कानपुर में फर्जी मार्कशीट और डिग्री बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़, दो गिरफ्तार, लाखों की नकदी बरामद

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रिपोर्ट – विक्की रघुवंशी 

कानपुर: कमिश्नरेट कानपुर नगर की विशेष जांच टीम (एसआईटी) और थाना फीलखाना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र तैयार कर बेचने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस कार्रवाई में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से विभिन्न विश्वविद्यालयों और शिक्षा बोर्डों के नाम पर तैयार किए गए 59 कथित फर्जी मार्कशीट, डिग्री, माइग्रेशन सर्टिफिकेट और प्रोविजनल प्रमाणपत्र, चार एंड्रॉयड मोबाइल फोन तथा अपराध से अर्जित बताए जा रहे 4,53,000 नकद बरामद किए गए हैं।

पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि यह गिरोह कई वर्षों से देश के विभिन्न राज्यों में कथित फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र तैयार कर बेचने का अवैध कारोबार कर रहा था। मामले में थाना फीलखाना में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है तथा गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश किए जाने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। वहीं, गिरोह के अन्य सदस्यों और कथित मास्टरमाइंड की तलाश जारी है।

एसआईटी और फीलखाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस कार्रवाई को एसआईटी और थाना फीलखाना पुलिस ने संयुक्त रूप से अंजाम दिया। खुफिया सूचना और तकनीकी जांच के आधार पर टीम ने संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी की, जिसके बाद छापेमारी कर दो लोगों को गिरफ्तार किया गया।

पुलिस का कहना है कि बरामद दस्तावेजों की जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनका उपयोग किन-किन स्थानों पर किया गया और इससे कितने लोगों को लाभ पहुंचाया गया।

59 कथित फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्र बरामद

पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से विभिन्न विश्वविद्यालयों और शिक्षा बोर्डों के नाम पर तैयार किए गए 59 कथित फर्जी दस्तावेज बरामद हुए हैं।

इनमें मार्कशीट, डिग्री, माइग्रेशन सर्टिफिकेट और प्रोविजनल प्रमाणपत्र शामिल हैं। इसके अतिरिक्त चार एंड्रॉयड मोबाइल फोन भी बरामद किए गए हैं, जिनकी डिजिटल जांच की जाएगी।

जांच एजेंसियां मोबाइल फोन में मौजूद डेटा के माध्यम से गिरोह के नेटवर्क और संभावित ग्राहकों तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं।

4.53 लाख नकद भी बरामद

पुलिस ने आरोपियों के पास से ₹4,53,000 नकद भी बरामद किए हैं।

पुलिस का दावा है कि यह राशि कथित रूप से फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कर बेचने से अर्जित की गई हो सकती है। हालांकि, इस संबंध में विस्तृत वित्तीय जांच की जा रही है।

अधिकारियों का कहना है कि बैंक खातों, डिजिटल लेन-देन और अन्य आर्थिक गतिविधियों की भी जांच की जाएगी, ताकि पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।

देशभर में फैला हो सकता है नेटवर्क

प्रारंभिक पूछताछ में पुलिस को जानकारी मिली है कि यह गिरोह कई वर्षों से सक्रिय था और विभिन्न राज्यों के लोगों तक अपनी पहुंच बना चुका था।

हालांकि, पुलिस ने अभी तक इस संबंध में विस्तृत आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही नेटवर्क के वास्तविक दायरे की पुष्टि की जाएगी।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि गिरोह किन माध्यमों से ग्राहकों तक पहुंचता था और प्रमाणपत्रों की आपूर्ति कैसे की जाती थी।

मास्टरमाइंड और अन्य आरोपियों की तलाश जारी

पुलिस के अनुसार, इस गिरोह के अन्य सदस्य अभी फरार हैं।

विशेष रूप से कथित मास्टरमाइंड की तलाश के लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है। संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है और तकनीकी निगरानी भी की जा रही है।

अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

डिजिटल साक्ष्यों की होगी फॉरेंसिक जांच

बरामद मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की फोरेंसिक जांच कराई जाएगी। विशेषज्ञ इन उपकरणों से प्राप्त डेटा के आधार पर संपर्क सूत्र, दस्तावेजों की डिजिटल फाइलें, लेन-देन और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाने का प्रयास करेंगे।

पुलिस का मानना है कि इससे पूरे नेटवर्क का खुलासा करने में मदद मिल सकती है।

शैक्षिक प्रमाणपत्रों की सत्यता का महत्व

विशेषज्ञों का कहना है कि शैक्षिक प्रमाणपत्र किसी भी छात्र या अभ्यर्थी की शैक्षणिक योग्यता का आधिकारिक आधार होते हैं।

यदि फर्जी प्रमाणपत्रों का उपयोग किया जाता है, तो इससे शिक्षा व्यवस्था, भर्ती प्रक्रियाओं और संस्थागत पारदर्शिता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

इसी कारण ऐसे मामलों में समय पर जांच और कानूनी कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जाता है।

पुलिस ने नागरिकों से की अपील

पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी शैक्षिक प्रमाणपत्र को केवल अधिकृत संस्थानों और विश्वविद्यालयों से ही प्राप्त करें।

यदि किसी व्यक्ति को फर्जी प्रमाणपत्र तैयार करने या बेचने से संबंधित कोई जानकारी मिलती है, तो उसकी सूचना तत्काल पुलिस या संबंधित प्राधिकरण को दें।

इसके अलावा किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन विज्ञापन या सोशल मीडिया संदेश से सतर्क रहने की भी सलाह दी गई है।

कानूनी प्रक्रिया जारी

थाना फीलखाना में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।

गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय में पेश किया जा रहा है। वहीं, पुलिस पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही है ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि इस नेटवर्क से कितने लोग जुड़े हुए हैं और फर्जी दस्तावेजों का उपयोग किन-किन क्षेत्रों में किया गया।

कानपुर कमिश्नरेट की एसआईटी और थाना फीलखाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में कथित फर्जी मार्कशीट और डिग्री बनाने वाले एक संगठित गिरोह का खुलासा हुआ है। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर 59 कथित फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्र, चार मोबाइल फोन और 4.53 लाख नकद बरामद किए हैं।

फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस गिरोह के मास्टरमाइंड सहित अन्य फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है। मामले से जुड़े सभी तथ्यों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही अंतिम रूप से होगी।

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