चा

शादी के बाद आर्थिक जिम्मेदारियां भी बढ़ती हैं। घर का खर्च, बचत, भविष्य की योजनाएं और व्यक्तिगत जरूरतें कई बार दंपतियों के बीच चर्चा का विषय बन जाती हैं। यदि इन मामलों पर पहले से बातचीत न हो तो बाद में मतभेद की स्थिति बन सकती है।

इसीलिए सेंटर में फाइनेंशियल प्लानिंग से जुड़े सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। कपल्स को शादी के बाद आने वाली आर्थिक जिम्मेदारियों पर खुलकर बातचीत करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

इसके अलावा भविष्य के लक्ष्यों, बचत की आदतों और परिवार से जुड़ी आर्थिक प्राथमिकताओं को लेकर भी आपसी समझ विकसित करने पर जोर दिया जाएगा।

भावनात्मक मजबूती पर भी ध्यान

वैवाहिक जीवन में आर्थिक और सामाजिक पहलुओं के साथ भावनात्मक समझ भी जरूरी है। हर व्यक्ति का तनाव से निपटने का तरीका अलग हो सकता है। ऐसे में साथी की भावनाओं को समझना और जरूरत के समय उसका सहयोग करना रिश्ते को मजबूत बना सकता है।

‘तेरे मेरे सपने’ सेंटर में भावनात्मक समझ और आपसी सहयोग से जुड़े विषयों पर भी विशेषज्ञ मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा। इसका उद्देश्य कपल्स को यह समझाना है कि किसी भी रिश्ते में भावनाओं को दबाने के बजाय स्वस्थ तरीके से व्यक्त करना क्यों जरूरी है।

विशेषज्ञों की टीम करेगी मार्गदर्शन

सेंटर में अनुभवी रिलेशनशिप काउंसलर्स, मनोवैज्ञानिकों और समाजशास्त्रियों की टीम युवाओं और कपल्स का मार्गदर्शन करेगी। विशेषज्ञ शादी से पहले उनके सवालों और चिंताओं को समझने का प्रयास करेंगे तथा आवश्यकता के अनुसार उन्हें व्यावहारिक सुझाव देंगे।

सेंटर की अवधारणा इस सोच पर आधारित है कि जिंदगी के बड़े फैसलों के लिए तैयारी जरूरी होती है। जिस तरह शिक्षा, नौकरी या किसी अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए व्यक्ति तैयारी करता है, उसी तरह विवाह जैसे महत्वपूर्ण जीवन-निर्णय के लिए भी मानसिक और व्यवहारिक तैयारी उपयोगी हो सकती है।

समय की जरूरत बनती जा रही ऐसी पहल

स्थानीय नागरिकों और समाजशास्त्रियों ने इस पहल का स्वागत किया है। उनका मानना है कि बदलते सामाजिक परिवेश में विवाह से पहले संवाद और समझ विकसित करने की पहल उपयोगी साबित हो सकती है।

हालांकि, किसी भी वैवाहिक रिश्ते की सफलता कई परिस्थितियों पर निर्भर करती है। फिर भी शादी से पहले एक-दूसरे को समझने, अपेक्षाओं पर बातचीत करने और भविष्य की जिम्मेदारियों को लेकर स्पष्टता बनाने से रिश्ते की शुरुआत अधिक मजबूत आधार पर की जा सकती है।

कुल मिलाकर, कानपुर में शुरू किया गया ‘तेरे मेरे सपने’ प्री-मैरिटल कम्युनिकेशन सेंटर युवाओं को शादी के लिए केवल सामाजिक नहीं, बल्कि भावनात्मक और व्यावहारिक रूप से तैयार करने की दिशा में एक नई पहल है। यदि यह प्रयास अपने उद्देश्य में सफल होता है तो आने वाले समय में ऐसे केंद्र अन्य शहरों में भी युवाओं और परिवारों के लिए उपयोगी मॉडल बन सकते हैं।

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