आकाश आनंद का योगी सरकार पर बड़ा हमला, बोले- 8 साल में विज्ञापनों पर खर्च किए 7,000 करोड़ रुपये

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Digital UP News Desk 

हाथरस/सादाबाद। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद ने सोमवार को हाथरस के सादाबाद में आयोजित जनसभा के दौरान उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने प्रदेश सरकार पर विकास कार्यों से अधिक प्रचार-प्रसार पर ध्यान देने का आरोप लगाया। आकाश आनंद ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले करीब आठ वर्षों में विज्ञापनों पर लगभग 7,000 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। उनके मुताबिक, सरकार का यह खर्च उसकी उपलब्धियों के प्रचार पर अधिक केंद्रित रहा, जबकि आम जनता से जुड़े कई मुद्दे अब भी गंभीर बने हुए हैं।

आकाश आनंद ने अपने संबोधन में कहा कि सरकार को विज्ञापनों के जरिए अपनी छवि बनाने के बजाय जमीन पर काम करने और जनता की समस्याओं का समाधान करने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने विज्ञापन खर्च के आंकड़े का उल्लेख करते हुए इसे सरकार की प्राथमिकताओं से जोड़ने की कोशिश की। हालांकि, उनके द्वारा बताए गए करीब 7,000 करोड़ रुपये के आंकड़े की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे आकाश आनंद के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

विज्ञापन खर्च को लेकर सरकार पर निशाना

आकाश आनंद ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में पिछले आठ वर्षों के दौरान सरकार ने औसतन करीब 2.3 करोड़ रुपये प्रतिदिन विज्ञापनों पर खर्च किए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इतनी बड़ी राशि सरकार की उपलब्धियों के प्रचार पर खर्च की जा रही है, तो फिर प्रदेश की बुनियादी समस्याओं को दूर करने के लिए कितने संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

बसपा नेता ने कहा कि किसी भी सरकार की सफलता का आकलन उसके विज्ञापनों से नहीं, बल्कि जनता के जीवन में आए बदलाव से होना चाहिए। उनके अनुसार, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, किसानों की आय, महंगाई और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे सीधे आम लोगों से जुड़े हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में काम करने के बजाय प्रचार पर अधिक जोर देना सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़ा करता है।

आकाश आनंद ने अपने भाषण में सरकार की ब्रांडिंग और प्रचार अभियान को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि जनता को यह जानने का अधिकार है कि सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों पर कितना पैसा खर्च हुआ और उसका वास्तविक लाभ कितने लोगों तक पहुंचा।

विकास बनाम प्रचार का मुद्दा उठाया

जनसभा में आकाश आनंद ने विकास और प्रचार के बीच अंतर का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से लगातार उपलब्धियों का प्रचार किया जाता है, लेकिन दूसरी ओर आम नागरिकों को कई स्तरों पर समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

बसपा नेता ने आरोप लगाया कि सरकार का जोर अपनी छवि मजबूत करने पर है। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी योजनाएं वास्तव में प्रभावी हैं, तो उनका असर गांव, कस्बे और शहर के स्तर पर दिखाई देना चाहिए। उनके मुताबिक, केवल विज्ञापन जारी करने से जनता की समस्याएं खत्म नहीं होतीं।

उन्होंने जनता से सरकार के कामकाज का मूल्यांकन अपने अनुभव के आधार पर करने की अपील की। साथ ही उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि सरकारी खर्च का कितना हिस्सा प्रचार पर और कितना हिस्सा वास्तविक जनकल्याणकारी कार्यों पर खर्च किया जा रहा है।

स्वास्थ्य सेवाओं का भी उठाया मुद्दा

आकाश आनंद ने उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने अपने संबोधन में झांसी के अस्पताल की घटना का उल्लेख करते हुए स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताई। उनका आरोप था कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सरकार के दावों और जमीनी स्थिति के बीच अंतर दिखाई देता है।

उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पताल आम लोगों के लिए स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। ऐसे में वहां संसाधन, चिकित्सकीय सुविधाएं, पर्याप्त स्टाफ और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

आकाश आनंद ने स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ-साथ अन्य व्यवस्थागत कमियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी घटनाओं से सबक लेते हुए व्यवस्था को मजबूत करना चाहिए, ताकि आम नागरिकों को इलाज के लिए परेशान न होना पड़े।

कानून-व्यवस्था को लेकर भी सवाल

बसपा नेता ने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि सरकार कानून-व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर जनता के सामने कई तरह की चुनौतियां मौजूद हैं।

