ब्रज भूषण का बड़ा आरोप हुड्डा परिवार ने रची थी साजिश, बोले- 42 लोग थे शामिल
Digital UP News Desk
लखनऊ: पूर्व सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष ब्रज भूषण शरण सिंह ने एक बार फिर 2023 के पहलवान आंदोलन और अपने खिलाफ दर्ज मामले को लेकर बड़ा राजनीतिक दावा किया है। गोंडा के विश्नोहरपुर स्थित अपने आवास पर सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में सिंह ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ पूरी कार्रवाई एक राजनीतिक साजिश का हिस्सा थी। उन्होंने इस कथित साजिश के पीछे हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के परिवार का हाथ होने का दावा किया।
ब्रज भूषण शरण सिंह ने कहा कि कुश्ती संघ में वर्चस्व की लड़ाई काफी पहले से चली आ रही थी। उनके मुताबिक, यह विवाद वर्ष 2012 से शुरू हुआ, जब उन्होंने राष्ट्रीय कुश्ती संस्था के अध्यक्ष पद का चुनाव जीता था। सिंह का दावा है कि उस समय कांग्रेस नेता और भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बेटे दीपेंद्र हुड्डा ने भी अध्यक्ष पद के लिए चुनाव लड़ा था। इसके बाद दोनों खेमों के बीच राजनीतिक और संगठनात्मक मतभेद बढ़ते चले गए।
सिंह ने आरोप लगाया कि बाद में इसी पुरानी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता ने 2023 में उनके खिलाफ हुए पहलवानों के आंदोलन का रूप ले लिया। हालांकि, उनके इन आरोपों पर हुड्डा परिवार की ओर से इस रिपोर्ट के समय कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
2023 में जंतर-मंतर पर हुआ था लंबा आंदोलन
वर्ष 2023 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर कई प्रमुख पहलवानों ने ब्रज भूषण शरण सिंह के खिलाफ प्रदर्शन किया था। यह आंदोलन कई सप्ताह तक चला और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना। पहलवानों ने सिंह पर गंभीर आरोप लगाए थे और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
उस समय ब्रज भूषण ने आंदोलन के राजनीतिकरण का आरोप लगाया था। भारतीय कुश्ती से जुड़े इस विवाद में कई राजनीतिक दलों के नेताओं ने प्रदर्शन कर रहे पहलवानों का समर्थन किया था। उस दौर की रिपोर्टों में भी सिंह ने आंदोलन के पीछे राजनीतिक प्रभाव होने का दावा किया था।
इसके बाद दिल्ली पुलिस ने महिला पहलवानों की शिकायतों के आधार पर ब्रज भूषण शरण सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया। जून 2023 में पुलिस ने उनके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। मामले में उन पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे।
दिल्ली कोर्ट के फैसले के बाद फिर उठाया राजनीतिक साजिश का मुद्दा
ब्रज भूषण शरण सिंह ने सोमवार को बातचीत के दौरान दिल्ली की अदालत के हालिया फैसले का भी उल्लेख किया। 3 अगस्त 2026 को राउज एवेन्यू कोर्ट ने महिला पहलवानों से जुड़े यौन उत्पीड़न मामले में सिंह को बरी कर दिया था। इस मामले में उनके साथ WFI के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर भी आरोपी थे।
अदालत के फैसले के बाद सिंह लगातार यह कहते रहे हैं कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को राजनीतिक उद्देश्य से आगे बढ़ाया गया। सोमवार को भी उन्होंने कहा कि अदालत के फैसले से उनके उस रुख की पुष्टि हुई है, जिसे वह शुरुआत से ही दोहराते रहे थे।
हालांकि, किसी आपराधिक मामले में बरी होना इस बात का न्यायिक निष्कर्ष होता है कि अभियोजन पक्ष आरोपों को कानूनी मानक के अनुसार साबित नहीं कर सका। इसलिए अदालत के फैसले और राजनीतिक आरोपों को अलग-अलग संदर्भों में देखना जरूरी है।
हुड्डा परिवार पर महिला पहलवानों को प्रभावित करने का आरोप
ब्रज भूषण शरण सिंह ने बातचीत के दौरान हुड्डा परिवार पर एक और गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि कुछ महिला पहलवानों पर उनके खिलाफ शिकायत करने के लिए दबाव बनाया गया था। सिंह ने आरोप लगाया कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण पूरे मामले को उनके खिलाफ इस्तेमाल किया गया।
उन्होंने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी समेत विपक्षी दलों पर भी राजनीतिक लाभ लेने के लिए पहलवानों के आंदोलन का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।
हालांकि, ये सभी दावे ब्रज भूषण शरण सिंह के राजनीतिक आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं हुई है। संबंधित राजनीतिक पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आने पर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
बोले- साजिश में करीब 42 लोग शामिल थे
ब्रज भूषण ने अपने दावों को आगे बढ़ाते हुए कहा कि उनके खिलाफ कथित साजिश में करीब 42 लोग शामिल थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ उद्योगपतियों की ओर से इस पूरी प्रक्रिया के लिए आर्थिक मदद उपलब्ध कराई गई थी।
सिंह ने हालांकि इन दावों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत दस्तावेज या साक्ष्य पत्रकारों के सामने प्रस्तुत नहीं किया। इसलिए इन आरोपों को उनके बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कुश्ती संघ में उनके कार्यकाल के दौरान किए गए कई बदलावों का उद्देश्य जूनियर पहलवानों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराना था। उनके अनुसार, राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी, मेडिकल छूट, प्रशिक्षण शिविरों और बड़े टूर्नामेंटों के लिए चयन प्रक्रिया से जुड़े कुछ नियमों में बदलाव किए गए थे।
