श्रावण में भी कथित अवैध मिट्टी खनन जारी, अमरोहा में सड़कों पर दौड़ रही मिट्टी से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां – खनन विभाग घेरे में
रिपोर्ट – इकबाल अंसारी
अमरोहा: जनपद अमरोहा के अमरोहा देहात थाना क्षेत्र के गांव धनौरी में श्रावण मास के दौरान कथित अवैध मिट्टी खनन और मिट्टी से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के आवागमन का मामला सामने आया है। ग्रामीणों द्वारा बनाए गए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्थानीय प्रशासन और खनन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि दिन निकलते ही मिट्टी से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां सड़कों पर दिखाई देने लगती हैं और कथित तौर पर मिट्टी का परिवहन किया जा रहा है।
श्रावण मास में कांवड़ यात्रा के चलते प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर विशेष इंतजाम किए जाते हैं। ऐसे में ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में मिट्टी से भरे वाहनों की आवाजाही से न केवल सड़क यातायात प्रभावित हो सकता है, बल्कि कांवड़ यात्रियों के सुरक्षित आवागमन को लेकर भी चिंता बनी हुई है।
धनौरी गांव में मिट्टी से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का वीडियो वायरल
ग्रामीणों के अनुसार, अमरोहा देहात थाना क्षेत्र के धनौरी गांव और आसपास के इलाकों में सुबह के समय मिट्टी से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां सड़क पर आती-जाती दिखाई देती हैं। स्थानीय लोगों ने इन वाहनों का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद मामला चर्चा में आ गया।
वायरल वीडियो में मिट्टी से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां सड़क से गुजरती हुई दिखाई दे रही हैं। हालांकि, वीडियो में दिखाई दे रहे वाहनों और कथित खनन की वैधता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले की वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने संबंधित अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेने और आवश्यक जांच कराने की मांग की है।
कांवड़ यात्रा के बीच वाहनों की आवाजाही पर सवाल
श्रावण मास में कांवड़ यात्रा के चलते विभिन्न मार्गों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है। कांवड़ियों के सुरक्षित आवागमन को ध्यान में रखते हुए प्रशासन और पुलिस की ओर से यातायात प्रबंधन के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं की जाती हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे समय में यदि मिट्टी से भरी भारी या व्यावसायिक ट्रैक्टर-ट्रॉलियां लगातार सड़कों पर चल रही हैं, तो इससे यातायात व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। खासकर कांवड़ मार्गों पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के कारण वाहनों की आवाजाही को लेकर अतिरिक्त सावधानी की जरूरत होती है।
इसी वजह से स्थानीय लोगों ने प्रशासन से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि जिन वाहनों का वीडियो सामने आया है, वे किस उद्देश्य से मिट्टी का परिवहन कर रहे थे और उनके पास आवश्यक अनुमति अथवा दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं।
ग्रामीणों ने लगाए कथित अवैध खनन के आरोप
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में कथित रूप से मिट्टी का अवैध खनन किया जा रहा है और खनन के बाद मिट्टी को ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के जरिए दूसरे स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, यह गतिविधि कथित तौर पर दिन के समय भी जारी रहती है।
हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। किसी भी खनन गतिविधि को अवैध मानने से पहले संबंधित विभाग द्वारा स्थल निरीक्षण, दस्तावेजों की जांच और नियमानुसार सत्यापन आवश्यक है।
फिर भी, ग्रामीणों द्वारा वीडियो सामने लाए जाने के बाद मामले की जांच की मांग तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि यदि खनन और मिट्टी परिवहन के लिए आवश्यक अनुमति नहीं है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
सड़क सुरक्षा को लेकर ग्रामीणों में चिंता
मिट्टी से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के लगातार आवागमन को लेकर ग्रामीण सड़क सुरक्षा को लेकर भी चिंतित हैं। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों पर पहले से ही स्थानीय लोगों, दोपहिया वाहनों और अन्य वाहनों की आवाजाही रहती है। ऐसे में भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ने पर यातायात व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
इसके अलावा, यदि ट्रैक्टर-ट्रॉली में निर्धारित क्षमता से अधिक मिट्टी भरी हो या वाहन को बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के चलाया जा रहा हो, तो सड़क पर अन्य लोगों के लिए परेशानी पैदा हो सकती है। इसलिए ग्रामीणों ने परिवहन किए जा रहे वाहनों की जांच करने की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को केवल वायरल वीडियो सामने आने के बाद ही नहीं, बल्कि नियमित रूप से क्षेत्र में निगरानी करनी चाहिए, ताकि नियमों का उल्लंघन होने पर समय रहते कार्रवाई की जा सके।
खनन विभाग और पुलिस से संयुक्त कार्रवाई की मांग
स्थानीय लोगों ने कथित अवैध मिट्टी खनन और परिवहन की जांच के लिए खनन विभाग तथा पुलिस की संयुक्त कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
इसके अलावा लोगों ने यह भी मांग की है कि कांवड़ यात्रा के दौरान प्रमुख मार्गों पर वाहनों की आवाजाही पर विशेष निगरानी रखी जाए। इससे श्रद्धालुओं के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी सुगम आवागमन की सुविधा मिल सकेगी।
वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को वायरल वीडियो की जांच कर यह पता लगाना चाहिए कि वीडियो में दिखाई दे रहे वाहन कहां से मिट्टी लेकर आ रहे थे और उसे किस स्थान पर ले जाया जा रहा था।
प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
सोशल मीडिया पर वीडियो सामने आने के बाद अब लोगों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि क्षेत्र में वास्तव में अवैध खनन हो रहा है तो इसे तत्काल रोका जाना चाहिए।
इसके साथ ही यह भी जांच जरूरी है कि मिट्टी का परिवहन करने वाले वाहनों के पास आवश्यक दस्तावेज और अनुमति मौजूद है या नहीं। यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित विभाग द्वारा नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल वायरल वीडियो के आधार पर लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि धनौरी क्षेत्र में दिखाई दे रहे वाहनों का संचालन नियमों के अनुरूप था या नहीं।
कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षा पर विशेष ध्यान जरूरी
श्रावण मास में कांवड़ यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में शिवभक्त विभिन्न मार्गों से गुजरते हैं। इसलिए प्रशासन के सामने एक ओर जहां श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है, वहीं दूसरी ओर सामान्य यातायात को भी व्यवस्थित बनाए रखना जरूरी है।
ऐसे में कांवड़ मार्गों पर किसी भी तरह की अनधिकृत या नियम विरुद्ध वाहन गतिविधि की शिकायत सामने आने पर उसकी जांच महत्वपूर्ण हो जाती है। इससे यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
धनौरी गांव में सामने आए मामले ने भी इसी वजह से स्थानीय लोगों का ध्यान खींचा है। ग्रामीण चाहते हैं कि संबंधित विभाग मौके पर पहुंचकर स्थिति की जांच करे और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाए तो आवश्यक कदम उठाए।
कुल मिलाकर, अमरोहा देहात थाना क्षेत्र के धनौरी गांव में मिट्टी से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के वायरल वीडियो के बाद कथित अवैध खनन और परिवहन को लेकर सवाल उठे हैं। अब देखना होगा कि खनन विभाग और स्थानीय प्रशासन इस मामले में क्या जांच करता है और जांच के बाद क्या तथ्य सामने आते हैं। फिलहाल ग्रामीणों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और कांवड़ यात्रा के दौरान सुरक्षित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