आकाश आनंद ने कहा कि कानून-व्यवस्था केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि आम नागरिकों में सुरक्षा की भावना पैदा होना भी जरूरी है। उन्होंने सरकार से अपेक्षा जताई कि कानून-व्यवस्था को लेकर आंकड़ों और प्रचार से आगे बढ़कर आम लोगों के अनुभवों को भी महत्व दिया जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि शासन की वास्तविक परीक्षा तब होती है, जब कमजोर और जरूरतमंद व्यक्ति को समय पर न्याय और प्रशासनिक सहायता मिलती है।

युवाओं और रोजगार का भी जिक्र

आकाश आनंद ने युवाओं के मुद्दे को भी अपने संबोधन का हिस्सा बनाया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की बड़ी आबादी युवाओं की है और उनके सामने रोजगार तथा बेहतर अवसर सबसे महत्वपूर्ण सवालों में शामिल हैं।

उन्होंने सरकार से रोजगार के क्षेत्र में ठोस अवसर पैदा करने की मांग की। उनके मुताबिक, युवा केवल विज्ञापन या घोषणाएं नहीं चाहते, बल्कि उन्हें शिक्षा के बाद रोजगार और अपने भविष्य को बेहतर बनाने के अवसर चाहिए।

बसपा नेता ने कहा कि युवाओं को राजनीति में भी अपनी भूमिका तय करनी होगी। उन्होंने युवाओं से अपने क्षेत्र और प्रदेश के मुद्दों को समझकर राजनीतिक निर्णय लेने की अपील की।

सादाबाद से बसपा ने घोषित किया प्रत्याशी

आकाश आनंद की सादाबाद सभा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण रही। इसी दौरान बसपा की ओर से सादाबाद विधानसभा सीट के लिए डॉ. अविन शर्मा को प्रत्याशी घोषित किए जाने की जानकारी सामने आई। आकाश आनंद ने सभा में लोगों से आगामी चुनाव में सक्रिय भागीदारी की अपील की। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने जनता से पिछले वर्षों के कामकाज का हिसाब मांगने की बात भी कही।

इससे संकेत मिलता है कि बसपा आगामी चुनावी रणनीति में सादाबाद सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रों पर अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है। आकाश आनंद लगातार युवाओं और नए मतदाताओं को पार्टी से जोड़ने पर जोर देते दिखाई दे रहे हैं।

राजनीतिक हमले से गरमाया माहौल

सादाबाद की सभा में आकाश आनंद ने भाजपा के साथ-साथ विपक्षी दलों पर भी राजनीतिक टिप्पणी की। उन्होंने युवाओं को केंद्र में रखकर अपनी राजनीतिक शैली को आगे बढ़ाने का प्रयास किया। एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने राहुल गांधी और अखिलेश यादव को ‘अंकल’ कहकर संबोधित करते हुए भाजपा से भी पिछले वर्षों का हिसाब मांगने की बात कही।

इस तरह सादाबाद की सभा को केवल स्थानीय राजनीतिक कार्यक्रम के तौर पर नहीं, बल्कि बसपा की आगामी चुनावी रणनीति के संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।

आरोपों के बीच सरकार के कामकाज पर बहस तेज

आकाश आनंद के बयान के बाद उत्तर प्रदेश सरकार के कामकाज, सरकारी विज्ञापन खर्च और विकास कार्यों को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है। विपक्षी दल अक्सर सरकार के विज्ञापन खर्च और प्रचार अभियान को मुद्दा बनाते रहे हैं, जबकि सरकार की ओर से विकास योजनाओं, बुनियादी ढांचे और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों को अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश किया जाता है।

ऐसे में आने वाले समय में यह मुद्दा चुनावी राजनीति में और प्रमुख हो सकता है। खास तौर पर रोजगार, स्वास्थ्य, कानून-व्यवस्था और सरकारी खर्च जैसे विषय जनता के बीच सीधे प्रभाव डालने वाले मुद्दे हैं।

फिलहाल, आकाश आनंद के करीब 7,000 करोड़ रुपये के विज्ञापन खर्च के दावे की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। इसलिए इस आंकड़े को राजनीतिक बयान के रूप में ही देखा जाना चाहिए। हालांकि, सादाबाद की सभा के जरिए बसपा ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि वह सरकार की नीतियों और खर्च को चुनावी मुद्दा बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

आगामी चुनावी माहौल में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भाजपा और राज्य सरकार इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और बसपा इन मुद्दों को जनता के बीच किस तरह आगे ले जाती है।

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