WFI में सुधारों को लेकर भी दी अपनी सफाई
पूर्व WFI अध्यक्ष ने कहा कि उनके कार्यकाल में किए गए बदलावों को लेकर कुछ पहलवानों और संबंधित लोगों के बीच असहमति पैदा हुई थी। उनका दावा है कि कुछ खिलाड़ी जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं की निर्धारित प्रक्रिया से गुजरे बिना बड़े आयोजनों में सीधे प्रवेश चाहते थे।
सिंह के अनुसार, नियमों को लेकर शुरू हुआ विवाद धीरे-धीरे संगठनात्मक मतभेद और फिर राजनीतिक संघर्ष में बदल गया। उन्होंने दावा किया कि इसी माहौल ने बाद में उनके खिलाफ आंदोलन का रूप लिया।
हालांकि, कुश्ती संघ से जुड़े नियमों और चयन प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग पक्षों के अपने तर्क रहे हैं। इसलिए इस पूरे घटनाक्रम को केवल एक पक्ष के बयान के आधार पर देखना उचित नहीं होगा।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय कुश्ती की छवि प्रभावित होने का दावा
ब्रज भूषण शरण सिंह ने कहा कि 2023 के विवाद का असर भारतीय कुश्ती की अंतरराष्ट्रीय छवि पर भी पड़ा। उनके अनुसार, देश के शीर्ष पहलवानों और कुश्ती प्रशासन के बीच सार्वजनिक रूप से सामने आया विवाद भारतीय खेल व्यवस्था के लिए सकारात्मक नहीं था।
दरअसल, पहलवानों के आंदोलन ने राष्ट्रीय स्तर पर खेल प्रशासन, खिलाड़ियों की शिकायतों और महासंघों की कार्यप्रणाली को लेकर व्यापक चर्चा शुरू कर दी थी। इसके बाद भारतीय कुश्ती प्रशासन में भी कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले।
इस पूरे विवाद का असर केवल WFI तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारतीय खेल व्यवस्था में खिलाड़ियों की आवाज, शिकायत निवारण और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में आए।
अदालत में क्या हुआ था?
महिला पहलवानों की शिकायतों के आधार पर दिल्ली पुलिस ने 2023 में ब्रज भूषण के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। बाद में मई 2024 में अदालत ने उनके खिलाफ कुछ धाराओं के तहत आरोप तय किए। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से शिकायतकर्ताओं सहित कई गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
जुलाई 2026 में मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद राउज एवेन्यू कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था। अदालत ने 3 अगस्त को अपना फैसला सुनाते हुए ब्रज भूषण शरण सिंह को बरी कर दिया।
इस फैसले के बाद मामले को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई। ब्रज भूषण ने जहां इसे अपने पक्ष की पुष्टि बताया, वहीं इस पूरे प्रकरण में शिकायतकर्ताओं और उनके समर्थकों की ओर से उठाए गए सवालों का संदर्भ भी महत्वपूर्ण बना हुआ है।
यूपी की राजनीति पर भी बोले ब्रज भूषण
पत्रकारों से बातचीत के दौरान ब्रज भूषण शरण सिंह ने उत्तर प्रदेश की राजनीति और आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अगर प्रदेश में मजबूत राजनीतिक दावेदार के रूप में उभरना चाहती है तो उसे समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करना चाहिए।
उनके अनुसार, विपक्षी वोटों का बिखराव कांग्रेस और समाजवादी पार्टी दोनों के लिए नुकसानदेह हो सकता है। इसलिए आगामी चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत होगी।
हालांकि, उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में गठबंधन का स्वरूप कई राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों पर निर्भर करता है। ऐसे में आने वाले समय में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की रणनीति पर नजर रहेगी।
आगे भी जारी रह सकती है राजनीतिक बयानबाजी
ब्रज भूषण शरण सिंह के ताजा बयान ने 2023 के पहलवान आंदोलन और WFI विवाद को एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। एक ओर अदालत से बरी होने के बाद सिंह अपने खिलाफ लगे आरोपों को राजनीतिक साजिश से जोड़ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पूरे प्रकरण में सामने आए आरोप और आंदोलन की पृष्ठभूमि भी भारतीय खेल जगत के लिए महत्वपूर्ण अध्याय बने हुए हैं।
फिलहाल, सिंह के हुड्डा परिवार और अन्य लोगों पर लगाए गए कथित साजिश के आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया का इंतजार है। इसके साथ ही यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत के फैसले के बाद यह विवाद राजनीतिक स्तर पर किस दिशा में आगे बढ़ता है।
कुल मिलाकर, ब्रज भूषण शरण सिंह ने अपने ताजा बयान के जरिए 2023 के विवाद को केवल खेल प्रशासन से जुड़ा मामला न मानकर उसे राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से जोड़ने की कोशिश की है। उनके दावों ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा की राजनीति के साथ-साथ भारतीय कुश्ती के पुराने विवाद को भी एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

